फतेहपुर पुलिस बनी एक परिवार का सहारा – आंगन में सजा दी खुशियां
रिपोर्ट – लईक – फतेहपुर जनपद
Fatehpur News – उत्तर प्रदेश पुलिस फिर एक बार एक परिवार का सहारा बन गई और उसकी खुशियां उस परिवार के आंगन पर सजा दी। जी हां कुछ ऐसा ही किया फतेहपुर जनपद की पुलिस ने। जिसने एक परिवार की खो चुकी बेटी को तलाश करते हुए भटक परिवार के सुपुर्द कर दिया। परिवार इस लिए हताश हो चुका था क्योंकि उनकी लापता बेटी बोल नहीं सकती थी। जिसकी वजह से वह किसी को अपना पता तो तक नहीं बता सकती थी। पर पुलिस उस परिवार का ऐसा सहारा बनी कि फिर से खुशियां लौट आईं हैं।
पुलिस का गस्त आया काम
इस सफलता की शुरुआत उस वक्त हुई जब प्रभारी निरीक्षक थाना औंग विद्या यादव द्वारा क्षेत्र गश्त किया जा रहा था। तभी उन्हें एक 45 वर्षीय महिला परेशान मुद्रा में दिखाई पड़ी। जिससे बातचीत के प्रयास पर महिला के मूक- बधिर होने के कारण नाम पता बताने में असमर्थ रही। जिसके बाबत आस-पास के लोगों से जानकारी पर महिला की कोई पहचान न हो सकी तो प्रभारी निरीक्षक विद्या यादव द्वारा भटकी महिला को अपने साथ थाना औंग लाया गया तथा सोशल मीडिया एवं मैनुअल रूप से दूरभाष के माध्यम से बातचीत के क्रम में महिला की पहचान सुशीला देवी पत्नी स्व: गौतम निवासी पुरे पासिन बेहटा कला थाना डलमऊ जनपद रायबरेली के रूप में हुई।
खबर मिलते ही खुश हो गया था परिवार
थाना पुलिस की सूचना पर महिला के परिजन थाने आ पहुंचे थे और पुलिस ने पहचान कराने के बाद परिजनों को सुपुर्द कर दिया। इस तरह से औंग पुलिस ने काफी मशक्कत करके भटकी महिला को परिजनों से मिलाने मे सफलता हासिल कर ली। पुलिस की कार्यशैली को लेकर लोगों ने सराहना की है। वहीं परिवार ने बताया कि महिला अपने मायके ग्राम कनहा से ससुराल पूरे पासिन का पुरवा के लिए निकली थी तथा रास्ता भटक गई एवं मूक- बधिर के साथ साथ अशिक्षित होने के कारण किसी से बात कर समस्या बताने में असमर्थ रही। इस प्रकार प्रभारी थाना औंग पुलिस द्वारा भटकी मूक- बधिर महिला की पहचान करा कर समय से परिवारिजन उसके भाई दीपक पुत्र शिव प्रसाद निवासी ग्राम कनहा थाना डलमऊ जनपद रायबरेली को सुपुर्द किया गया।
गोरखपुर में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक की कचहरी में खिंचते मामले का नतीजा सरेआम खून-खराबे के रूप में सामने आया। पति ने दिनदहाड़े अपनी पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक कलह की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सामाजिक और मानसिक तनाव किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकता है
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