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Iran War: भारत का मास्टर स्ट्रोक ! डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची की बातचीत, भारतीय टैंकरों को पूर्ण सुरक्षा

भारत का मास्टर स्ट्रोक ! डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची की बातचीत, भारतीय टैंकरों को पूर्ण सुरक्षा

Iran War: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ईरान-इस्राइल-अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय झंडे वाले तेल टैंकरों को ईरान ने सुरक्षित रास्ता देने की अनुमति दे दी है। यह फैसला उस समय आया है जब इस इलाके में युद्ध के कारण कई देशों के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।

कूटनीतिक बातचीत के बाद मिला सुरक्षित रास्ता

सूत्रों के मुताबिक यह महत्वपूर्ण अनुमति भारत और ईरान के बीच हुई उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के बाद मिली है।

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी।

विश्लेषकों के अनुसार यह भारत की संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति का परिणाम माना जा रहा है, जिसके कारण युद्ध के माहौल में भी भारत अपने ऊर्जा हितों को सुरक्षित रखने में सफल रहा है।

इन भारतीय टैंकरों को मिली अनुमति

ईरान की मंजूरी के बाद कम से कम दो भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिली है।

इनमें शामिल हैं:

  • पुष्पक (Pushpak)

  • परिमल (Parimal)

दोनों टैंकर फिलहाल सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं।

गौरतलब है कि इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बाधित हो चुकी है और कई देशों के जहाजों पर हमले या प्रतिबंध का खतरा बना हुआ है।

युद्ध का असर अब 12वें दिन तक पहुंचा

ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच शुरू हुआ संघर्ष अब 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है।

अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

इस युद्ध का असर समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई दे रहा है:

  • क्षेत्र में कई जगह समुद्री यातायात लगभग ठप

  • कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों को मार्ग बदलना पड़ा

  • वैश्विक तेल कीमतों में तेजी से उछाल

यही वजह है कि पूरी दुनिया की नजर इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी हुई है।

ईरान ने जहाजों पर लगाए कड़े प्रतिबंध

तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए हैं।

तेहरान का कहना है कि केवल वही जहाज सुरक्षित रूप से गुजर सकते हैं जिनका अमेरिका या इस्राइल से कोई सीधा संबंध नहीं है

इसी वजह से कई पश्चिमी देशों के जहाजों को इस समुद्री मार्ग में जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।

क्यों इतना अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।

  • यह ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है।

  • यह मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है

ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है।

वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा

सामान्य परिस्थितियों में:

  • यहां से रोज करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल गुजरता है

  • यह दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 31 प्रतिशत है

अगर इस रास्ते में रुकावट आती है तो कई बड़े तेल उत्पादक देशों के निर्यात पर सीधा असर पड़ता है।

इन देशों में शामिल हैं:

  • इराक

  • कुवैत

  • सऊदी अरब

  • संयुक्त अरब अमीरात

  • ईरान

साथ ही दुनिया के LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का भी बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

ईरान के पास मौजूद हैं खतरनाक हथियार

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के पास ऐसे कई सैन्य हथियार मौजूद हैं जिनकी मदद से वह होर्मुज क्षेत्र में जहाजों को निशाना बना सकता है।

इनमें शामिल हैं:

  • एंटी-शिप मिसाइल

  • ड्रोन

  • तेज हमला करने वाली नौकाएं

  • समुद्री बारूदी सुरंगें

इसी वजह से इस समुद्री मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जाता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला

Iran War: ईरान द्वारा विदेशी जहाजों पर प्रतिबंध के बावजूद भारतीय टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देना भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

इससे भारत को कई तरह के फायदे होंगे:

  • भारत की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला प्रभावित नहीं होगी

  • तेल आयात में रुकावट का खतरा कम होगा

  • वैश्विक संकट के बीच भारत की कूटनीतिक संतुलन नीति मजबूत दिखी

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रास्ता बंद होता तो भारत समेत कई एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता था।