UP Breaking: यौन उत्पीड़न मामले में फंसे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर करते हुए साफ कहा है कि चार्जशीट दाखिल होने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी। इस फैसले से मामले में नया मोड़ आ गया है और दोनों पक्षों को लेकर कोर्ट ने अहम निर्देश भी दिए हैं।
हाईकोर्ट ने दी जमानत, गिरफ्तारी पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने बुधवार दोपहर करीब 3:45 बजे फैसला सुनाया।
कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत देते हुए कहा कि:
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चार्जशीट दाखिल होने तक गिरफ्तारी नहीं होगी
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जांच में पूरा सहयोग करना होगा
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: दोनों पक्ष मीडिया से दूर रहें
हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर सख्त रुख भी दिखाया।
कोर्ट ने कहा कि:
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शंकराचार्य और शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज इस मुद्दे पर ज्यादा हल्ला न करें
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दोनों पक्ष मीडिया को इंटरव्यू देने से बचें
यह निर्देश मामले को संवेदनशील मानते हुए दिया गया है।
सुनवाई से पहले और बाद की स्थिति
सुनवाई से पहले ही शंकराचार्य के वकील कोर्ट पहुंच गए थे। वहीं, शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ऑनलाइन पेश हुए।
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27 फरवरी को कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था
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उसी दिन गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक भी लगाई गई थी
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17 मार्च को आशुतोष महाराज ने 883 पन्नों का जवाब दाखिल कर जमानत का विरोध किया
क्या है पूरा मामला?
यह मामला प्रयागराज के माघ मेला और महाकुंभ से जुड़ा है।
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18 जनवरी (मौनी अमावस्या): शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद
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24 जनवरी: आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की
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आरोप: बच्चों (बटुकों) के यौन शोषण
जब पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो 8 फरवरी को पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
FIR और जांच की पूरी टाइमलाइन
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21 फरवरी: कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में FIR दर्ज
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आरोपियों में:
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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
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शिष्य मुकुंदानंद गिरी
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2-3 अज्ञात
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22 फरवरी: पुलिस ने माघ मेला कैंप का निरीक्षण, CCTV जब्त
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23 फरवरी: वाराणसी में निगरानी, परिवार से पूछताछ
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24 फरवरी: शिकायतकर्ता के बयान और साक्ष्य (CD, पेन ड्राइव) जब्त
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25 फरवरी: नाबालिग बटुकों के कोर्ट में बयान और मेडिकल जांच
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26 फरवरी: मेडिकल रिपोर्ट जांच अधिकारी को सौंपी गई
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि होने का दावा किया गया है।
शंकराचार्य का बयान
कोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य ने कहा था:
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सच सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट तक कराया जा सकता है
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झूठ ज्यादा समय तक नहीं टिकता
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अगर फैसला पक्ष में नहीं आया, तो सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
कौन हैं आशुतोष महाराज?
आशुतोष ब्रह्मचारी (महाराज) उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला कस्बे के रहने वाले हैं।
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शाकुंभरी सिद्धपीठ मंदिर कमेटी से जुड़े
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वर्तमान में मंदिर के प्रबंधक
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2022 में जगद्गुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा लेकर संन्यासी जीवन अपनाया
मामला संवेदनशील, जांच जारी
हाईकोर्ट के इस फैसले से फिलहाल शंकराचार्य को राहत मिल गई है, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।
जांच जारी है और चार्जशीट दाखिल होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। ऐसे में यह केस आने वाले दिनों में और ज्यादा चर्चा में रह सकता है।