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Pilibhit: देवीपुरा गौशाला मामले में सचिव सस्पेंड, कई अधिकारियों सहित प्रधान को कारण बताओ नोटिस

पीलीभीत में देवीपुरा गौशाला मामले पर डीएम की बड़ी कार्रवाई: सचिव निलंबित, कई अधिकारियों और प्रधान को कारण बताओ नोटिस

पीलीभीत के मरौरी विकासखंड के अंतर्गत देवीपुरा गौशाला में हाल ही में सामने आई बड़ी लापरवाही ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि गौवंश संरक्षण के सरकारी दावों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में कई मृत गौवंश जलभराव में उतराते हुए दिखाई दिए, जिसने पूरे जिले में सनसनी फैला दी। जिलाधिकारी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर देवीपुरा  ग्रामपंचायत सचिव को निलंबित कर दिया  जांच के आदेश दिए हैं।

Pilibhit: वायरल वीडियो और चौंकाने वाला दृश्य

घटना की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में देवीपुरा गौशाला के निचले हिस्से में जलभराव के बीच कई मृत गौवंश के शव “उतराते ” हुए स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। बताया गया कि ये शव पहले दफनाए गए थे, लेकिन भारी बारिश और जलभराव के कारण मिट्टी हट गई और शव पानी में आ गए। यह दृश्य न केवल संवेदनशील था, बल्कि इससे गौशाला प्रबंधन की लापरवाही भी उजागर हुई।

Pilibhit: जिलाधिकारी का औचक निरीक्षण

वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह और मुख्य विकास अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने गौशाला का औचक निरीक्षण किया और पाया कि लगभग 15 से 20 मृत गौवंश खुले में पड़े हैं, जिनका अंतिम संस्कार या उचित दफनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से नजरअंदाज की गई थी। यह स्थिति साफ तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही को दर्शा रही थी।

Pilibhit: तत्काल निलंबन और नोटिस कार्रवाई

निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत अधिकारी (पंचायत सचिव) राकेश कुमार शर्मा को उनके पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में तत्काल निलंबित कर दिया। यही नहीं, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, उप जिलाधिकारी सदर, खंड विकास अधिकारी मरौरी तथा उप पशु चिकित्साधिकारी मरौरी से भी स्पष्टीकरण तलब किया गया। ग्राम प्रधान छोटे लाल को “कारण बताओ” नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई कि लापरवाही साबित होने पर उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी।

Pilibhit: हिंदू महासभा का विरोध और शिकायत

इस घटना की जानकारी मिलते ही अखिल भारत हिंदू महासभा के पदाधिकारी भी गौशाला पहुंचे और वहां पर प्रशासनिक लापरवाही को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने मृत गौवंशों के शव खुले में पड़े होने की शिकायत जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को सौंप दी। उनका आरोप था कि यह घटना न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है, बल्कि पशु संरक्षण कानून की भी गंभीर अवहेलना है।

Pilibhit: जांच का आदेश और प्रशासनिक सख्ती

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच सौंपी है । उन्हें कहा  कि वे इस बात की तह तक जाएं कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर गौवंशों की मौत और शव प्रबंधन में लापरवाही कैसे हुई। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सबूत भी प्रस्तुत करें।

देवीपुरा गौशाला मामला ने यह साफ कर दिया है कि केवल गौशालाओं का निर्माण या सरकारी योजनाओं का ऐलान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रबंधन और निगरानी में भी कठोरता और पारदर्शिता जरूरी है। यह घटना प्रशासन, पशु संरक्षण विभाग और ग्राम पंचायत—तीनों की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या यह घटना भविष्य में गौवंश संरक्षण की दिशा में कोई ठोस बदलाव ला पाएगी।

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