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Nepal Flood: नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड से तबाही! 163 मौतें और 750 से ज्यादा लोग लापता; कैसा है प्रलय के बाद का मंजर?

Nepal Flood: नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड से तबाही! 163 मौतें और 750 से ज्यादा लोग लापता; देखें कैसा है प्रलय के बाद का मंजर?

Nepal Flood: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों की तस्वीर बदलकर रख दी है। रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी के उफान के बाद भारी तबाही देखने को मिली है। अब तक 163 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 750 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ ने सड़क, पुल और संचार व्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। कई जगह घर मलबे में तब्दील हो गए हैं और वाहन तेज बहाव में बह गए।

सबसे दर्दनाक बात यह है कि लापता लोगों में 139 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु भी हैं। इस भयावह आपदा के बाद नेपाल में सेना, रेस्क्यू टीमें और स्थानीय लोग लगातार लोगों की तलाश और बचाव में जुटे हैं।

163 लोगों की मौत, चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद

नेपाल में अब तक कुल 163 शव बरामद किए जा चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा मौतें चितवन में हुई हैं, जहां 64 शव मिले हैं।

जिलेवार आंकड़ा इस प्रकार है:

  • चितवन: 64
  • धादिंग: 27
  • नवलपरासी पूर्व: 26
  • गोरखा: 20
  • नुवाकोट: 12
  • तनहु: 9
  • रसुवा: 3
  • नवलपरासी पश्चिम: 2

मौतों का यह आंकड़ा बेहद भयावह है और राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ इसमें बदलाव की आशंका बनी हुई है।

750 से ज्यादा लोग लापता, 139 भारतीय भी शामिल

फ्लैश फ्लड के बाद 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 139 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। कई भारतीय नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते गए थे।

बताया जा रहा है कि सबसे ज्यादा असर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से गए पर्यटकों पर पड़ा है। तमिलनाडु के 37 और पश्चिम बंगाल के 32 लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

लापता लोगों के परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है और रेस्क्यू टीमें प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रही हैं।

सड़कें मलबे में बदलीं, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बहे

बाढ़ सिर्फ लोगों की जान पर भारी नहीं पड़ी, बल्कि नेपाल के परिवहन और संपर्क ढांचे को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ में:

  • 35 पुल बह गए
  • 45 सस्पेंशन ब्रिज तबाह हो गए
  • कई सड़कें मलबे और कीचड़ में दब गईं
  • कई वाहन तेज पानी के बहाव में फंस गए या बह गए

पुलों के बह जाने से कई इलाकों का संपर्क टूट गया है। ऐसे में राहत सामग्री पहुंचाना और फंसे हुए लोगों तक रेस्क्यू टीमों का पहुंचना भी चुनौती बन गया है।

13 जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान

नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाएं भी इस आपदा की चपेट में आई हैं। बाढ़ के कारण कम से कम 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

भोटेकोशी नदी और उसके आसपास के इलाकों में पानी और मलबे की तेज रफ्तार ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।

मलबे के बीच जिंदगी बचाने की जद्दोजहद

बाढ़ के बाद नेपाल के कई इलाकों में हालात बेहद भयावह दिखाई दे रहे हैं। जहां कभी घर और सड़कें थीं, वहां अब कीचड़, पानी और मलबे का ढेर नजर आ रहा है।

कई घर या तो पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं या पानी में आधे डूबे हुए हैं। जगह-जगह गाड़ियां फंसी दिखाई दे रही हैं।

इस तबाही के बीच सेना, रेस्क्यू टीमें और स्थानीय लोग अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाने में जुटे हैं। कहीं जेसीबी मशीनों से मलबा हटाया जा रहा है, तो कहीं रस्सियों और कंधों के सहारे बुजुर्गों और फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला जा रहा है।

डरे-सहमे बच्चे और परिवार इस प्राकृतिक आपदा के बीच अपनों की सलामती की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

नेपाल सेना ने 250 से ज्यादा लोगों को बचाया

बाढ़ प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया है। सेना ने अब तक 250 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।

हालांकि कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था टूटने के कारण रेस्क्यू टीमों के सामने बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

आखिर कैसे आई इतनी भयानक बाढ़?

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे यानी USGS के अनुसार, इस आपदा के पीछे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुआ एक जबरदस्त भूस्खलन माना जा रहा है।

इस भूस्खलन से 5.2 तीव्रता वाले भूकंप के बराबर सीस्मिक सिग्नल पैदा हुए। माना जा रहा है कि भूस्खलन के दौरान ग्लेशियर का एक हिस्सा भी ढह गया।

इसके बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, कीचड़ और पानी भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेन्डे खोला में जा गिरा। देखते ही देखते पानी ने बेहद तेज रफ्तार पकड़ ली और फ्लैश फ्लड ने रास्ते में आने वाली बस्तियों और ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया।

नेपाल की बाढ़ से यूपी-बिहार में भी बढ़ी चिंता

नेपाल में हुई इस भीषण तबाही के बाद भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार में भी प्रशासन अलर्ट पर है।

गंडक, नारायणी और कोसी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर समेत संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को सतर्क किया गया है।

वहीं, बिहार के 6 जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन संभावित जलस्तर वृद्धि और बाढ़ के खतरे को देखते हुए स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है।

केंद्र सरकार भी लगातार कर रही मॉनिटरिंग

नेपाल की स्थिति पर भारत सरकार की भी लगातार नजर बनी हुई है। गृह मंत्रालय समेत कई केंद्रीय मंत्रालय हालात की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

सीमा से लगे भारतीय इलाकों में किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से की बात

इस मुश्किल घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात की और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं

भारत की ओर से राहत और बचाव के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया गया है।

भारत ने नेपाल भेजी 10 टन मानवीय सहायता

नेपाल में बाढ़ से मची तबाही के बीच भारत ने राहत का हाथ बढ़ाया है। भारत ने 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां नेपाल भेजी हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फेसबुक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह सहायता बाढ़ प्रभावित इलाकों में नेपाल के राहत कार्यों में मदद के लिए भेजी गई है।

भारत ने इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता भी जताई है।

तबाही के बीच अब उम्मीद सिर्फ रेस्क्यू पर

नेपाल में हालात बेहद मुश्किल हैं। 163 मौतें, 750 से ज्यादा लोग लापता, तबाह हुए पुल और सड़कें और मलबे में बदल चुकी बस्तियां इस आपदा की भयावह तस्वीर बयां कर रही हैं।

लेकिन इसी तबाही के बीच सेना, रेस्क्यू टीमें और स्थानीय लोग लगातार जिंदगी बचाने में जुटे हैं। अब सबसे बड़ी उम्मीद उन लोगों की तलाश पर टिकी है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है।

नेपाल के लिए यह सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए अपनों को बचाने और खोजने की सबसे मुश्किल घड़ी बन गई है।