3

Recent News

UP Shocking Case: जिसका कर दिया अंतिम संस्कार, वह जिंदा लौटा.. शांति पाठ के दिन सामने खड़ा मुर्दा देख लोग हैरान!

UP Shocking Case: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस से लेकर पूरे…

Pilibhit News: डीएम ने एनसीओआरडी बैठक में नशे के सौदागरों पर सख्त कार्रवाई, बॉर्डर निगरानी और स्कूलों में जागरूकता अभियान के निर्देश दिए।

Pilibhit News: नशे के कारोबार पर कसेगा शिकंजा, डीएम ज्ञानेन्द्र सिंह ने अधिकारियों को दिया सख्त एक्शन प्लान एनसीओआरडी (NCORD)…

Jantar Mantar Protest: फिर शुरू होगा CJP का आंदोलन, दी चेतावनी.. कहा - "छात्रों की गिरफ्तारी नहीं रुकी तो.."

Jantar Mantar Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि…

UP News: आगरा के ताजमहल में कोरियन महिला पर्यटक को बंदर ने काटा, एक घंटे तक दर्द से रोती रही, नहीं मिली एंबुलेंस..

UP News: उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में रविवार सुबह एक विदेशी महिला पर्यटक के साथ दर्दनाक…

UP Accident News: घर में घुसा ट्रक, दादा-दादी और पोते-नाती की मौत.. किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला!

UP Accident News: उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर…

3

Recent News

UP Shocking Case: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस से लेकर पूरे…

Pilibhit News: नशे के कारोबार पर कसेगा शिकंजा, डीएम ज्ञानेन्द्र सिंह ने अधिकारियों को दिया सख्त एक्शन प्लान एनसीओआरडी (NCORD)…

Jantar Mantar Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोमवार को केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि…

UP News: उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में रविवार सुबह एक विदेशी महिला पर्यटक के साथ दर्दनाक…

UP Accident News: उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर…

Breaking News

पीलीभीत: 270 एकड़ गौशाला की जमीन पर कब्जे का आरोप, नेताओं और प्रशासन पर फूटा गौभक्तों का गुस्सा

पीलीभीत: राष्ट्रीय हनुमान दल ने भरा पचपेड़ा गौशाला की 270 एकड़ जमीन पर कब्जे का दावा करते हुए डीएम के माध्यम से पीएम मोदी को ज्ञापन सौंपा

पीलीभीत: 270 एकड़ गौशाला की जमीन पर किसका कब्जा? ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ में नेताओं और प्रशासन पर फूटा गुस्सा, पीएम मोदी तक पहुंची बड़ी मांग

गोहत्या पर केंद्रीय कानून, गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा और गौशाला की जमीन मुक्त कराने की उठी मांग, जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

पीलीभीत। गौ संरक्षण के मुद्दे पर सोमवार को पीलीभीत में सिर्फ एक पदयात्रा नहीं निकली, बल्कि स्थानीय व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर सवाल भी खड़े किए गए। राष्ट्रीय हनुमान दल एवं विभिन्न हिंदू संगठनों के बैनर तले निकले ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के दौरान जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में पूरे देश में गोहत्या पर एक समान केंद्रीय कानून, गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा, केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना और गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

लेकिन इस पूरे आंदोलन का सबसे चर्चित और गंभीर मुद्दा रहा पीलीभीत के भरा पचपेड़ा स्थित गौशाला की करीब 270 एकड़ जमीन पर कथित कब्जे का आरोप, जिसे लेकर आंदोलनकारियों ने स्थानीय नेताओं और प्रशासन की कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े किए।

पीलीभीत: ज्ञापन में उठी राष्ट्रीय मांग, “गोमाता केवल आस्था नहीं, राष्ट्र की धरोहर”

प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया कि गोवंश भारतीय संस्कृति, कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण का आधार है। इसलिए केंद्र सरकार को पूरे देश में गोहत्या पर एक समान कानून लागू करना चाहिए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि गौ माता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिया जाए, केंद्रीय गो मंत्रालय बनाया जाए तथा गोचर भूमि और गौशालाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति लागू की जाए।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि देशभर में करोड़ों लोगों के समर्थन और हस्ताक्षरों के माध्यम से यह जनभावना सरकार तक पहुंचाई जा रही है।

“270 एकड़ में पूरे मंडल का गौवंश आ सकता है, फिर भी गाय सड़क पर क्यों?”

आंदोलन के दौरान गौ सम्मान अभियान के जिला शाह प्रभारी राम सिंह ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि भरा पचपेड़ा गौशाला के नाम लगभग 270 एकड़ भूमि दर्ज है। उनका कहना था कि यदि इस भूमि का वास्तविक उपयोग हो तो पूरे मंडल के निराश्रित गौवंश को वहां सुरक्षित रखा जा सकता है।

राम सिंह ने आरोप लगाया कि गौशाला की जमीन पर वर्षों से लोगों ने कब्जा कर रखा है, लेकिन आज तक उसे अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि गौशाला की पूरी जमीन खाली करा दी जाए तो सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।

पीलीभीत “नेताओं को गौ माता से नहीं, राजनीति से मतलब”

आंदोलन के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी तीखे आरोप लगाए गए। राम सिंह ने कहा कि “यहां के नेता अपनी-अपनी राजनीति और निजी हितों में व्यस्त हैं। अगर वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक वास्तविक स्थिति ईमानदारी से पहुंचाएं तो निश्चित रूप से बड़ा सुधार संभव है।”

उन्होंने कहा कि मंचों से गौ संरक्षण की बातें करने वालों को पहले यह जवाब देना चाहिए कि गौशाला की भूमि पर यदि कब्जा है तो उसे हटाने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए?

प्रशासन पर भी उठे सवाल

आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि गौशाला के नाम दर्ज भूमि पर वास्तव में अतिक्रमण है तो राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों ने अब तक उसका सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं की। उनका कहना था कि यदि सरकारी भूमि की नियमित निगरानी होती तो ऐसी नौबत नहीं आती।

कार्यकर्ताओं ने मांग की कि भरा पचपेड़ा गौशाला की पूरी भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सर्वे कराया जाए, यदि कहीं अवैध कब्जा पाया जाए तो तत्काल उसे हटाकर भूमि गौशाला को सौंपी जाए।

जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री तक पहुंची आवाज

राष्ट्रीय हनुमान दल और विभिन्न हिंदू संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि अब केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। गो संरक्षण को लेकर जमीनी स्तर पर कार्रवाई करनी होगी। ज्ञापन में मांग की गई कि देशभर में गो संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाया जाए और गौशालाओं की भूमि को हर हाल में सुरक्षित किया जाए।

अब सबकी नजर प्रशासन के जवाब पर

‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के माध्यम से उठे सवालों ने पीलीभीत में नई बहस छेड़ दी है। यदि आंदोलनकारियों के आरोप सही हैं तो यह केवल गौ संरक्षण का नहीं, बल्कि सरकारी भूमि की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का भी गंभीर मामला बनता है।

हालांकि, भरा पचपेड़ा गौशाला की 270 एकड़ भूमि पर कब्जे तथा स्थानीय नेताओं और प्रशासन के संबंध में लगाए गए आरोप आंदोलनकारियों के दावे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासन या राजस्व अभिलेखों से नहीं हुई है। यदि प्रशासन या संबंधित पक्ष का बयान प्राप्त होता है, तो उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।