Paper Leak Bill 2026: देशभर में पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्रों और अभिभावकों की चिंता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। रविवार शाम करीब 7 बजे इंस्टाग्राम पर जारी वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि सरकार सिर्फ दोषियों को सजा देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी आधारित बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाएगी। इसी कड़ी में इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी की अगुवाई में एक हाईपावर टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की गई है। वहीं सोमवार को संसद में पेपर लीक रोकने के लिए संशोधित कानून भी पेश किया जाएगा।
पीएम मोदी बोले- छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले जेल में सड़ रहे हैं
रविवार को जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार लगातार छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, वे आज जेल में हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की है और सोमवार को संसद में ऐसा कानून लाया जा रहा है जिसमें दोषियों के लिए और भी कठोर सजा का प्रावधान होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अब सिर्फ कार्रवाई करना ही काफी नहीं है, बल्कि भविष्य की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह भरोसेमंद बनाना भी जरूरी है। इसके लिए टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग किया जाएगा।
नंदन नीलेकणी की अगुवाई में बनेगी हाईपावर टास्क फोर्स
प्रधानमंत्री ने बताया कि परीक्षा सुधार (Examination Reform) के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाईपावर टास्क फोर्स बनाई जाएगी।
यह टास्क फोर्स देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना और आधुनिक तकनीक का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना होगा।
23 जुलाई को आधी रात जारी किया था पहला वीडियो
इससे पहले 23 जुलाई की रात करीब 12 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लगभग 2 मिनट 56 सेकंड का वीडियो जारी किया था।
वीडियो में उन्होंने कहा था कि पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं और दोषियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी थी कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो। इसी वजह से कम समय में करीब 22 लाख छात्रों की परीक्षा दोबारा कराई गई और 19 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिया गया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के दिए थे निर्देश
23 जुलाई के वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि सरकार केवल गिरफ्तारियों से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए ताकि पेपर लीक से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा हो सके।
यह पूरा मामला 3 मई को हुई NEET UG परीक्षा के कथित पेपर लीक से जुड़ा है, जिसने पूरे देश में बड़ी बहस छेड़ दी थी।
24 जुलाई को जारी किया दूसरा वीडियो
24 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने एक और वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने पहले वीडियो पर लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि देर रात साझा किए गए वीडियो पर देशभर से मिले सुझावों और समर्थन के लिए वे सभी का आभार व्यक्त करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनता का यह प्यार और सहयोग आगे भी सरकार को सक्रियता से काम करने की प्रेरणा देता रहेगा।
सोमवार को संसद में पेश होगा पेपर लीक संशोधन विधेयक
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन समाप्त होने के बाद सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक रोकने से जुड़ा संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा।
इस विधेयक का नाम ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इसे लोकसभा में पेश करेंगे। इस संशोधन के जरिए वर्ष 2024 में बने कानून को और अधिक सख्त बनाया जाएगा।
नए कानून में क्या होंगे बड़े बदलाव
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार पेपर लीक के मामलों में जांच और ट्रायल दोनों की प्रक्रिया तय समय-सीमा में पूरी करनी होगी।
मुख्य प्रस्ताव इस प्रकार हैं—
- जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा।
- चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रहेगा।
- राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित कर सकेंगे।
- इन अदालतों में रोजाना (Day-to-Day) सुनवाई होगी।
- बड़े या कई राज्यों में फैले मामलों के लिए केंद्र सरकार विशेष स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित कर सकेगी।
- दोषियों के खिलाफ सजा और आर्थिक जुर्माना दोनों पहले से अधिक सख्त किए जाएंगे।
2024 के कानून और 2026 के प्रस्तावित संशोधन में अंतर
| विषय | 2024 का कानून | 2026 का प्रस्तावित संशोधन |
|---|---|---|
| उद्देश्य | पेपर लीक और नकल रोकने के लिए कानूनी ढांचा | जांच और ट्रायल को तेज एवं कानून को अधिक सख्त बनाना |
| जांच की समय सीमा | कोई निश्चित समय सीमा नहीं | 2 महीने के भीतर जांच अनिवार्य |
| ट्रायल | कोई तय समय सीमा नहीं | चार्जशीट के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य |
| फास्ट ट्रैक कोर्ट | स्पष्ट प्रावधान नहीं | राज्य और केंद्रशासित प्रदेश विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बना सकेंगे |
| सुनवाई | सामान्य प्रक्रिया | रोजाना सुनवाई अनिवार्य |
| STF | कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं | बड़े मामलों के लिए विशेष STF गठित की जा सकेगी |
| सजा | 5 से 10 साल तक जेल और कम से कम ₹1 करोड़ जुर्माना | अधिकतम 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव |
नोट: यह सभी प्रावधान 2026 के प्रस्तावित संशोधन विधेयक पर आधारित हैं। अंतिम नियम संसद से विधेयक पारित होने और अधिसूचना जारी होने के बाद ही लागू होंगे।
छात्रों को क्या मिलेगा फायदा?
यदि यह संशोधन विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई पहले की तुलना में काफी तेज हो जाएगी। फास्ट ट्रैक कोर्ट और विशेष टास्क फोर्स के जरिए संगठित पेपर लीक गिरोहों पर तेजी से कार्रवाई संभव होगी। वहीं टेक्नोलॉजी आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनने की उम्मीद है।