Ujjain Khade Hanuman: उज्जैन के सती गेट के पास स्थित खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। प्रतिमा हटाने की कोशिशों से जुड़े वीडियो और रील्स सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। दावा है कि महज दो दिनों में 35 हजार से ज्यादा लोग खड़े हनुमान के दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं। मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं। दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का अभी तक कोई प्रयास ही नहीं किया गया। ऐसे में अब इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन के दावे और मौके पर मौजूद लोगों की बातों के बीच सवाल खड़े हो रहे हैं।
उज्जैन के खड़े हनुमान की प्रतिमा को लेकर क्या है पूरा मामला
उज्जैन के कंकोल चौराहे पर स्थित खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा करीब 1000 साल पुरानी बताई जा रही है। यह प्रतिमा स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच डॉक्टर हनुमान के नाम से भी प्रसिद्ध है। सिंहस्थ की तैयारियों के तहत कंकोल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना है। इसी सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के दौरान मंदिर और आसपास के निर्माण को हटाने का मामला सामने आया।
30 अगस्त को पहली बार हुआ विरोध
मंदिर से जुड़ी कार्रवाई को लेकर 30 अगस्त 2026 को पहली बार बड़ा विरोध सामने आया। कार्रवाई के प्रयास के दौरान मौके पर विरोध हुआ और चक्काजाम जैसी स्थिति भी बन गई। इसके बाद मामला धीरे-धीरे स्थानीय स्तर से निकलकर सोशल मीडिया पर चर्चा में आने लगा।
4 सितंबर को करीब 16 घंटे चली कार्रवाई
4 सितंबर 2026 को मंदिर परिसर में करीब 16 घंटे तक कार्रवाई चली। इस दौरान मंदिर का शिखर और आसपास के कुछ निर्माण हटाए गए। इसी दौरान प्रतिमा को भी हटाने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। इसके बाद सोशल मीडिया पर प्रतिमा के नहीं हटने को लेकर कई तरह की चमत्कारिक कहानियां और वीडियो वायरल होने लगे।
5 सितंबर की रात फिर पहुंची नगर निगम की टीम
5 सितंबर 2026 को रात करीब 1 बजे नगर निगम की टीम दोबारा मौके पर पहुंची। बताया गया कि क्रेन की मदद से प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया गया। हालांकि, मौके पर भारी विरोध के चलते टीम को बिना कार्रवाई किए लौटना पड़ा। इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।
7 सितंबर को IIT इंदौर की टीम ने की जांच
7 सितंबर 2026 को IIT इंदौर के विशेषज्ञों और इंजीनियरों की टीम खड़े हनुमान मंदिर पहुंची। टीम ने करीब दो घंटे तक प्रतिमा की संरचना और जमीन के अंदर उसकी स्थिति को समझने के लिए स्कैनिंग की। प्रतिमा कितनी गहराई तक जमीन में है और उसकी संरचना कैसी है, इसे आधुनिक उपकरणों के जरिए समझने की कोशिश की गई।
10 सितंबर को IIT की टीम फिर करेगी जांच
अब 10 सितंबर 2026 को IIT इंदौर की टीम एक बार फिर खड़े हनुमान मंदिर पहुंचकर जांच करने वाली है। प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से लेकर आगे क्या किया जा सकता है, इसे समझने के लिए विशेषज्ञों की जांच को अहम माना जा रहा है।
मंदिर के आसपास का ज्यादातर हिस्सा टूट चुका है
पिछले करीब एक सप्ताह में मंदिर के आसपास का ज्यादातर हिस्सा तोड़ा जा चुका है। हालांकि खड़े हनुमानजी की प्रतिमा फिलहाल टेंट के अंदर विराजमान है। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
साध्वी हर्षानंद ने सरकार को दिया दो दिन का अल्टीमेटम
गुरुवार को साध्वी हर्षानंद गिरि यानी हर्षा रिछारिया खड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं। उन्होंने मंदिर में पूजा की और प्रतिमा को हटाने के प्रयासों का विरोध किया। उन्होंने प्रशासन से मंदिर पहुंचकर माफी मांगने, पूजा करने और मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लेने की मांग की।
मांग नहीं मानी तो अनशन की चेतावनी
साध्वी हर्षानंद ने कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो वह अनशन और धरना-प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें इतनी हिम्मत मिले कि वह बाबा के लिए आवाज उठा सकें।
सोशल मीडिया की रील्स से बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़
खड़े हनुमान की प्रतिमा हटाने के प्रयासों से जुड़े वीडियो और रील्स सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई। बताया जा रहा है कि दो दिनों में 35 हजार से ज्यादा लोग यहां पहुंच चुके हैं। इनमें मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों के श्रद्धालु शामिल हैं।
दिल्ली, नागपुर और राजस्थान से भी पहुंचे लोग
कई श्रद्धालु उज्जैन महाकाल के दर्शन के साथ खड़े हनुमान मंदिर भी पहुंच रहे हैं। दिल्ली, नागपुर, राजस्थान और दूसरे राज्यों से आए लोगों का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिमा से जुड़े वीडियो देखे थे और उसके बाद खड़े हनुमान के दर्शन करने का फैसला किया।
संतों ने कहा- विकास करें, बाबा को नहीं हटाएं
महामुक्तेश्वरी धाम के पीठाधीश्वर पंडित शंकर लक्ष्मीनारायण जोशी ने भी प्रतिमा हटाने का विरोध किया है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि सड़क विकास का काम किया जाए, लेकिन इसके लिए कोई वैकल्पिक रास्ता तलाशा जाए ताकि हनुमानजी की प्रतिमा को हटाने की जरूरत न पड़े।
नीलगंगा का उदाहरण देकर वैकल्पिक रास्ते की बात
पंडित शंकर लक्ष्मीनारायण जोशी का कहना है कि नीलगंगा क्षेत्र में सड़क निर्माण के दौरान भी धार्मिक संरचनाओं के आसपास से रास्ता निकाला गया है। उनका मानना है कि खड़े हनुमान मंदिर के मामले में भी इसी तरह कोई समाधान निकाला जा सकता है, जिससे विकास का काम भी हो और धार्मिक स्थल भी सुरक्षित रहे।
मुख्य पुजारी ने बताई शुरुआत की पूरी कहानी
खड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी महेश बैरागी ने बताया कि शुरुआत में प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने को लेकर सशर्त सहमति दी गई थी। बाद में नगर निगम की टीम ने प्रतिमा के आसपास मौजूद मलबे और प्लास्टर को हटाया।
प्रतिमा को नुकसान की आशंका के बाद रोकी गई कार्रवाई
मुख्य पुजारी के अनुसार, प्रतिमा की संरचना को नुकसान पहुंचने की आशंका के चलते कार्रवाई रोक दी गई। इसके बाद इंदौर से विशेषज्ञों को बुलाया गया। प्रतिमा के आसपास और पीछे खुदाई करके यह समझने की कोशिश की गई कि वह जमीन के अंदर किस स्थिति में है।
विशेषज्ञों ने आधुनिक स्कैनिंग की जरूरत बताई
पुजारी के मुताबिक विशेषज्ञों ने प्रतिमा की वास्तविक स्थिति समझने के लिए आधुनिक उपकरणों और स्कैनिंग तकनीक से जांच कराने की जरूरत बताई थी। अब विशेषज्ञों के दोबारा आने का इंतजार किया जा रहा था और 10 सितंबर को IIT इंदौर की टीम के फिर पहुंचने की बात सामने आई है।
प्रशासन ने कहा- प्रतिमा हटाने का कोई प्रयास नहीं हुआ
सोशल मीडिया पर प्रतिमा हटाने की खबरें तेजी से फैलने के बाद जिला प्रशासन ने बुधवार को प्रेस नोट जारी किया। प्रशासन ने कहा कि खड़े हनुमानजी की प्रतिमा से जुड़ा विषय उज्जैनवासियों और श्रद्धालुओं की आस्था से संबंधित है। श्रद्धालुओं की भावनाओं, प्रतिमा की सुरक्षा और उज्जैन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रशासन ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
प्रशासन ने सोशल मीडिया की खबरों को भ्रामक बताया
जिला प्रशासन के प्रेस नोट के मुताबिक सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन ने श्री खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने के कई प्रयास किए हैं। प्रशासन ने साफ कहा कि अभी तक प्रतिमा को विस्थापित या हटाने संबंधी कोई प्रयास मशीन अथवा मानवीय तरीके से नहीं किया गया है।
भक्त बोले- हमारे पास वीडियो एविडेंस मौजूद हैं
प्रशासन के इस बयान के बाद कुछ श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े लोगों ने विरोध जताया। उनका कहना है कि प्रतिमा को हटाने के प्रयासों से जुड़े वीडियो उनके पास मौजूद हैं। उनका कहना है कि अगर अधिकारी चाहें तो वे इन वीडियो को दिखाने के लिए तैयार हैं।
शैलू यादव ने प्रशासन से जनभावना का सम्मान करने को कहा
मंदिर से जुड़े शैलू यादव ने कहा कि प्रशासन को जनभावना का सम्मान करते हुए हनुमानजी को इसी स्थान पर रहने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा को हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया, तो वह इससे जुड़े सबूत दिखाने के लिए तैयार हैं।
गड्ढा खोदने और कटर मशीन लाने का दावा
शैलू यादव ने दावा किया कि नगर निगम अधिकारी हिमांशु तिवारी के सामने प्रतिमा के आसपास गड्ढा खोदा गया था। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम भी मौके पर आई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि रात में कटर मशीन लाई गई थी। शैलू यादव के मुताबिक इन घटनाओं से जुड़े वीडियो उनके पास मौजूद हैं।
संतों और कांग्रेस विधायकों ने भी किया विरोध
सोशल मीडिया पर खड़े हनुमान की रील वायरल होने और मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के बाद बुधवार को कई संत भी मंदिर पहुंचे। कांग्रेस विधायक महेश परमार और विधायक दिनेश जैन बोस समेत कई नेता और कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया और प्रतिमा को लेकर चल रही कार्रवाई का विरोध किया।
