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Kanpur News: गिरफ्तार अधिवक्ता अखिलेश दुबे के खिलाफ हुआ यह बड़ा खुलासा, पढ़िए इन छह अफसरों पर जांच शुरू

रिपोर्ट – कपिल मिश्रा 
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में पिछले दिनों रेप का झूठा केस दर्ज कराने के आरोप में जेल भेजे गए कथित अधिवक्ता अखिलेश दुबे से जुड़ा एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि दुबे की कई कंपनियां पंजीकृत हैं, जिनके माध्यम से करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा किया गया। अब इन कंपनियों की गतिविधियों और उन्हें सहयोग देने वाले अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

कई बड़ी कंपनियों का हुआ खुलासा 

दरअसल, अखिलेश दुबे ने सिर्फ वकालत के जरिए ही अपनी पहचान नहीं बनाई, बल्कि कंस्ट्रक्शन कंपनियों के जरिए भी सक्रिय रहा। बताया जा रहा है कि उसने अपने नजदीकी अफसरों और उनके परिजनों के साथ मिलकर कई कंपनियां बनाई। इन कंपनियों में काली कमाई के पैसे को खपाया गया।

इन अधिकारियों पर शुरू हुई जांच 

इस मामले में छह अफसरों के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। इनमें डीएसपी संतोष सिंह, डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला, डीएसपी विकास पांडेय, इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी, कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) के तत्कालीन उपाध्यक्ष एम.के. सोलंकी और उनके पीआरओ कश्यपकांत दुबे शामिल हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इन अफसरों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अखिलेश दुबे को सहयोग दिया।

सूत्रों से मिली ही अहम्सू जानकारी 

त्रों का कहना है कि दुबे ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर न केवल गलत तरीके से संपत्ति अर्जित की, बल्कि उसका इस्तेमाल विभिन्न प्रोजेक्ट्स और कंपनियों में निवेश के रूप में किया। यही कारण है कि जांच एजेंसियां अब इन कंपनियों के वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रही हैं।

नहीं बख्शे जाएंगे रिश्तेदार भी 

इसके अलावा, अफसरों के रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज संपत्तियों और निवेश की भी जांच हो रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला कानपुर में अब तक के सबसे बड़े नेटवर्क घोटालों में से एक हो सकता है।

साक्ष्यों के आधार पर होगी कार्रवाई 

वहीं, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी निर्दोष को फंसाया न जाए। लेकिन फिलहाल जांच की दिशा साफ इशारा कर रही है कि दुबे अकेला इस खेल में शामिल नहीं था, बल्कि उसे सिस्टम के भीतर से मजबूत समर्थन मिला।

कानपुर पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अब वित्तीय दस्तावेजों, कंपनियों की रजिस्ट्रेशन डिटेल्स और बैंक ट्रांजेक्शन खंगाल रही हैं। आने वाले समय में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।