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Masjid Demolition: मस्जिद के मलबे से निकलीं रहस्यमयी नंबर लिखी ईंटें, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, कुएं के आसपास बैरिकेडिंग..

Masjid Demolition: मस्जिद के मलबे से निकलीं रहस्यमयी नंबर लिखी ईंटें, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, कुएं के आसपास बैरिकेडिंग..

Masjid Demolition: सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को हटाए जाने के बाद मलबे से कई ऐसी ईंटें मिली हैं, जिन पर 1909, 1911 और 43 समेत अलग-अलग नंबर लिखे हुए हैं। इन नंबरों को लेकर अब इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इन्हें ईंटों के निर्माण वर्ष से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मलबे को अलग-अलग जगहों पर डलवाया गया है और सुरक्षा की दृष्टि से वहां पुलिस बल तैनात किया गया है।

5 सितंबर को प्रशासन ने मस्जिद ध्वस्त कराई

दरअसल, शनिवार 5 सितंबर 2026 की सुबह सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को प्रशासन ने बेदखली के आदेश के तहत ध्वस्त करा दिया था। इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद के निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध घोषित किया था। इसके बाद मस्जिद समिति की पहली अपील भी खारिज हो गई थी।

देर शाम तक हटाया गया मस्जिद का मलबा

मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के बाद उसी दिन देर शाम तक कलक्ट्रेट परिसर से मलबा हटवा दिया गया। इस मलबे को अलग-अलग स्थानों पर डलवाया गया। बाद में इन स्थानों पर पड़ी ईंटों में कई ऐसी ईंटें मिलीं, जिन पर 1909, 1911 और 43 जैसे नंबर अंकित हैं।

क्या ईंटों पर लिखे नंबर निर्माण वर्ष हैं?

ईंटों पर लिखे नंबरों को देखकर कई लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि ये नंबर ईंटों के निर्माण वर्ष की ओर इशारा कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि इन नंबरों का वास्तव में क्या मतलब है। नंबर सामने आने के बाद मस्जिद की पुरानी होने को लेकर चल रही चर्चाओं को भी नया आधार मिल गया है।

मस्जिद प्रबंधन कमेटी का क्या दावा है?

मस्जिद प्रबंधन कमेटी की ओर से दावा किया जाता रहा है कि कलक्ट्रेट परिसर में स्थित यह मस्जिद आजादी से पहले की है। अब मलबे से मिली नंबर वाली ईंटों को लेकर भी अलग-अलग दावे और चर्चाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे मस्जिद प्रबंधन पक्ष के पुराने होने के दावे को मजबूत करने वाला संकेत बता रहे हैं, लेकिन ईंटों पर लिखे नंबरों की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है।

मलबा देखने पहुंच रहे लोग

मलबे को अलग-अलग जगहों पर डाले जाने के बाद वहां लोगों के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया। लोग ईंटों और मस्जिद के मलबे को देखने के लिए पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में लोग मलबे से ईंटें उठाकर ले जाते हुए भी दिखाई दे रहे हैं।

पुलिस ने मलबे के आसपास बढ़ाई सुरक्षा

लोगों की बढ़ती आवाजाही और मलबे से ईंटें उठाकर ले जाने के वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने उन सभी स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी है, जहां मस्जिद का मलबा डाला गया है। पुलिस बल तैनात किया गया है और मलबा देखने के लिए आने वाले लोगों को रोका जा रहा है। इसके अलावा मलबे को तिरपाल से भी ढक दिया गया है।

कुएं जैसी संरचना के आसपास बैरिकेडिंग

मस्जिद का मलबा हटाए जाने के बाद कलक्ट्रेट परिसर में कुएं जैसी एक संरचना भी मिली थी। इसे सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए पुलिस ने उसके चारों ओर बैरिकेड लगा दिए हैं।

नवीन सभागार के आगे जाने पर भी रोक

कलक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार के आगे आम लोगों के जाने पर रोक लगाई गई है। केवल उन्हीं लोगों को नवीन सभागार से आगे जाने दिया जा रहा है, जिन्हें कोषागार या निर्वाचन कार्यालय जाना है।

कुएं की निगरानी के लिए RRF और CCTV

कुएं जैसी संरचना के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। निगरानी के लिए आरआरएफ तैनात की गई है। इसके साथ ही CCTV कैमरे लगाए गए हैं और पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी लगाई गई है।

मस्जिद प्रकरण के बाद सोशल मीडिया पर भी पुलिस की नजर

कलक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़ी पोस्ट और वीडियो का सिलसिला भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, कुछ पोस्ट और वीडियो के जरिए धार्मिक भावनाओं को भड़काने और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। इसी क्रम में शहर कोतवाली और थाना जनकपुरी पुलिस ने तीन अलग-अलग मामलों में FIR दर्ज की है।

केस 1: फेसबुक वीडियो और अधिकारियों को निशाना बनाने वाली पोस्ट

साइबर टीम प्रभारी उप निरीक्षक सतीश कुमार ने थाना जनकपुरी में शिकायत देकर बताया कि 7 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की साइबर पेट्रोलिंग के दौरान फेसबुक पर ‘राजा भाई’ नाम के पेज से वायरल एक वीडियो सामने आया।

