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CJP Protest ECI: क्या विपक्ष के लिए ‘प्रेशर ग्रुप’ का काम कर रहे कॉकरोच? राहुल-अखिलेश के चेहरों पर जनता का भरोसा खत्म?

CJP Protest ECI: क्या विपक्ष के लिए 'प्रेशर ग्रुप' का काम कर रहे कॉकरोच? राहुल-अखिलेश के चेहरों पर जनता का भरोसा खत्म?

CJP Protest ECI: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि Special Intensive Revision (SIR) के जरिए देश में 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए गए और लोगों से वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है। CJP ने कहा है कि अगर 48 घंटे में ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा और इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं, SIR को लेकर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से जुड़ी एक रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने भी अपने पक्ष में 8 पॉइंट का जवाब जारी किया है।

CJP ने ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया

CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने SIR के जरिए देश में 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए हैं। दीपके के मुताबिक, लोगों से उनका वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है।

दीपके ने कहा कि लोकतंत्र का मतलब है कि जनता अपनी सरकार चुने। लेकिन जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, तब से कथित तौर पर सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट करेगा और कौन नहीं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपके ने ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी भी की और उन्हें “इस देश का सबसे बड़ा गद्दार” बताया। यह बयान CJP फाउंडर अभिजीत दीपके का आरोप और राजनीतिक बयान है।

CJP ने चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे के भीतर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन करने की बात कही गई है।

CJP की प्रमुख मांगें क्या हैं?

CJP ने चुनाव आयोग और SIR की प्रक्रिया को लेकर कई मांगें रखी हैं। पार्टी की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं।

ज्ञानेश कुमार 48 घंटे में इस्तीफा दें

CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के भीतर इस्तीफा देने की मांग की है।

आने वाले सभी चुनाव रोके जाएं

पार्टी ने मांग की है कि आने वाले सभी चुनावों को रोक दिया जाए।

जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट वापस लाई जाए

CJP की मांग है कि जनवरी 2025 की मतदाता सूची को वापस लागू किया जाए।

SIR बंद कर जांच कमेटी बनाई जाए

पार्टी ने Special Intensive Revision यानी SIR की प्रक्रिया बंद करने और पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाने की मांग की है।

2023 के कानून को हटाकर नया कानून बने

CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को हटाकर नया कानून बनाने की भी मांग की है।

ममता-केजरीवाल की सीटों पर वोट डिलीट हुए, दीपके ने लगाए 4 आरोप

CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद की राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने क्षेत्रीय दलों और विपक्षी नेताओं को लेकर भी आरोप लगाए।

1. 2024 के नतीजों के बाद BJP डरी

दीपके ने कहा कि 2024 के चुनाव में BJP बहुमत हासिल नहीं कर सकी। ‘400 पार’ का नारा देने के बाद BJP 240 सीटों पर आ गई।

उनके मुताबिक, इसके बाद BJP को महसूस हुआ कि क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत हो रही हैं।

2. क्षेत्रीय नेताओं को एक-एक कर हराने का आरोप

दीपके ने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे, NCP, एमके स्टालिन, पिनराई विजयन, अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी का जिक्र किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन सभी नेताओं को एक-एक करके हराया गया। दीपके ने कहा कि यह महज संयोग नहीं हो सकता।

उनके मुताबिक, ये सभी नेता 2024 में एक साथ आए थे और उन्होंने मिलकर भाजपा के खिलाफ प्रचार किया था।

3. विपक्ष को खत्म करने की कोशिश का सवाल

दीपके ने सवाल उठाया कि क्या यह कदम सिर्फ मजबूत विपक्षी नेताओं को खत्म करने के लिए उठाया गया था।

उन्होंने कहा कि CJP को विपक्ष या किसी खास पार्टी से कोई विशेष लगाव नहीं है। लेकिन अगर लोकतंत्र में पूरे विपक्ष को ही खत्म कर दिया जाए तो क्या इसे लोकतंत्र कहा जा सकता है?

Indian Express की रिपोर्ट में 14 आपत्तियों का दावा

बुधवार को इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR को लेकर पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की।

23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच आयोग के फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज की थी।

इन आपत्तियों में वोटर लिस्ट, Form-6, नए वोटरों और वोटर डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं।

यह विवाद जून 2025 से बिहार में शुरू हुए SIR के दौरान सामने आया।

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों में किन मुद्दों का जिक्र था?