दक्षिणमुखी हनुमान का क्या है धार्मिक महत्व
खड़े हनुमानजी की प्रतिमा का मुख वर्तमान में दक्षिण दिशा की ओर है। धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है और दक्षिणमुखी हनुमान को रक्षा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि दक्षिणमुखी हनुमान की पूजा करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।
शत्रु बाधा और शनि कष्ट से भी जुड़ी हैं मान्यताएं
धार्मिक परंपराओं में दक्षिणमुखी हनुमान की पूजा को शत्रु बाधा दूर करने से भी जोड़ा जाता है। हनुमान उपासना के जरिए शनि संबंधी कष्टों से राहत मिलने की भी धार्मिक मान्यता है। कई परंपराओं में दक्षिणमुखी हनुमान को उग्र और बेहद शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है।
प्रतिमा हटने पर बदल जाएगी हनुमानजी की दिशा
श्रद्धालुओं के विरोध की एक बड़ी वजह प्रतिमा की दिशा भी है। वर्तमान में खड़े हनुमानजी की प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा की ओर है। प्रशासन ने टंकी चौराहे पर मंदिर के लिए जो स्थान तय किया है, वहां प्रतिमा स्थापित होने पर उसका मुख उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा।
भक्तों को धार्मिक मान्यताओं में बदलाव की चिंता
श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने पर सिर्फ स्थान ही नहीं बदलेगा, बल्कि उसकी दिशा भी बदल जाएगी। उनका मानना है कि दक्षिणमुखी हनुमान से जुड़ी धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं पर इसका असर पड़ सकता है। इसी वजह से कई श्रद्धालु प्रतिमा को वर्तमान स्थान पर ही रखने की मांग कर रहे हैं।
तीन बार कोशिश नाकाम होने की चर्चा
प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिशों के बारे में स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि तीन बार प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। इन्हीं घटनाओं के वीडियो और रील्स वायरल होने के बाद कुछ भक्त इसे भगवान की इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं।
अब भगवान की इच्छा मान रहे श्रद्धालु
प्रतिमा के नहीं हटने को लेकर श्रद्धालुओं के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कई भक्त इसे चमत्कार और भगवान की इच्छा मान रहे हैं। हालांकि, प्रतिमा के जमीन के अंदर होने की वास्तविक संरचना और तकनीकी स्थिति को लेकर विशेषज्ञों की जांच भी महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि IIT इंदौर की टीम की जांच पर अब सभी की नजर है।
सड़क चौड़ीकरण और आस्था के बीच समाधान की तलाश
पूरे विवाद का मूल मुद्दा सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क को चौड़ा करने की योजना है। प्रशासन के सामने विकास और सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा करने की चुनौती है, जबकि श्रद्धालु प्रतिमा को हटाने के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोई ऐसा तकनीकी और प्रशासनिक रास्ता निकलेगा, जिससे सड़क का काम भी हो सके और खड़े हनुमानजी की प्रतिमा भी सुरक्षित रह सके।
अब आगे क्या होगा
10 सितंबर को IIT इंदौर की टीम की दोबारा जांच इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञ प्रतिमा की संरचना, जमीन के अंदर उसकी स्थिति और उसे सुरक्षित रखने के तकनीकी विकल्पों को देख सकते हैं। वहीं, श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और विरोध के बीच प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।
प्रशासन और श्रद्धालुओं के दावों में अंतर
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि प्रतिमा हटाने की कोशिशों को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा हटाने या विस्थापित करने का कोई प्रयास नहीं हुआ है, जबकि मंदिर से जुड़े लोग और कुछ श्रद्धालु वीडियो के आधार पर कार्रवाई के प्रयास का दावा कर रहे हैं। इसलिए अंतिम स्थिति समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड, मौके की कार्रवाई और विशेषज्ञों की रिपोर्ट अहम होगी।
खड़े हनुमान मंदिर की कहानी अब देशभर में चर्चा में
सोशल मीडिया की रील्स ने उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर को स्थानीय धार्मिक स्थल से देशभर में चर्चा का विषय बना दिया है। हजारों श्रद्धालुओं का यहां पहुंचना, संतों और नेताओं का विरोध में सामने आना, प्रशासन का स्पष्टीकरण और IIT इंदौर की जांच—इन सबके बीच अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि आगे खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को लेकर क्या फैसला होता है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).