बांदा की मरौली बालू खदान खंड 5 से लगातार नियम विरुद्ध अवैध खनन की तस्वीरें सामने आ रहीं हैं लेकिन प्रशासन कुछ इस कदर मेहरबान है की मनमाने ढंग से खनन करने की छूट दे रखी है। वहीं बीते दिन खान निरीक्षक ने शिल्पाही बालू खदान में 30 लाख रुपए का जुर्बाना लगाया है वो भी नदी में अवैध रास्ता बनाने को लेकर लेकिन इन्हें अवैध खनन वहां भी नहीं दिखा जबकि मीडिया में जो तस्वीरें सामने आई थी उसमे साफ तौर पर देखा जा सकता था की प्रतिबंधित मशीनों से जलधारा में खनन किया जा रहा था जो अवैध है। पर यहां के अधिकारियों को न ही अवैध खनन दिखता है और न ही अवैध मसीने जबकि ये मसीनें सीमा से कहीं ज्यादा गहराई तक खनन करती हैं।
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मटौंध थाना अंतर्गत मरौली बालू खदान में पहले भी गुंडई और माफिया राज के मामले सामने आ चुके हैं जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने प्रशासन से शिकायत भी की थी वहीं इस खदान में अवैध खनन और अवैध परिवहन भी पकड़ा जा चुका है लेकिन उसके बाद इस खदान के संचालकों ने प्रशासन में कुछ ऐसी सेटिंग बनाई की कार्रवाई न करने को लेकर खनिज निदेशक को खनिज अधिकारी पर कार्रवाई करनी पड़ी और जिलाधिकारी को स्थानीय कर्मचारियों और अधिकारियों की टीम बनानी पड़ी और 24 घंटे की ड्यूटी लगाई पड़ी पर वो इन खदान संचालकों को सेटिंग का शिकार होते नजर आ रहे हैं तभी तो यहां लगातार नियमों को धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं और प्रतिबंधित मशीनों से भारी मात्रा में खनन किया जा रहा है जिससे नदी के अस्तित्व को गहरा आघात लग रहा है और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है वहीं सरकारी राजस्व को भी भारी चूना लग रहा है वहीं जिम्मेदार अपनी जेबें भरने में लगे हैं। अब देखने वाली बात होगी की जिलाधिकारी से लेकर उच्च अधिकारियों और सीएम योगी को ये माफिया राजस्व के नाम पर मिलीभगत से कब तक गुमराह करते रहेंगे।

गोरखपुर में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक की कचहरी में खिंचते मामले का नतीजा सरेआम खून-खराबे के रूप में सामने आया। पति ने दिनदहाड़े अपनी पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक कलह की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सामाजिक और मानसिक तनाव किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकता है