Bengal Election 2026: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने रविवार को पश्चिम बंगाल में तीन बड़ी जनसभाएं कीं। इन रैलियों में भारी भीड़ उमड़ी और योगी का जबरदस्त क्रेज देखने को मिला। इस दौरान उनके एक बयान “कठमुल्ला संस्कृति नहीं चलने देंगे” ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।
तीन जनसभाओं में उमड़ी भारी भीड़
योगी आदित्यनाथ की बंगाल में हुई तीनों रैलियों में भारी जनसैलाब देखने को मिला। लोग दूर-दूर से पहुंचे और कई लोग बसों की छतों पर बैठकर भी रैली स्थल तक पहुंचे। इससे साफ दिखा कि रैलियां पूरी तरह हाई-एनर्जी पॉलिटिकल शो में बदल गईं।
बसों की छतों पर सवार होकर पहुंचे लोग
रैलियों में भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में लोग बसों की छतों पर बैठकर पहुंचे। हर तरफ योगी के समर्थन में नारेबाजी और उत्साह का माहौल था।
CM योगी का बड़ा बयान
रैली को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा— “कठमुल्ला संस्कृति नहीं चलने देंगे।” उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यह बयान सांस्कृतिक और वैचारिक मुद्दों को लेकर दिया गया।
CM Yogi ने कहा कठमुल्लापन की संस्कृति यहां नहीं चलने दी जाएगी” #bebaakhindustan #cmyogi pic.twitter.com/X614qVZ9Xn
— बेबाक हिंदुस्तान (@BebaakHindustan) April 12, 2026
सुवेंदु अधिकारी ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari ने मंच पर योगी आदित्यनाथ के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। उनका यह अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
ये शानदार क्लिप सबने डाली है — लेकिन किसी ने
एक बात को नोटिस नहीं कियासुवेंदु अधिकारी ने बाबा का स्वागत करने से पहले
जूते उतारे उसके बाद उनके चरणों में नतमस्तक हुएयोगी जी ने सिर्फ़ विजयी भवः का नहीं, बल्कि
सीधा CM बनने का आशीर्वाद दिया है ❤️🔥 pic.twitter.com/2lSmtkjpnK— Hardik Bhavsar (@Bitt2DA) April 12, 2026
जूते उतारकर पहनाया पटका
सुवेंदु अधिकारी मंच पर जूते उतारकर पहुंचे और योगी को पटका पहनाकर सम्मानित किया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसे राजनीतिक तौर पर खास संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीति में क्या है इसका मतलब?
योगी की रैलियों में उमड़ी भीड़ और उनके बयान को बीजेपी के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, सुवेंदु अधिकारी का यह कदम पार्टी नेतृत्व के प्रति सम्मान और राजनीतिक नजदीकी का संकेत माना जा रहा है।