रिपोर्ट में मतदाता सूची और वोटर डेटा से जुड़े कई मुद्दों पर आपत्तियों का जिक्र किया गया है।

वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने का मामला

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा जोड़ने से जुड़े मामलों पर थीं।

वोटर डेटा को दिल्ली तक सीमित करने पर सवाल

रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों आयुक्तों ने वोटर डेटा को दिल्ली तक सीमित यानी केंद्रीकृत किए जाने पर सवाल उठाए थे।

विवेक जोशी ने वोटर रिकॉर्ड में हुए बदलावों की जांच कराने की बात कही थी।

नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन पर आपत्ति

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े कदमों को आयुक्तों ने ‘अनधिकृत’ और ‘गैरकानूनी’ बताया था।

Form-6 में SIR से जुड़ा सवाल

नए वोटरों के लिए Form-6 में SIR से जुड़ा नया सवाल जोड़े जाने का भी मामला सामने आया।

इसमें आवेदक से उसके या माता-पिता/दादा-दादी के नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में होने के बारे में पूछा जा रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि नियम बदले बिना Form-6 में ऐसा बदलाव नहीं किया जा सकता। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति का समर्थन किया था।

गोवा में 97 वोटरों के नाम का मामला

रिपोर्ट में दावा किया गया कि गोवा में SIR के दौरान 97 वोटरों के नाम हट गए थे।

जांच के बाद अधिकारी इन नामों को दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल करने के पक्ष में थे, लेकिन ECINet में नाम वापस जोड़ने का विकल्प नहीं था।

अधिकारियों ने आयोग से इस समस्या को ठीक करने की मांग की, लेकिन अंतिम लिस्ट में इन नामों को नहीं जोड़ा जा सका।

चुनाव आयोग ने दावों पर 8 पॉइंट में जवाब दिया

चुनाव आयोग ने 23 सितंबर की शाम इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में किए गए दावों पर अपना पक्ष रखा। आयोग ने X पर जारी बयान में कहा कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य बात है।

आयोग ने पूरे मामले पर 8 पॉइंट में जवाब दिया।

1. 14 बार लिखित आपत्ति पर EC का जवाब

दावा था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति जताई।

EC ने कहा कि किसी फैसले पर अलग राय, सुझाव या टिप्पणी देना सामान्य प्रक्रिया है। इससे फैसलों में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित होती है।

आयोग के मुताबिक, किसी फैसले का अंतिम रूप से लिया जाना बाकी हो तो आयोग के सदस्य सवाल या सुझाव दे सकते हैं। अंतिम फैसला होने से पहले इस तरह की चर्चा होती है।

2. वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने पर EC का जवाब

दावा था कि दोनों आयुक्तों की आपत्तियां वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा जोड़ने से जुड़ी थीं।

EC ने कहा कि राज्यों में जिला स्तर पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार Electoral Registration Officer यानी ERO और District Election Officer यानी DEO जैसे अधिकारियों के पास होता है।

ये अधिकारी तय प्रक्रिया के अनुसार मतदाता सूची में बदलाव करते हैं।

3. वोटर डेटा के केंद्रीकरण पर EC का जवाब

दावा था कि दोनों आयुक्तों ने वोटर डेटा को दिल्ली तक सीमित यानी केंद्रीकृत किए जाने पर सवाल उठाए थे। विवेक जोशी ने वोटर रिकॉर्ड में बदलावों की जांच कराने की बात कही थी।

EC ने कहा कि ECINet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं।

आयोग के मुताबिक, अनधिकृत बदलाव और छेड़छाड़ रोकने के लिए IT सिक्योरिटी चेक और ऑडिट कंट्रोल लागू हैं।

4. नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन पर EC का जवाब

दावा था कि कुछ नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े कदमों को आयुक्तों ने ‘अनधिकृत’ और ‘गैरकानूनी’ बताया था।

EC ने कहा कि सभी आधिकारिक आदेश और फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। ये आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से जुड़े 2023 के कानून के तहत जारी किए जाते हैं।

5. Form-6 में बदलाव पर कोई जवाब नहीं

Form-6 में SIR से जुड़ा सवाल जोड़ने को लेकर चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू की आपत्ति का दावा किया गया था।

इस दावे पर चुनाव आयोग ने कोई जवाब नहीं दिया।

6. गोवा के 97 वोटरों के मामले पर कोई जवाब नहीं

गोवा में SIR के दौरान 97 वोटरों के नाम दोबारा जोड़ने के लिए ECINet में विकल्प नहीं होने के दावे पर भी आयोग ने कोई सफाई नहीं दी।

EC ने बयान में दो और बातें कहीं

7. रिपोर्ट में अधूरी जानकारी देने का आरोप

चुनाव आयोग ने कहा कि पिछले 10 महीनों की कुछ बातों को सामने लाकर अधूरी तस्वीर दिखाई जा रही है।

