Yogi Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश की Yogi Adityanath सरकार ने रविवार को कैबिनेट का दूसरा विस्तार करते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। इस विस्तार में 2 नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, 2 पुराने मंत्रियों को प्रमोशन देकर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया, जबकि 4 नए चेहरों को राज्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इस पूरे विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी माना जा रहा है। भाजपा ने इस बार जाट, ब्राह्मण, पाल, गुर्जर, दलित और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। राजभवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में सामाजिक समीकरण से लेकर धार्मिक रंग तक सबकुछ देखने को मिला।
सबसे पहले भूपेंद्र चौधरी ने ली शपथ
Bhupendra Singh Chaudhary को कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
- उम्र: 60 साल
- जाति: जाट
- शिक्षा: 12वीं पास
राजनीतिक करियर
भूपेंद्र चौधरी दूसरी बार एमएलसी हैं। वे यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2017 में पंचायती राज मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 2019 में पंचायती राज विभाग के कैबिनेट मंत्री बने थे।
क्यों बनाया गया मंत्री?
पश्चिमी यूपी में जाट वोटरों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। संगठन और सरकार दोनों में अनुभव होने की वजह से उन्हें योगी सरकार का भरोसेमंद चेहरा माना जाता है। चर्चा है कि उन्हें पीडब्ल्यूडी विभाग मिल सकता है।
सपा से बगावत करने वाले मनोज पांडेय को मिला इनाम
Manoj Pandey को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
- उम्र: 58 साल
- जाति: ब्राह्मण
- शिक्षा: ग्रेजुएशन
राजनीतिक करियर
मनोज पांडेय लगातार तीसरी बार रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं। 2012 में पहली बार विधायक बने थे। अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। 2025 में सपा से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए।
क्यों बनाया गया मंत्री?
भाजपा ब्राह्मण वोट बैंक को मजबूत करने में जुटी है। हाल के दिनों में कई मुद्दों पर नाराज बताए जा रहे ब्राह्मण समाज को साधने के लिए उन्हें बड़ा चेहरा बनाया गया।
कृष्णा पासवान बनीं दलित महिला चेहरा
Krishna Paswan को राज्यमंत्री बनाया गया।
- उम्र: 63 साल
- जाति: पासी
- शिक्षा: 12वीं पास
राजनीतिक करियर
वह लगातार चौथी बार विधायक हैं। 2007 में पहली बार फतेहपुर की किशनपुर सीट से विधायक बनी थीं। इसके बाद लगातार चुनाव जीतती रही हैं।
क्यों बनाया गया मंत्री?
दलित और खासतौर पर पासी समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। भाजपा ने महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति के तहत भी उन्हें मौका दिया। शपथ ग्रहण के दौरान वे “राधे-राधे” लिखा पटका पहनकर पहुंचीं और बाद में “जय श्री राम” के नारे भी लगाए।
कैलाश राजपूत को भी मिली जिम्मेदारी
Kailash Rajput को राज्यमंत्री बनाया गया।
राजनीतिक संदेश
राजपूत समाज और पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को साधने के लिहाज से उनकी एंट्री अहम मानी जा रही है। भाजपा लगातार क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
सुरेंद्र दिलेर की एंट्री से दलित समीकरण मजबूत
Surendra Diler को राज्यमंत्री पद दिया गया।
राजनीतिक संदेश
सुरेंद्र दिलेर दलित समाज से आते हैं। भाजपा ने दलित वोट बैंक को मजबूत करने के लिए उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी। शपथ ग्रहण के दौरान वे भगवा कपड़ों में नजर आए।
हंसराज विश्वकर्मा को भी मिला मौका
Hansraj Vishwakarma को राज्यमंत्री बनाया गया।
राजनीतिक संदेश
विश्वकर्मा समाज में पकड़ रखने वाले हंसराज विश्वकर्मा को शामिल कर भाजपा ने ओबीसी वर्ग में अपनी पहुंच और मजबूत करने की कोशिश की है।
अजीत पाल को प्रमोशन, अब स्वतंत्र प्रभार
Ajit Singh Pal को प्रमोशन देकर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया।
- उम्र: 47 साल
- जाति: पाल
- शिक्षा: एमटेक
राजनीतिक करियर
वे पहले योगी सरकार में राज्यमंत्री थे। पूर्व भाजपा विधायक मथुरा प्रसाद पाल के बेटे हैं। 2017 में पिता के निधन के बाद हुए उपचुनाव में पहली बार विधायक बने। 2022 में सिराथू सीट से दोबारा जीत दर्ज की।
क्यों हुआ प्रमोशन?
पाल समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। भाजपा पाल वोट बैंक को अपने साथ बनाए रखना चाहती है, इसलिए उन्हें प्रमोशन दिया गया।
सोमेंद्र तोमर का भी बढ़ा कद
Somendra Tomar को भी प्रमोशन देकर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया।
- उम्र: 46 साल
- जाति: गुर्जर
- शिक्षा: एमफिल
राजनीतिक करियर
वे ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग में राज्यमंत्री थे और मेरठ दक्षिण सीट से विधायक हैं।
क्यों हुआ प्रमोशन?
सोमेंद्र तोमर गुर्जर बिरादरी से आते हैं। पश्चिमी यूपी में गुर्जर वोट बैंक को मजबूत करने के लिए भाजपा ने उन्हें प्रमोट किया है।
योगी सरकार में अब मंत्री पद का कोटा फुल
इस विस्तार के बाद योगी सरकार में कुल 60 मंत्री हो गए हैं। इनमें:
- 23 कैबिनेट मंत्री
- 16 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
- 21 राज्यमंत्री
योगी मंत्रिमंडल का पहला विस्तार 5 मार्च 2024 को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ था। अब दूसरे विस्तार में भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को पूरी तरह साधने की तैयारी शुरू हो चुकी है।