UP Encounter: उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) ने मंगलवार तड़के अंबेडकरनगर में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात अपराधी और छैमार गैंग के सरगना आसिफ अली (40) को मुठभेड़ में मार गिराया। आसिफ पर जौनपुर पुलिस ने 1 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वह पति-पत्नी समेत 6 हत्याओं, कई डकैतियों और लूट की वारदातों में वांटेड था। पुलिस के मुताबिक, उसने यूपी, राजस्थान और हरियाणा में करीब 20 आपराधिक मामले दर्ज थे।
जगदीशपुर गांव के पास STF से हुई मुठभेड़
STF के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 4 बजे मुखबिर से सूचना मिली कि आसिफ अंबेडकरनगर में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में छिपा हुआ है। सूचना के आधार पर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर जगदीशपुर गांव के पास STF ने घेराबंदी की।
खुद को घिरा देखकर आसिफ बाइक मोड़कर भागने लगा। STF टीम ने पीछा किया तो उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।
STF की जवाबी कार्रवाई में मारा गया आसिफ
नोएडा STF यूनिट के एडिशनल एसपी राजकुमार मिश्रा ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान एक सिपाही के दाहिने हाथ में गोली लगी। इसके बाद STF ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें आसिफ के सीने में दो गोलियां लगीं। गंभीर रूप से घायल आसिफ को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
मौके से पुलिस ने एक पिस्टल, 12 बोर का तमंचा और बाइक बरामद की है।
रात में कच्छा-बनियान पहनकर करता था डकैती
पुलिस के मुताबिक, आसिफ छैमार गैंग का सरगना था। उसका गैंग बेहद खौफनाक तरीके से वारदात को अंजाम देता था। गैंग के सदस्य रात में कच्छा-बनियान पहनकर घरों में घुसते, पूरे परिवार को बंधक बनाते, लूटपाट करते और विरोध करने पर हत्या कर देते थे।
वारदात के बाद आरोपी अपना नाम बदलकर दूसरे जिले या राज्य में छिप जाते थे, जिससे पुलिस को उन्हें पकड़ने में काफी मुश्किल होती थी।
जौनपुर में दो महिलाओं की हत्या के बाद घोषित हुआ था इनाम
STF के मुताबिक, आसिफ ने जौनपुर में डकैती के दौरान दो महिलाओं की हत्या कर दी थी और तीन अन्य लोगों पर जानलेवा हमला किया था। इसी मामले में जौनपुर पुलिस ने उस पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
कानपुर के मकनपुर में झोपड़ी बनाकर रहता था परिवार
पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2015 के आसपास आसिफ का परिवार कानपुर के मकनपुर गांव में खाली पड़ी जमीन पर झोपड़ी बनाकर रहता था। इसी दौरान परिवार ने वहीं रहते हुए अपना आधार कार्ड भी बनवाया था।
उस समय आसिफ बावरिया गैंग के लिए काम करता था। पुलिस के मुताबिक, 2015 में खाड़ामऊ गांव में राजा सिंह के घर हुई हत्या और डकैती में भी आसिफ और उसके रिश्तेदार काल्लू उर्फ फिरोज का नाम सामने आया था। घटना के बाद पूरा परिवार गांव छोड़कर फरार हो गया था।
रिश्तेदार काल्लू उर्फ फिरोज भी इनामी अपराधी
पुलिस ने बताया कि आसिफ का रिश्तेदार काल्लू उर्फ फिरोज भी कई गंभीर मामलों में वांटेड था। उसे 6 फरवरी 2026 को अरौल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर कानपुर पुलिस की ओर से 25 हजार रुपये और अन्य मामलों में कुल 75 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
आसिफ की बड़ी वारदातें
आसिफ और उसके गैंग ने कई जिलों में खौफनाक वारदातों को अंजाम दिया था।
- 19 अक्टूबर 2013 (सुल्तानपुर): 10 साथियों के साथ घर में डकैती, एक व्यक्ति की हत्या।
- 2014 (जौनपुर): परिवार को बंधक बनाकर लाखों की लूट, पांच लोगों पर हमला, दो महिलाओं स्वाति और सुमन की मौत।
- 15 अगस्त 2015 (कौशांबी): पति-पत्नी की हत्या के बाद डकैती।
- 19 अगस्त 2015 (मुजफ्फरनगर): छह घरों में डकैती, महावीर सिंह की बहू पर जानलेवा हमला।
- 13 जनवरी 2021 (कानपुर देहात): रसूलाबाद में घर में घुसकर तासीम की हत्या।
क्या है कुख्यात छैमार गैंग?
छैमार गैंग उत्तर प्रदेश का एक कुख्यात आपराधिक गिरोह माना जाता है, जो यूपी के अलावा दूसरे राज्यों में भी डकैती और हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देता है। गैंग के सदस्य लगातार अपना ठिकाना बदलते रहते हैं और नाम बदलकर रहते हैं ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें।
दिन में रेकी, रात में हमला
पुलिस के अनुसार, गैंग की महिलाएं दिन में भीख मांगने या कूड़ा बीनने के बहाने घरों की रेकी करती हैं। रात में गैंग के सदस्य तय घरों में घुसकर लूटपाट करते हैं। विरोध करने पर धारदार हथियारों से हत्या कर देते हैं, ताकि गोली चलने की आवाज से पुलिस को भनक न लगे।
गिरोह में बनने के लिए 6 हत्याएं करना माना जाता है ‘योग्यता’
पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह के अपने सख्त नियम हैं। गिरोह का सरदार वही बन सकता है जिसने कम से कम 6 हत्याएं की हों। इसी वजह से इसे ‘छैमार गैंग’ कहा जाता है। गिरोह में सबसे क्रूर अपराधी को ‘राजकुमार’ का दर्जा दिया जाता है।
पुलिस का यह भी दावा है कि वारदात से पहले गैंग के सदस्य काली माता की पूजा करते हैं और शराब का भोग लगाते हैं। इसके बाद कच्छा-बनियान पहनकर डकैती के लिए निकलते हैं।