पीलीभीत में महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के बढ़े दामों को लेकर सरकार पर बोला हमला
उत्तर प्रदेश के Pilibhit में बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल, सीएनजी और रसोई गैस सिलेंडरों की कीमतों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर जिला कांग्रेस कमेटी पीलीभीत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और केंद्र व राज्य सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती महंगाई ने आम आदमी, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के कारण रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम परिवारों का बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
कलेक्ट्रेट तक निकाला गया विरोध मार्च
प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष Harpreet Chhabra और शहर अध्यक्ष Shrikrishna Gangwar ने किया।
कांग्रेस कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट तिराहे पर एकत्र हुए, जहां से सरकार विरोधी नारे लगाते हुए जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारी डीएम कार्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पेट्रोल-डीजल, सीएनजी और घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में हुई बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की।
“महंगाई ने आम आदमी को तोड़ दिया”
जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरप्रीत पाल सिंह चब्बा ने कहा कि वर्तमान समय में देश का आम नागरिक लगातार आर्थिक दबाव झेल रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दामों में लगातार बढ़ोतरी होने से माल ढुलाई और परिवहन महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर बाजार की हर वस्तु पर पड़ रहा है।
उनका कहना था कि सब्जियों, राशन, दवाइयों और रोजमर्रा की अन्य जरूरी चीजों की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
“रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा गृहिणियों का बजट”
शहर अध्यक्ष श्रीकृष्ण गंगवार ने कहा कि पहले व्यावसायिक गैस सिलेंडरों और छोटे सिलेंडरों के दामों में भारी बढ़ोतरी की गई, जिससे छोटे व्यापारियों को नुकसान हुआ।
अब घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों और गृहिणियों की परेशानी और बढ़ा दी है।
उन्होंने कहा कि महंगाई का सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी आय सीमित है लेकिन खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
वैश्विक युद्ध और अर्थव्यवस्था का असर
महंगाई और ईंधन कीमतों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच वैश्विक हालात भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर लगातार पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है।
ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिसका असर खेती, उद्योग, व्यापार और आम जनता की जेब तक पहुंचता है।
इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा समय-समय पर ईंधन बचाने, संसाधनों का संतुलित उपयोग करने और अनावश्यक खर्च कम करने की अपील भी चर्चा में रही है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और जिम्मेदार उपभोग की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया था।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल अपील से काम नहीं चलेगा, बल्कि आम जनता को राहत देने के लिए ठोस आर्थिक कदम उठाने की जरूरत है।
राष्ट्रपति को सौंपा गया ज्ञापन
कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि लगातार बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों से आम जनता परेशान है, इसलिए सरकार को बढ़े हुए दाम तत्काल वापस लेने के निर्देश दिए जाने चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि महंगाई पर नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका असर देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर और अधिक दिखाई देगा।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
इस दौरान यूसुफ मलिक, नागेश पाठक, पुष्पा गंगवार, अनवर अनीस, ईश्वर दयाल पासवान, मुनेंद्र सक्सेना, हेमंत मिश्रा एडवोकेट, प्रदीप मौर्य, जाहिद खान, जुल्फिकार खान, गुड्डू खान, जावित्री देवी, ज्ञानेंद्र गौतम, अभिनव गुप्ता, इश्तयाक अहमद अंसारी, सिद्दीक उस्मानी, रिजवान मियां, मो. कामरान, इमरान अंसारी, कमलेश राजपूत, सगीर अंसारी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल रहे।
जनता के मुद्दों पर राजनीति तेज
बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों का मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी लगातार गर्माता जा रहा है। विपक्षी दल इसे आम जनता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बता रहे हैं, जबकि सरकार वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक चुनौतियों का हवाला दे रही है।
ऐसे में आने वाले समय में महंगाई, ईंधन कीमतें और घरेलू खर्च जैसे मुद्दे राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में बने रहने की संभावना है।