Pilibhit News: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक कथित फर्जी अस्पताल का बड़ा खुलासा हुआ है। जहानाबाद थाना क्षेत्र में पुलिस ने ऐसे तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर बिना वैध दस्तावेजों और कथित तौर पर बिना आवश्यक योग्यता के मरीजों का इलाज करने और दवाइयां बांटने का आरोप है। पुलिस ने इनके कब्जे से भारी मात्रा में एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवाइयां, नकदी, मोबाइल और लैपटॉप बरामद किया है। मामले में कथित डॉक्टर की डिग्री और बरामद दवाइयों की भी जांच कराई जा रही है।
शाही चौकी के पास पुलिस ने पकड़ी दवाइयों से भरी कार
जहानाबाद पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक कार में बड़ी मात्रा में दवाइयां ले जाई जा रही हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने शाही चौकी के पास स्विफ्ट कार (UP21DR7311) को रोककर तलाशी ली।
कार से अलग-अलग कंपनियों की एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवाइयों का बड़ा जखीरा बरामद हुआ। इनमें सिरप, टैबलेट, तेल और अन्य दवाइयां शामिल थीं। पुलिस के अनुसार मौके पर किसी भी दवा का खरीद बिल, टैक्स इनवॉइस या अन्य वैध दस्तावेज नहीं मिला।
तीन आरोपी गिरफ्तार, योग्यता जानकर हर कोई हैरान
पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान महफूज आलम (अमेठी), कौशर (मुरादाबाद) और रोहित (लखीमपुर खीरी) के रूप में हुई।
पूछताछ में सामने आया कि:
- महफूज आलम अनपढ़ है।
- रोहित केवल हाईस्कूल पास है।
- कौशर इंटरमीडिएट पास है।
पुलिस का आरोप है कि यही तीनों मिलकर मरीजों को दवाइयां देते थे।
बारातघर के अंदर चल रहा था कथित अस्पताल
पुलिस के मुताबिक, आरोपी न्यूरिया क्षेत्र के एक मैरिज हॉल (बारातघर) के अंदर कथित डॉ. अनस मलिक के नाम पर इलाज का संचालन कर रहे थे।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि सप्ताह में एक दिन एक कथित डॉक्टर मरीजों को देखता था, जबकि बाकी दिनों में यही लोग मरीजों को दवाइयां देते थे।
इन बीमारियों का किया जाता था इलाज
पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा जोड़ों का दर्द, गठिया, कमर दर्द, गर्दन दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस, नसों का दर्द, दाद, खाज और खुजली जैसी बीमारियों के इलाज का दावा किया जाता था।
मरीजों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनका इलाज डॉक्टर की निगरानी में हो रहा है, जबकि पुलिस की जांच के दौरान मौके पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला।
जांच में सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं
पुलिस की प्रारंभिक जांच में कई अहम बातें सामने आईं—
- कथित क्लीनिक का कोई वैध पंजीकरण नहीं मिला।
- मौके पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
- विजिटिंग कार्ड पर लिखा क्लीनिक बताए गए पते पर नहीं मिला।
- बरामद दवाइयों का कोई खरीद बिल उपलब्ध नहीं था।
- कथित डॉक्टर की BUMS डिग्री का सत्यापन कराया जा रहा है।
- दवाइयों के नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे असली हैं या नकली।
बारातघर में अस्पताल कैसे चलता रहा?
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि एक बारातघर के अंदर लंबे समय से कथित रूप से मरीजों का इलाज किया जा रहा था, तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को क्यों नहीं हुई?
क्या संबंधित अधिकारियों ने कभी निरीक्षण नहीं किया? या फिर निगरानी व्यवस्था में कहीं बड़ी चूक हुई? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
गरीब मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का आरोप
ग्रामीण और गरीब लोग डॉक्टर पर भरोसा करके इलाज कराने पहुंचते हैं। ऐसे में यदि बिना पर्याप्त योग्यता वाले लोग डॉक्टर के नाम पर दवाइयां बांट रहे हों और दवाइयों का स्रोत भी संदिग्ध हो, तो यह मरीजों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
इसी वजह से पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की गहन जांच कर रहे हैं।
पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?
जहानाबाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने बरामद किए—
- भारी मात्रा में एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवाइयां
- 5 मोबाइल फोन
- 1 लैपटॉप
- ₹19,400 नकद
सभी दवाइयों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है और कथित डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यता का भी सत्यापन कराया जा रहा है।
जांच के बाद खुल सकते हैं और बड़े राज
यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला केवल तीन लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएंगी कि यह कथित अवैध इलाज का नेटवर्क कब से चल रहा था, इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और बिना लाइसेंस व पंजीकरण के यह गतिविधि कैसे संचालित होती रही।