पुलिस के मुताबिक, वीडियो की सामग्री में एक समुदाय विशेष के बीच धार्मिक भावनाएं भड़काने वाली बातें कही गई थीं। इसी दौरान एक्स पर एक अन्य व्यक्ति की पोस्ट भी पुलिस के संज्ञान में आई।

चंद्रशेखर आजाद की पोस्ट पर आपत्तिजनक कमेंट का आरोप

पुलिस के मुताबिक, एक व्यक्ति ने सांसद चंद्रशेखर आजाद की पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए ऐसा कमेंट किया, जिसमें सहारनपुर के अधिकारियों, आरएसएस, डीएम और न्यायाधीश को निशाना बनाते हुए उन पर जानलेवा हमला करने के लिए कहा गया था।

पुलिस का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणी के जरिए लोगों को अधिकारियों के खिलाफ उकसाने और जानलेवा हमले के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया गया।

केस 2: 120 साल पुरानी मस्जिद वाले दावे पर FIR

दूसरा मामला शहर कोतवाली में दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक, 7 सितंबर को उप निरीक्षक राजकुमार गौतम शांति व्यवस्था, हाउस अरेस्ट ड्यूटी और संदिग्ध वाहनों की चेकिंग में तैनात थे। इसी दौरान ‘पूजा माथुर’ नाम के ट्विटर/X हैंडल से एक पोस्ट पुलिस के संज्ञान में आई।

पुलिस के मुताबिक, पोस्ट में दावा किया गया था कि 120 साल पुरानी कलक्ट्रेट मस्जिद को बुलडोजर से गिराने के साथ कुरान पाक, जानमाज, टोपी, तस्वीर और इमाम के कपड़े भी मलबे के साथ ट्रक में भरकर फेंक दिए गए।

पुलिस ने पोस्ट को बताया आपत्तिजनक

पुलिस ने प्रथम दृष्टया इस पोस्ट को आपत्तिजनक बताया और इस मामले में पूजा माथुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यह मामला पुलिस जांच के दायरे में है।

केस 3: यूट्यूब वीडियो को लेकर भी FIR

मस्जिद प्रकरण से जुड़ा एक और मामला शहर कोतवाली में दर्ज किया गया है। उप निरीक्षक सत्येंद्र कुमार शर्मा को चेकिंग के दौरान YouTube पर ‘रेड चिली लाइव’ नाम के चैनल पर वायरल एक वीडियो मिला।

पुलिस के मुताबिक, वीडियो में कलक्ट्रेट मस्जिद से संबंधित सामग्री प्रसारित की गई थी। वीडियो के शीर्षक में ‘सहारनपुर कलक्ट्रेट मस्जिद ढहने के बाद पहली बार मस्जिद के इमाम कैमरे पर’ लिखा हुआ था।

पूजा माथुर के खिलाफ दर्ज हुआ तीसरा मामला

पुलिस ने इस वीडियो को लेकर भी आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने का मामला दर्ज किया है। इस मामले में भी पूजा माथुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

साइबर सेल लगातार कर रही सोशल मीडिया मॉनिटरिंग

सहारनपुर पुलिस की साइबर सेल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार निगरानी कर रही है। पुलिस की नजर उन पोस्ट और वीडियो पर है, जिनसे धार्मिक भावनाएं भड़कने या इलाके का माहौल खराब होने की आशंका हो सकती है।

SP City ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

एसपी सिटी व्योम बिंदल ने कहा कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो या पोस्ट डालने वालों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि माहौल बिगाड़ने का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

ईंटों के नंबर से लेकर सोशल मीडिया पोस्ट तक कई सवाल

सहारनपुर कलक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण में फिलहाल दो अलग-अलग तरह के मामले चर्चा में हैं। एक तरफ मस्जिद के मलबे से मिली 1909, 1911 और 43 नंबर वाली ईंटें लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ ध्वस्तीकरण के बाद सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और वीडियो को लेकर पुलिस कार्रवाई कर रही है।

ईंटों पर लिखे नंबर वास्तव में क्या दर्शाते हैं, मलबे से मिली कुएं जैसी संरचना का क्या इतिहास है और सभी सोशल मीडिया दावों में कितनी सच्चाई है, इन सवालों का जवाब आगे की जांच और आधिकारिक जानकारी से ही साफ होगा।

फिलहाल पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, जांच जारी

फिलहाल मलबे वाले स्थानों पर पुलिस तैनात है, मलबे को तिरपाल से ढका गया है और कुएं जैसी संरचना के आसपास बैरिकेडिंग के साथ CCTV और आरआरएफ की तैनाती की गई है। वहीं, सोशल मीडिया पर निगरानी भी जारी है। मस्जिद प्रकरण से जुड़े तीन मामलों में FIR दर्ज हो चुकी हैं और पुलिस पूरे मामले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आपत्तिजनक सामग्री और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।