फतेहपुर (बिंदकी)। गंगा नदी के जलस्तर में कमी आने के बाद अब बाढ़ प्रभावित क्षेत्र धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं। राहत शिविरों में रह रहे बाढ़ पीड़ित परिवार अपने घरों को वापस जा रहे हैं और घरों की साफ-सफाई के साथ पानी निकासी में जुटे हुए हैं। हालांकि, जलभराव की वजह से जनजीवन अभी भी पूरी तरह से पटरी पर नहीं लौटा है।
जलस्तर घटने के बाद यहां पर लगा राहत शिविर
गंगा कटरी क्षेत्र के कई निचले गांवों में बाढ़ का पानी भर जाने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। विशेषकर विकास खंड देवमई के ग्राम पंचायत गलाथा के लोगों को बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए खागल बाबा मंदिर, कानपुर में राहत शिविर स्थापित किया गया था। अब जलस्तर घटने के बाद लोग अपने-अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं।
विधायक ने की मदद
इसी क्रम में जहानाबाद विधायक राजेंद्र सिंह पटेल ने ग्राम पंचायत गलाथा में बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की। कुल 135 परिवारों को निशुल्क बाढ़ राहत किट दी गई, जिसमें लाई, चना, बिस्कुट, चीनी, माचिस, मोमबत्ती, साबुन, आटा, चावल, दाल, आलू और तेल जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं।
विधायक ने कहा कि प्रदेश सरकार हर संभव सहायता बाढ़ पीड़ितों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में सफाई, चिकित्सा और पेयजल की व्यवस्था समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित की जाए ताकि ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी न हो।
शिविर में इन लोगों ने की देखरेख
इस अवसर पर पूर्व मंडल अध्यक्ष देवमई अरुण शुक्ला, ग्राम प्रधान रघुवंश यादव, जजमोईया प्रधान पप्पू सविता, अल्पसंख्यक मोर्चा मंडल अध्यक्ष अली खान, तथा राजस्व टीम से नायब तहसीलदार सुरेश कुमार, लेखपाल अभिषेक शिवहरे, शुभम सिंह, अभिमन्यु पटेल और अतुल पटेल मौजूद रहे।
ग्रामीणों को मिला संतोष
ग्रामीणों ने राहत सामग्री मिलने पर संतोष व्यक्त किया और सरकार व प्रशासन का आभार जताया। हालांकि, कई लोगों का कहना है कि घरों में अब भी गाद और जलभराव की समस्या बनी हुई है, जिसे दूर करने में समय लगेगा।
इस तरह, प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से बाढ़ पीड़ितों को धीरे-धीरे राहत मिल रही है और वे अपने जीवन को पुनः सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
गोरखपुर में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक की कचहरी में खिंचते मामले का नतीजा सरेआम खून-खराबे के रूप में सामने आया। पति ने दिनदहाड़े अपनी पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक कलह की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सामाजिक और मानसिक तनाव किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकता है
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