यूपी पुलिस का जांबाज जवान: कहते हैं कि ऊपर वाला अगर जीवन देता है, तो उसे बचाने वाले डॉक्टरों को धरती का दूसरा भगवान कहा जाता है। लेकिन इंसानियत कब मानवता के रूप में उभरकर सामने आ जाए, यह किसी चमत्कार से कम नहीं होता। ऐसा ही कुछ कानपुर में हुआ, जहां एक मासूम बच्चा जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था। परिवार असमंजस में था, लेकिन तभी एक जांबाज जवान ने फरिश्ता बनकर बच्चे की जान बचाई।
डेंगू से ग्रसित था मासूम:
कानपुर के नरवाल निवासी अरविंद साहू के दो बेटे हैं। 25 अगस्त 2024 को उनके दोनों बेटे डेंगू से पीड़ित हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए कानपुर के रॉयल चिल्ड्रन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इस दौरान बड़े बेटे की हालत गंभीर हो गई, जिससे डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा। लेकिन बच्चे की हालत बिगड़ती जा रही थी और उसे तत्काल ब्लड की आवश्यकता थी। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे का ब्लड ग्रुप ‘ए नेगेटिव’ है, जो आसानी से उपलब्ध नहीं होता। मजबूर पिता को डॉक्टरों ने संकल्प सेवा समिति से संपर्क करने की सलाह दी।
संकल्प सेवा समिति का तत्पर एक्शन:
डॉक्टरों के निर्देश पर बीमार बच्चे के पिता ने तुरंत संकल्प सेवा समिति से संपर्क किया। समिति के संयोजक श्री संतोष सिंह चौहान अस्पताल पहुंचे और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए यूपी पुलिस के एक जांबाज जवान का नाम याद किया। आपको बताते चलें कि संकल्प सेवा समिति ब्लड कैंप आयोजित कर रक्तदान के लिए जागरूकता फैलाती है और दान किए गए रक्त को सरकारी ब्लड बैंक में जमा करती है, जिससे कई जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
यूपी पुलिस के जवान का साहस:
इस कठिन समय में कानपुर कमिश्नरेट के पुलिस उपायुक्त दक्षिण कार्यालय में तैनात आरक्षी चौधरी हरेंद्र सिंह ने तुरंत रक्तदान किया, जिससे डेंगू से पीड़ित 6 वर्षीय बालक की जान बचाई जा सकी। हरेंद्र की इस इंसानियत और सेवा भावना को देख बीमार बच्चे के पिता भावविभोर हो गए और संकल्प सेवा समिति के संयोजक श्री चौहान और आरक्षी हरेंद्र सिंह का बार-बार धन्यवाद किया।
इस घटना ने साबित कर दिया कि इंसानियत और मानवता का कोई मुकाबला नहीं। चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर दिल में इंसानियत हो, तो चमत्कार जरूर होते हैं।