Commonwealth Games: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के पैरा शॉट पुट F57 इवेंट में गोल्ड मेडल जीत लिया है। शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो कर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। उनकी इस जीत ने न सिर्फ भारत का गौरव बढ़ाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के आगे टिक नहीं सकतीं। इसी इवेंट में भारत की शिल्पा के. शायला ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश की झोली में एक और पदक डाला।
भारत को मिला दूसरा गोल्ड मेडल
शर्मिला धनखड़ का यह गोल्ड मौजूदा कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले रविवार को मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग की 48 किलोग्राम स्पर्धा में गोल्ड जीतकर भारत का खाता खोला था।
शर्मिला की जीत के बाद भारतीय दल का मनोबल और ऊंचा हो गया है।
F57 कैटेगरी क्या होती है?
महिलाओं की F57 कैटेगरी में वे पैरा एथलीट्स हिस्सा लेते हैं जिनके निचले अंग प्रभावित होते हैं या जिनकी मांसपेशियों की ताकत कम होती है। इस कैटेगरी में खिलाड़ी बैठकर (Seated Event) शॉट पुट प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं।
भारत की मेडल टैली में हुए 10 मेडल
शर्मिला के गोल्ड और अन्य खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के खाते में अब कुल 10 मेडल हो चुके हैं। फिलहाल भारतीय टीम आठवें स्थान पर बनी हुई है।
वहीं, ऑस्ट्रेलिया 26 गोल्ड सहित 59 मेडल जीतकर पदक तालिका में पहले स्थान पर बना हुआ है।
अन्य भारतीय खिलाड़ियों ने भी दिखाया दम
भारत के अन्य खिलाड़ियों ने भी अलग-अलग स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन किया।
- हाई जंप में सर्वेश कुशारे ने सिल्वर मेडल जीता।
- वेटलिफ्टिंग के 79 किलोग्राम वर्ग में अजय बाबू ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
- बिंदियारानी देवी ने 58 किलोग्राम वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
- ज्ञानेश्वरी यादव ने 53 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल हासिल किया।
इन उपलब्धियों के साथ भारत लगातार पदक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
हरियाणा के छोटे से गांव से निकली गोल्डन गर्ल
शर्मिला धनखड़ हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव की रहने वाली हैं।
सिर्फ 2 साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया था, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। उनके पिता छोटे किसान थे, जबकि उनकी मां दृष्टिबाधित हैं। आर्थिक तंगी के कारण उनका बेहतर इलाज भी नहीं हो पाया।
कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई, लेकिन जिंदगी की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं।
34 साल की उम्र में शुरू किया पैरा एथलेटिक्स
शर्मिला ने काफी देर से खेलों में कदम रखा। 34 साल की उम्र में उन्होंने कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में F57 कैटेगरी के सीटेड शॉट पुट की ट्रेनिंग शुरू की।
उनके लिए यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं।
ट्रेनिंग के लिए बेच दिया अपना घर
शर्मिला के संघर्ष की सबसे भावुक कहानी साल 2023 में सामने आई।
ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाने के लिए उनके परिवार ने अपना घर तक बेच दिया। इसके बाद पूरा परिवार किराए के मकान में रहने लगा, लेकिन शर्मिला ने अपने सपनों से समझौता नहीं किया और लगातार अभ्यास जारी रखा।
आज उसी संघर्ष का परिणाम देश के लिए गोल्ड मेडल के रूप में सामने आया है।
पहली शादी टूटी, दूसरी शादी बनी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट
शर्मिला की निजी जिंदगी भी काफी संघर्षों से भरी रही।
26 साल की उम्र में उनके पहले पति ने उन्हें घर से निकाल दिया। उस समय उनकी दो बेटियां थीं। वह दोनों बेटियों को लेकर मायके लौट आईं।
इसके बाद 28 साल की उम्र में उन्होंने अजीत से दूसरी शादी की।
एक दिन अजीत ने अखबार में पैरा एथलीट्स की सफलता की खबर पढ़ी और शर्मिला को भी पैरा एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया और मुश्किल समय में उनका सबसे बड़ा सहारा बने।
शर्मिला की जीत लाखों लोगों के लिए प्रेरणा
शर्मिला धनखड़ की कहानी सिर्फ एक गोल्ड मेडल जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, हिम्मत और कभी हार न मानने के जज्बे की मिसाल है।
पोलियो, गरीबी, पारिवारिक परेशानियां, टूटी शादी और आर्थिक संकट जैसी तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा। घर बेचकर ट्रेनिंग करना और फिर देश के लिए गोल्ड जीतना यह साबित करता है कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
आज शर्मिला धनखड़ की यह सफलता पूरे देश के लिए गर्व का विषय है और लाखों युवाओं व खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।