आयोग के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में करीब 40 नई पहल और कई चुनावी सुधार किए गए हैं। इनमें वोटर लिस्ट का रिवीजन यानी SIR भी शामिल है।

हालांकि, आयोग ने अपने बयान में इंडियन एक्सप्रेस का सीधे जिक्र नहीं किया।

8. कई राज्यों में चुनावी प्रक्रिया सफल होने का दावा

EC ने कहा कि उसने एक साल के दौरान बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनाव और चुनाव से जुड़े कई काम सफलतापूर्वक कराए।

आयोग के मुताबिक, इसके लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्था की गई।

10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ SIR

SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं।

आपके दिए गए विवरण के मुताबिक, SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है।

असम में स्पेशल रिवीजन यानी SR हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई।

तीसरे फेज में दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में SIR

चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में Special Intensive Revision यानी SIR की घोषणा की थी।

यह SIR का तीसरा फेज है।

पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है।

जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।

विपक्ष पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ा तो नए चेहरों की तलाश क्यों?

यहां एक सवाल और उठता है—आखिर विपक्ष को CJP जैसे नए और छात्र संगठन से निकले चेहरे की जरूरत क्यों पड़ सकती है? इसकी वजह मौजूदा राजनीतिक माहौल में विपक्ष के सामने भरोसे का संकट माना जा सकता है।

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने NYAY योजना के तहत हर गरीब परिवार को सालाना 72 हजार रुपये देने का वादा किया था। लेकिन चुनाव में कांग्रेस सिर्फ 52 सीटों तक पहुंची, जबकि BJP ने 303 सीटें जीतीं।

2024 में कांग्रेस ने ‘महालक्ष्मी योजना’ के तहत महिलाओं को हर साल 1 लाख रुपये देने का वादा किया। इसके बावजूद कांग्रेस 99 सीटों पर ही पहुंच सकी, जबकि BJP 240 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी।

इन चुनावी नतीजों को देखते हुए विपक्ष के लिए यह सवाल लगातार बना हुआ है कि आखिर जनता के बीच उसकी बात और उसके वादों पर कितना भरोसा बचा है। ऐसे में अगर BJP को चुनौती देनी है तो सिर्फ पुराने राजनीतिक चेहरों के भरोसे रहने के बजाय ऐसे नए चेहरों की जरूरत महसूस हो सकती है, जिनके साथ पहले से कोई बड़ी राजनीतिक छवि या नकारात्मकता जुड़ी न हो।

और यहीं छात्रों और छात्र आंदोलनों से निकले चेहरों की भूमिका अहम हो जाती है। CJP भी शुरुआत में छात्रों के मसले यानि NEET मुद्दों पर आंदोलन करते हुए सामने आई थी। अब यही संगठन SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रहा है।

क्या CJP विपक्ष की ‘B Team’ की तरह काम कर रही है?

यहीं से CJP को लेकर सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा होता है। CJP खुद को प्रेशर ग्रुप के रूप में सामने लाई थी, लेकिन उसकी हालिया गतिविधियों को देखें तो उसके निशाने पर लगातार ऐसे मुद्दे दिखाई दे रहे हैं, जिनमें सीधे तौर पर BJP या केंद्र की भूमिका को लेकर सवाल उठते हैं।

NEET के मुद्दे पर CJP ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया। अब SIR के मुद्दे पर पार्टी सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रही है।

CJP फाउंडर अभिजीत दीपके के ताजा बयान में भी BJP और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई का जिक्र साफ दिखाई देता है। उन्होंने उद्धव ठाकरे, NCP, एमके स्टालिन, पिनराई विजयन, अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी का नाम लेते हुए सवाल उठाया कि क्या मजबूत विपक्षी नेताओं को एक-एक करके खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

ऐसे में सवाल यह है कि जो संगठन छात्र आंदोलन से निकला था, वह अब लगातार BJP और उससे जुड़े सत्ता तंत्र के खिलाफ ही बड़े राजनीतिक मुद्दे क्यों उठा रहा है? क्या CJP सिर्फ छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर आंदोलन करने वाला संगठन है या फिर वह धीरे-धीरे विपक्ष के लिए एक नए चेहरे और दबाव बनाने वाले प्लेटफॉर्म की भूमिका में आ रहा है?

यही वजह है कि CJP की मौजूदा भूमिका को लेकर उसे विपक्ष की ‘B Team’ के तौर पर देखे जाने की चर्चा शुरू हुई है। हालांकि, CJP को औपचारिक रूप से किसी विपक्षी दल की ‘B Team’ बताने के लिए उसके किसी विपक्षी दल के साथ संगठनात्मक संबंध या प्रत्यक्ष राजनीतिक गठजोड़ का स्पष्ट प्रमाण जरूरी होगा।