योगी सरकार में भ्रष्टाचार की जड़ें दिन प्रतिदिन मजबूत होती जा रहीं है। बड़ी बात यह है कि इन घूसखोरों को किसी का भय नहीं है। भ्रष्टाचार का विरोध करने और सवाल पूछने पर ये उल्टा वीडियो बनाने लगते है और मनघड़ंत आरोप लगाकर डराते धमकाते हैं। जब पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने में कोई गुरेज नहीं करते तो ये आम जनता के साथ क्या व्यवहार करते होंगे साफ तौर पर समझा जा सकता है। अगर ये कहा जाए कि उल्टा चोर कोतवाल को डांटे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।पूरा मामला बांदा सदर तहसील का है जहां पत्रकार पंकज त्रिपाठी अपने पुत्र का ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचे थे । जिसमें लेखपाल के हस्ताक्षर होने थे जिसके बाद वह लेखपाल सुधीर यादव के पास पहुंचे और उनसे निवेदन किया लेखपाल ने पांच सौ रुपए की मांग की जिसका विरोध उनके साथी शैलेन्द्र वर्मा किया तो लेखपाल सुधीर वर्मा ने जातिवाचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता की पीड़ित पंकज त्रिपाठी ने पत्रकार होने का परिचय भी दिया जिसके बाद लेखपाल ने उखाड़ लेने की धमकी दी और कहा लाइन से आओ। जब इस मामले में कुछ पत्रकार सवाल पूछने गए तो लेखपाल साहब स्वयं ही पत्रकारों का वीडियो बनाने लगे और मनघड़ंत आरोप लगाते हुए डराने धमकाने लगे जिसकी शिकायत पीड़ित ने सीटी मजिस्ट्रेट से की जिस पर उन्होंने लिखित शिकायत मांगी है। लेखपाल सुधीर यादव भाजपा सरकार को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।


गोरखपुर में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक की कचहरी में खिंचते मामले का नतीजा सरेआम खून-खराबे के रूप में सामने आया। पति ने दिनदहाड़े अपनी पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक कलह की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सामाजिक और मानसिक तनाव किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकता है