UP Accident News: रविवार की रात मुजफ्फरनगर के एक परिवार के लिए ऐसी काली रात बन गई, जिसने कुछ ही सेकंड में सब कुछ उजाड़ दिया। लगातार हो रही बारिश के बीच एक कच्चा मकान अचानक भरभराकर ढह गया। मलबे के नीचे दबकर 60 वर्षीय पिता और उनके चार मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। दो बेटियां गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। हादसे के बाद पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और हर आंख नम हो गई।
कुछ ही पलों में उजड़ गया पूरा परिवार
यह दर्दनाक हादसा रविवार रात करीब 9 बजे फुगाना थाना क्षेत्र के हबीबपुर गांव में हुआ।
मजदूरी करके परिवार का पेट पालने वाले इस्लामुद्दीन (60) अपने कच्चे घर में बच्चों के साथ मौजूद थे। बाहर लगातार बारिश हो रही थी। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि अगले ही पल यह घर उनके परिवार की कब्र बन जाएगा।
अचानक मकान की कच्ची छत और दीवारें भरभराकर गिर पड़ीं। घर के अंदर मौजूद सात लोग मलबे के नीचे दब गए।
खेलते-खेलते मौत की आगोश में समा गए मासूम
हादसे के समय इस्लामुद्दीन के साथ उनकी बेटियां रुखसार (10), रुकईया (8), समईया (7), अलसीबा (4) और बेटे अहद (5) व जीशान (1) घर के अंदर थे।
पलभर पहले जो बच्चे घर में खेल रहे थे, अगले ही पल मलबे के नीचे दब गए। उनकी मां और दो अन्य बच्चे घर के बाहर होने की वजह से बच गए, लेकिन घर के भीतर मौजूद सात लोगों पर मौत बनकर छत टूट पड़ी।
गांव में मची चीख-पुकार, रातभर चलता रहा राहत अभियान
मकान गिरने की तेज आवाज सुनते ही पूरे गांव के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।
हर कोई अपने हाथों से मलबा हटाकर लोगों को बचाने की कोशिश करने लगा। कुछ ही देर में पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासन की टीम भी पहुंच गई। जेसीबी मशीन की मदद से घंटों तक मलबा हटाया गया।
जब एक-एक कर लोगों को बाहर निकाला गया तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
अस्पताल पहुंचते ही 5 लोगों ने तोड़ दिया दम
मलबे से निकाले गए सभी सात लोगों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
लेकिन डॉक्टरों ने इस्लामुद्दीन, रुखसार, अलसीबा, अहद और जीशान को मृत घोषित कर दिया। वहीं रुकईया और समईया गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जिला अस्पताल में जारी है।
एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत की खबर से पूरे गांव में मातम छा गया।
लगातार बारिश बनी इस त्रासदी की वजह
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण कच्चे मकान की दीवारें पूरी तरह कमजोर हो चुकी थीं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके में हर साल बारिश के दौरान ऐसे हालात बन जाते हैं, लेकिन गरीब परिवारों के कच्चे मकानों की ओर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता।
“अगर समय रहते मदद मिलती तो शायद…”
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में कई ऐसे कच्चे और जर्जर मकान हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे परिवारों को जल्द से जल्द सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह उजड़ने से बच सके।
मुख्यमंत्री योगी ने जताया शोक, राहत कार्य के दिए निर्देश
हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया।
उन्होंने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने, घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करने और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मृतकों के परिजनों को मिलेगी आर्थिक सहायता
मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजन को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
इसके अलावा प्रशासन ने सभी ग्राम प्रधानों को निर्देश दिए हैं कि गांवों में जर्जर मकानों की पहचान कर वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
जिला अस्पताल पहुंचे राज्य मंत्री
उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल जिला अस्पताल पहुंचे और घायल बच्चियों का हालचाल जाना।
उन्होंने डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए और पीड़ित परिवार को हरसंभव सरकारी मदद का भरोसा दिलाया।
एक सवाल जो हर मानसून के साथ लौट आता है…
हर साल बारिश आती है… और उसके साथ ऐसे दर्दनाक हादसों की खबरें भी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गरीबों के कच्चे मकान हर मानसून में इसी तरह मौत का जाल बनते रहेंगे?
हबीबपुर गांव में उजड़ा यह परिवार सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों की हकीकत है, जो हर बारिश में अपनी छत के साथ अपनी जिंदगी भी दांव पर लगाकर जीने को मजबूर हैं।