21 साल तक नगर पालिका में नौकरी, फिर कथित उत्पीड़न का सिलसिला… लाखों की रिकवरी, जमीन बिकने तक की नौबत, दर्दभरा नोट और एक मौत; जनदबाव के बाद पांच लोगों पर FIR
Pilibhit News: पीलीभीत जिले के बीसलपुर में नगर पालिका परिषद के कर्मचारी उपेंद्र कुमार शर्मा की मौत अब सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं रह गई है। यह मामला प्रशासन, स्थानीय राजनीति और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मृतक के जान देने से पहले लिखे गए कथित नोट, परिजनों द्वारा दी गई तहरीर और अब दर्ज हुई एफआईआर में नगर पालिका के अधिकारियों तथा चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिजनों का दावा है कि लगातार आर्थिक, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न ने उनके परिजन को इस कदर तोड़ दिया कि उन्होंने जान दे दी। एफआईआर के अनुसार, जिस कर्मचारी को नगर पालिका अधिनियम के तहत रसीद काटने का अधिकार नहीं था, उससे कथित तौर पर वसूली कराई गई। बाद में उसी वसूली को आधार बनाकर लाखों रुपये की रिकवरी निकाली गई।
मामले ने राजनीतिक रंग उस समय ले लिया, जब एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर बीसलपुर में धरना-प्रदर्शन हुआ। इसी दौरान पूर्व मंत्री रामसरन वर्मा का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे मृतक के परिजन को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। घटना के समय उनके पुत्र और बीसलपुर विधायक विवेक वर्मा भी मौके पर मौजूद थे।
धरने और बढ़ते जनदबाव के बाद पुलिस ने आखिरकार पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घटनाक्रम: कैसे बढ़ता गया पूरा विवाद
2004: नगर पालिका में नौकरी की शुरुआत
एफआईआर के अनुसार, मृतक उपेंद्र कुमार शर्मा ने 17 फरवरी 2004 को नगर पालिका परिषद बीसलपुर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नौकरी शुरू की। परिजनों का कहना है कि लगभग दो दशक तक उनका कार्य सामान्य रूप से चलता रहा।
सितंबर 2025 के बाद बदली जिंदगी, यहीं से शुरू हुआ कथित उत्पीड़न
एफआईआर के अनुसार, मृतक के बड़े भाई अनुराग शर्मा का आरोप है कि सितंबर 2025 के बाद उपेंद्र कुमार शर्मा का जीवन पूरी तरह बदल गया। शिकायत में कहा गया है कि नगर पालिका अधिनियम के तहत उपेंद्र कुमार शर्मा को रसीद काटने का अधिकार नहीं था, लेकिन इसके बावजूद चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की के कथित निर्देश पर उनसे रसीद कटवाने और वसूली का कार्य कराया जाता रहा। परिजनों का आरोप है कि बाद में इसी वसूली को आधार बनाकर लाखों रुपये की रिकवरी निकाल दी गई और मृतक पर लगातार आर्थिक, मानसिक एवं प्रशासनिक दबाव बनाया जाने लगा।
23 लाख की रिकवरी और बढ़ता दबाव
एफआईआर के अनुसार, मृतक के खिलाफ करीब 23 लाख रुपये की रिकवरी निकाली गई। शिकायत में कहा गया है कि मृतक ने अलग-अलग तारीखों पर 17 लाख रुपये और करीब 6 लाख रुपये नगर पालिका परिषद के खाते में जमा भी कराए। इसके बावजूद, परिजनों का आरोप है कि उन पर दबाव और कथित उत्पीड़न का सिलसिला नहीं रुका।
सबसे गंभीर आरोप: “सुनसान जगह बुलाकर पीटा और पेशाब पिलाया”
एफआईआर का सबसे संवेदनशील हिस्सा वह है जिसमें आरोप लगाया गया है कि चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की और टैक्स प्रभारी इंद्रजीत शमशेर सिंह ने मृतक को एक सुनसान स्थान पर बुलाया।
परिजनों के अनुसार वहां मृतक के साथ मारपीट की गई और उसे जबरन पेशाब पिलाया गया।
यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह किसी भी व्यक्ति की गरिमा और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला माना जाएगा। फिलहाल यह आरोप एफआईआर और मृतक के परिजनों के बयान का हिस्सा हैं और पुलिस इनकी जांच कर रही है।
अदालत में बयान बदलने का दबाव?
