Pilibhit News: किसी के हाथ में पौधा था तो किसी की जुबां पर स्वच्छता का संदेश। विद्यालय से बाहर निकले बच्चों का मकसद सिर्फ गांव की गलियों से गुजरना नहीं, बल्कि लोगों तक पर्यावरण और स्वच्छता का संदेश पहुंचाना था। मौका था स्वच्छता सेवा संकल्प अभियान और सेवा पखवाड़ा का, जिसमें कंपोजिट विद्यालय तहा पौटा और बरहा स्कूल के बच्चों ने पौधरोपण के साथ जागरूकता रैली निकालकर ग्रामीणों को साफ-सफाई और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
पौधरोपण से शुरू हुआ बच्चों का अभियान
‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत लगाया पौधा
कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत विद्यालय परिसर में पौधरोपण किया गया। बच्चों के लिए यह सिर्फ मिट्टी में पौधा लगाने की गतिविधि नहीं थी, बल्कि प्रकृति से जुड़ने और लगाए गए पौधे की हिफाजत करने का संकल्प भी था।
आज यह पौधा भले ही छोटा है, लेकिन आने वाले वर्षों में यही पेड़ छांव देगा, हवा को बेहतर बनाने में मदद करेगा और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएगा। बच्चों को पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल और संरक्षण का महत्व भी समझ में आया।
पीलीभीत की पहचान उसकी हरियाली, जंगल और समृद्ध जैव विविधता से भी जुड़ी है। ऐसे जिले में बच्चों के हाथों से पौधरोपण का संदेश खास मायने रखता है। वन और पर्यावरण संरक्षण तभी मजबूत होगा, जब नई पीढ़ी पेड़ को सिर्फ एक पौधे के तौर पर नहीं, बल्कि भविष्य की विरासत के रूप में देखे।
शपथ के बाद गांव में निकली जागरूकता रैली
बच्चों ने ग्रामीणों को स्वच्छता के लिए किया जागरूक
पौधरोपण के बाद विद्यार्थियों ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रम के तहत स्वच्छता की शपथ ली। लेकिन बच्चों ने शपथ लेने के साथ कार्यक्रम को खत्म नहीं किया। इसके बाद वे जागरूकता रैली लेकर गांव की गलियों में निकले और ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।
रैली के दौरान बच्चों ने लोगों को अपने आसपास साफ-सफाई रखने, कूड़ा इधर-उधर न फेंकने और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय से निकली यह रैली सीधे ग्रामीणों के बीच पहुंची और स्वच्छता को रोजमर्रा की आदत बनाने का संदेश दिया।
इस अभियान की खास बात यह रही कि यहां स्वच्छता का संदेश देने वाले कोई बड़े अधिकारी या मंच पर मौजूद वक्ता नहीं थे, बल्कि स्कूल के बच्चे थे। बच्चों ने खुद आगे बढ़कर ग्रामीणों से स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
बच्चों की रैली ने बड़ों को भी दिया बड़ा संदेश
अक्सर स्वच्छता अभियान बड़े-बड़े नारों और कार्यक्रमों तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन जब यही संदेश बच्चे अपने घर और गांव तक लेकर जाते हैं तो उसका असर अलग दिखाई देता है। बच्चे अपने परिवारों और आसपास के लोगों तक स्वच्छता की बात पहुंचाने की मजबूत कड़ी बन सकते हैं।
विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को समझाया कि सड़क, गली, विद्यालय या किसी सार्वजनिक स्थान को साफ रखना सिर्फ सरकार या किसी विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। जिस जगह को हम अपना मानते हैं, उसकी सफाई और स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी हमारी ही होनी चाहिए।
पीलीभीत के लिए पर्यावरण और स्वच्छता का संदेश क्यों अहम?
पीलीभीत की पहचान सिर्फ एक जिले के तौर पर नहीं, बल्कि जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक संपदा से भी है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश समाज की जड़ों तक पहुंचना महत्वपूर्ण है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियान पौधरोपण को भावनात्मक जुड़ाव देते हैं, वहीं ‘स्वच्छता ही सेवा’ लोगों को अपने आसपास के वातावरण के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराता है। जब दोनों संदेश विद्यालय के बच्चों के माध्यम से गांव तक पहुंचते हैं तो अभियान का दायरा और बड़ा हो जाता है।
आज लगाया पौधा, कल देगा छांव
विद्यालय परिसर में लगाया गया पौधा आज भले ही छोटा दिखाई दे रहा हो, लेकिन उसके साथ जुड़ा संदेश बड़ा है। आज जिस बच्चे ने अपने हाथों से पौधा लगाया है, वही बच्चा आने वाले समय में उस पेड़ की छांव देख सकता है और अपने बच्चों को बता सकता है कि इस पेड़ की शुरुआत उसके हाथों से हुई थी।
यही किसी अभियान की असली सफलता है—जब कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी उसका संदेश लोगों के व्यवहार में बना रहे। पीलीभीत के इन विद्यालयों से निकली बच्चों की पहल यही बताती है कि स्वच्छता का संदेश सिर्फ भाषणों से नहीं, बल्कि अच्छी आदतों से मजबूत होगा और पर्यावरण सिर्फ पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उन्हें बचाने से सुरक्षित होगा।
आज बच्चों ने पौधे लगाए, स्वच्छता की शपथ ली और गांव में जागरूकता रैली निकाली। अब इस संदेश को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पूरे समाज की है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).