America Tariff: अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेट में एक संशोधित बिल पेश किया गया है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल हैं। अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए टैरिफ लगाएगा क्योंकि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को समर्थन दे रहा है।
अमेरिका ने क्यों पेश किया नया बिल?
अमेरिकी सीनेट में पेश इस संशोधित बिल का मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की आर्थिक क्षमता कमजोर हो सके।
बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिल रहा है। शुरुआत में इसमें 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया।
किन देशों पर लग सकता है 100% टैरिफ?
प्रस्तावित बिल के मुताबिक इन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है:
- 🇮🇳 भारत
- 🇨🇳 चीन
- 🇸🇰 स्लोवाकिया
- 🇭🇺 हंगरी
- 🇦🇿 अजरबैजान
इसके अलावा रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ अन्य देशों को भी बिल के दायरे में रखा गया है।
अभी इन देशों पर कितना टैरिफ है?
| देश | मौजूदा टैरिफ |
|---|---|
| 🇮🇳 भारत | 18% |
| 🇨🇳 चीन | 34% |
| 🇸🇰 स्लोवाकिया | 10% |
| 🇭🇺 हंगरी | 10% |
| 🇦🇿 अजरबैजान | 10% |
अगर नया बिल पारित हो जाता है, तो इन देशों पर टैरिफ 100% तक पहुंच सकता है।
भारत ने जून में रूस से रिकॉर्ड तेल खरीदा
भारत ने जून 2026 में रूस से 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4% था।
यानी भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया।
मई की तुलना में जून में रूस से तेल आयात में लगभग 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
2026 में भारत का रूस से तेल आयात
| महीना | आयात (बैरल प्रतिदिन) |
|---|---|
| जनवरी | 10.9 लाख |
| फरवरी | 11.6 लाख |
| मार्च | 20 लाख |
| अप्रैल | 16 लाख |
| मई | 19 लाख |
| जून | 26.1 लाख (रिकॉर्ड) |
यूरोपीय देशों को मिलेगी राहत
संशोधित बिल के अनुसार 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है।
यह राहत उन देशों को मिलेगी:
- जो रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं।
- जो रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता लगातार कम कर रहे हैं।
डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन देशों पर केंद्रित है जो अभी भी रूस के ऊर्जा कारोबार को सबसे अधिक आर्थिक समर्थन दे रहे हैं।
रूस पर और किन प्रतिबंधों का प्रस्ताव?
बिल में केवल टैरिफ ही नहीं, बल्कि रूस के कई अहम क्षेत्रों पर भी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है।
इनमें शामिल हैं:
- रूस के सरकारी अधिकारी
- शैडो टैंकर बेड़ा
- रूस का केंद्रीय बैंक
- सरकारी ऊर्जा परियोजनाएं
- रक्षा उद्योग
- वित्तीय संस्थान
- बड़े कारोबारी
- राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
दोनों दलों का समर्थन मिलने से बढ़ी उम्मीद
इस बिल को अमेरिकी राजनीति में बाइपार्टिसन बिल कहा जा रहा है, क्योंकि इसे रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों का समर्थन मिला है।
हालांकि, इसे कानून बनने के लिए अभी:
- सीनेट
- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स
दोनों की मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर ही यह कानून बनेगा।
ट्रम्प को मिलेगी छूट देने की शक्ति
संशोधित बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि यदि राष्ट्रीय हित में जरूरत महसूस हो तो वे किसी देश को टैरिफ या प्रतिबंधों से छूट दे सकें।
यह बिल अप्रैल 2025 में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेश किया था। 11 जुलाई को ग्राहम के निधन के बाद ट्रम्प ने कहा कि इस बिल को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकताओं में था और इसे उनकी स्मृति में आगे बढ़ाया जा रहा है।
अब तक 26 सीनेटर इस बिल का समर्थन कर चुके हैं।
टैरिफ पर कानून लाने की जरूरत क्यों पड़ी?
ट्रम्प ने पहले 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाए थे।
लेकिन 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IEEPA राष्ट्रपति को सीधे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। यह अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है।
इसी वजह से अब नया विधेयक लाया गया है, ताकि राष्ट्रपति को कानूनी रूप से यह अधिकार मिल सके।
100% टैरिफ से भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारतीय सामान अमेरिका में महंगे हो जाएंगे
भारत हर साल अमेरिका को लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये का सामान निर्यात करता है। यदि 100% टैरिफ लागू होता है, तो भारतीय उत्पाद अमेरिका में लगभग दोगुने महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी मांग प्रभावित हो सकती है।
रूसी तेल से होने वाली बचत से बड़ा नुकसान
भारत को रूस से सस्ता तेल खरीदने से सालाना लगभग 60,000 करोड़ रुपये की बचत होती है।
लेकिन यदि अमेरिकी बाजार प्रभावित होता है, तो संभावित आर्थिक नुकसान इस बचत से कई गुना अधिक हो सकता है।
रोजगार और रुपये पर असर
100% टैरिफ लागू होने की स्थिति में अमेरिका को होने वाला भारत का कपड़ा, हीरा और दवा निर्यात प्रभावित हो सकता है।
इससे इन क्षेत्रों में काम करने वाले 15 से 20 लाख लोगों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
साथ ही निर्यात घटने से विदेशी मुद्रा आय कम हो सकती है, जिससे भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल कानून नहीं बना है
ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी यह केवल प्रस्तावित बिल है, कानून नहीं। इसे लागू होने से पहले अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित होना होगा और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलेगी। इसलिए भारत पर 100% टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).