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Shibu Soren Death News Today: झारखंड के ‘गुरुजी’ नहीं रहे, Dishom Guru के जाने से टूटा आदिवासियों का दिल

झारखंड के ‘दिशोम गुरु’ नहीं रहे: शिबू सोरेन का निधन, झारखंड आंदोलन के युग का अंत

Shibu Soren Death Reason | JMM Founder Passes Away at 81

“गुरुजी चले गए…”
ये शब्द सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की उस सियासी विरासत पर भारी पड़ गए हैं, जो आदिवासी अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई से जन्मी थी।
4 अगस्त 2025 की सुबह 8:48 बजे, दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और झारखंड आंदोलन के प्रेरणास्रोत शिबू सोरेन ने अंतिम सांस ली। 81 वर्षीय शिबू सोरेन नेफ्रोलॉजी (किडनी संबंधी) बीमारी से जूझ रहे थे और 19 जून 2025 से दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती थे।

उनके निधन की खबर जैसे ही सामने आई, झारखंड से लेकर दिल्ली तक, आदिवासी समाज से लेकर राजनीतिक गलियारों तक एक शून्य गूंज उठा। झारखंड के सीएम और उनके बेटे हेमंत सोरेन ने कहा – “मैं आज शून्य हो गया हूं, गुरुजी हम सबको छोड़कर चले गए।”

कौन थे शिबू सोरेन?

जन्म: 11 जनवरी 1944, बोकारो जिला (वर्तमान झारखंड)

उपनाम: ‘दिशोम गुरु’ यानी आदिवासी समाज के मार्गदर्शक

पार्टी: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक

3 बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे

झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के आंदोलन के शीर्ष नेता

ब और कैसे हुई तबीयत बिगड़ने की शुरुआत?

शिबू सोरेन पिछले कई महीनों से बीमार चल रहे थे।
विशेष रूप से उन्हें किडनी संबंधित परेशानियां थीं।
19 जून 2025 को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
नेफ्रोलॉजी विभाग में लगातार इलाज चल रहा था।
डॉक्टरों के अनुसार, उनकी उम्र के कारण कई अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था।

आखिरकार कब और कैसे हुआ निधन?

दिन: 4 अगस्त 2025

समय: सुबह 8:48 बजे

स्थान: सर गंगाराम अस्पताल, दिल्ली

विभाग: नेफ्रोलॉजी (Kidney & Multi Organ Dysfunction)

स्थिति: लंबे समय से बीमार, अंततः Multi Organ Failure

पूरे देश में शोक की लहर

झारखंड की राजधानी रांची से लेकर दुमका तक मातम पसरा

आदिवासी समाज ने अधिकारों के प्रतीक को खोया

हेमंत सोरेन ने कहा: “आज झारखंड का आदिवासी आंदोलन अनाथ हो गया है”

प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और विपक्षी दलों ने श्रद्धांजलि अर्पित की

 शिबू सोरेन की विरासत क्या है?

1970 के दशक में साहूकारों और ज़मींदारों के खिलाफ आंदोलन

झारखंड अलग राज्य आंदोलन को दी धार

गरीब, आदिवासी, वंचितों के लिए राजनीति को जन-आंदोलन में बदला

संसद में पहुंचे, मंत्री बने और तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

2010 के बाद धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूर होते गए, लेकिन ‘गुरुजी’ नाम की गूंज आज भी ज़िंदा रही

अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम

पार्थिव शरीर को रांची लाया जाएगा

झारखंड सरकार द्वारा राजकीय सम्मान से अंतिम विदाई की तैयारी

तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की गई है

हजारों कार्यकर्ता और समर्थक ‘गुरुजी’ के अंतिम दर्शन को उमड़ पड़े

शिबू सोरेन का निधन सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि एक आदिवासी चेतना, संघर्ष और स्वाभिमान के प्रतीक का अंत है।
झारखंड की आत्मा अब भी उन्हें ‘गुरुजी’ कहकर याद करेगी, और उनका संघर्ष प्रेरणा बनकर नई पीढ़ियों को राह दिखाएगा।

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