Ayodhya Diwali Celebration: अयोध्या में इस बार का दीपोत्सव एक खास अवसर था। करीब 500 वर्षों के संघर्ष के बाद आक्रांताओं द्वारा मंदिर के विध्वंस और फिर मंदिर पुनर्निर्माण ने इस दिवाली का महत्व और भी बढ़ दिया है। अयोध्या का हर घर-आंगन, गली-चौराहा और मंदिर दीपों से रोशन है, जिसमें भगवान राम की आलौकिक छटा नजर आ रही है। यह दिवाली और भी खास थी क्योंकि जिस तरह भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद लौटने के उपलक्ष्य में यह त्योहार मनाया जाता है, उसी तरह इस वर्ष राम मंदिर में रामलला विराजमान हुए हैं।
रामराज्याभिषेक की झांकी में उमड़ा जनसैलाब
बुधवार को अयोध्या में लोगों ने तरह-तरह से इस त्योहार को मनाना शुरू कर दिया। सबसे पहले तो जब सुबह 11 बजे जब साकेत महाविद्यालय से भगवान राम का राज्याभिषेक प्रतीक झांकी के रूप में निकला, तो अयोध्या के लोग मानो इतिहास में फिर से लौट गए। जैसे ही झांकी शहर की गलियों से गुजरी, लोग राम के दर्शन को दौड़ पड़े। अयोध्या निवासी प्रो. आशुतोष त्रिपाठी ने इस क्षण को रामचरित मानस की चौपाई “रामचंद मुख चंदु निहारी… सब पुर लोग सुखारी” से जोड़ा और कहा, “भगवान राम का दर्शन अयोध्या के लोगों को असीम सुख और संतोष का अहसास दिलाता है।”

हर गली-चौराहे पर बिछी राम की छटा
रामनगरी का दृश्य बुधवार को पूरी तरह राममय था। रामलला के दर्शन करने आए भक्तों में अपार उत्साह था। केवल अयोध्या के निवासी ही नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों से भी लोग राम के दर्शन के लिए पहुंचे थे। 84 कोस में फैले मठ-मंदिरों, आश्रमों, और पौराणिक स्थलों पर दीप जलाए गए, जो भगवान राम के वैभव और दिव्यता का प्रतीक थे।

राम मंदिर निर्माण और संघर्ष की स्मृति
इस वर्ष का दीपोत्सव अयोध्या के लिए इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि लगभग 500 साल बाद रामलला अपने भव्य महल में विराजमान हुए हैं। आक्रांताओं द्वारा मंदिर के विध्वंस और फिर मंदिर पुनर्निर्माण के संघर्ष के बाद इस दिवाली का महत्व और भी बढ़ गया है। यह त्योहार भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास से लौटने की खुशी में मनाया जाता है, और इस बार यह अयोध्या के लिए गर्व और श्रद्धा का प्रतीक बन गया।

अद्भुत और मनोहारी दृश्य
सूर्यास्त के साथ ही सरयू किनारे स्थित राम की पैड़ी पर दीपों की अविरल श्रृंखला से अद्भुत और मनोहारी दृश्य देखने को मिला, जिसने समूचे विश्व को मानो मंत्रमुग्ध कर दिया। इस भव्य आयोजन को ई-प्लेटफार्म पर करोड़ों भक्तों ने लाइव देखा और इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। इस दौरान अयोध्या निवासी और दूर-दराज से आए भक्तों ने प्रभु राम के लिए अपने श्रद्धा भाव को व्यक्त किया। अयोध्या में इस बार की दिवाली एक अध्यात्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक बनी।

हर दीप में राम का संदेश
इस दिवाली हर दीप में भगवान राम की छवि नजर आई। रामराज्य की झलक केवल अयोध्या में नहीं, बल्कि सभी जगहों पर दिखी। जो लोग अयोध्या नहीं आ सके, उन्होंने घर बैठे ई-प्लेटफार्म पर इस दृश्य का आनंद लिया। अयोध्या का यह दीपोत्सव इतिहास में हमेशा के लिए एक विशेष अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।