एफआईआर में दर्ज शिकायत के अनुसार, मृतक पर अदालत में बयान बदलने का दबाव भी बनाया गया।
परिजनों का आरोप है कि मृतक से कहा गया कि यदि वह अदालत में उनके पक्ष में बयान देगा तो उसकी आर्थिक देनदारी कम करा दी जाएगी।
इन आरोपों की भी जांच अभी पुलिस द्वारा की जानी है।
जमीन बेचकर भी नहीं मिला सुकून
एफआईआर के अनुसार लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण मृतक ने अपनी पत्नी के नाम दर्ज लगभग 20 बीघा जमीन तक बेच दी ताकि बकाया धनराशि जमा कर सके।
इसके बावजूद, परिजनों का आरोप है कि कथित उत्पीड़न समाप्त नहीं हुआ।
फिर लिखा दर्दभरा नोट…
परिजनों का कहना है कि लगातार तनाव और अपमान के बीच मृतक ने जान देने से पहले एक विस्तृत नोट लिखा, जिसमें नगर पालिका के कुछ अधिकारियों और चेयरमैन प्रतिनिधि सहित कई लोगों के नाम लिखकर गंभीर आरोप लगाए।
इसी नोट को आधार बनाकर परिवार ने कार्रवाई की मांग की।
परिजन सड़क पर उतरे, FIR की मांग तेज हुई
जब तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं हुआ तो मृतक के परिजन बीसलपुर में धरने पर बैठ गए।
उनकी मांग थी कि जान देने से पहले लिखे गए नोट और शिकायत के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।
धरने में पहुंचे पूर्व मंत्री, वायरल हुआ थप्पड़ VIDEO
धरने के दौरान पूर्व मंत्री रामसरन वर्मा और बीसलपुर विधायक विवेक वर्मा भी मौके पर पहुंचे।
इसी दौरान हुई बहस के बीच पूर्व मंत्री रामसरन वर्मा का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे मृतक के परिजन को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद धरना-स्थल पर मौजूद लोगों में आक्रोश और बढ़ गया।
समाचार लिखे जाने तक इस घटना पर पूर्व मंत्री रामसरन वर्मा का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हो सका था।
पीलीभीत के बीसलपुर में धरने के दौरान बड़ा विवाद!
नगर पालिका कर्मचारी उपेंद्र शर्मा की मौत के मामले में प्रदर्शन के बीच पूर्व मंत्री रामसरन वर्मा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह मृतक के परिजन को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा… pic.twitter.com/9X6ydJxiRs
— Rocket Post Bharat (@rocketpostindia) July 15, 2026
आखिरकार दर्ज हुई FIR
धरने और बढ़ते जनदबाव के बाद पुलिस ने बीसलपुर कोतवाली में FIR संख्या 0347/2026 दर्ज कर ली।
एफआईआर में निम्नलिखित लोगों को नामजद किया गया है—
- इंद्रजीत शमशेर सिंह
- अकरम खां
- यासीन मोहम्मद
- संजीव मिश्रा
- चेयरमैन प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की
किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं में दर्ज की गई है—
| धारा | सामान्य अर्थ |
| 108 BNS | जान देने के लिए उकसाने (Abetment) से संबंधित आरोप |
| 115(2) BNS | चोट पहुंचाने से संबंधित प्रावधान |
| 316(2) BNS | आपराधिक विश्वासघात से संबंधित प्रावधान |
| 351(3) BNS | आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान |
| 352 BNS | जानबूझकर अपमान और शांति भंग होने की आशंका से जुड़ा प्रावधान |
इन धाराओं के तहत दर्ज आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
अब जांच की कसौटी पर हैं सभी आरोप
उपेंद्र कुमार शर्मा अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके पीछे कई ऐसे सवाल छोड़ गए हैं जिनका जवाब अब पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया को देना है। क्या जिस कर्मचारी को रसीद काटने का अधिकार नहीं था, उससे वास्तव में नगर पालिका की वसूली कराई गई? यदि हाँ, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी? क्या परिजनों द्वारा लगाए गए अमानवीय उत्पीड़न के आरोपों की पुष्टि होगी? और क्या जान देने से पहले लिखे गए कथित नोट में दर्ज आरोपों को जांच में पर्याप्त महत्व मिलेगा? इन सभी सवालों का जवाब अब जांच और अदालत की कार्यवाही से सामने आएगा।
संबंधित पक्ष का पक्ष
समाचार लिखे जाने तक नामजद आरोपियों, पूर्व मंत्री रामसरन वर्मा और विधायक विवेक वर्मा की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।
Disclaimer
यह समाचार बीसलपुर कोतवाली में दर्ज एफआईआर संख्या 0347/2026, मृतक के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों, जान देने से पहले लिखे गए कथित नोट तथा उपलब्ध वीडियो सामग्री के आधार पर तैयार किया गया है। एफआईआर में दर्ज आरोप इस स्तर पर आरोप हैं। उनकी पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। संबंधित पक्ष का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।