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IVRI दीक्षांत: राष्ट्रपति और CM ने विज्ञान-शोध सराहा

🎓 दीक्षांत नहीं… नए भारत की वैज्ञानिक चेतना का उद्घोष है यह समारोह!

🏛️ बरेली बना ऐतिहासिक क्षण का गवाह, महामहिम राष्ट्रपति ने किया देश के पशु विज्ञान को नमन

बरेली, 30 जून 2025।
जब भारत की राष्ट्रपति किसी विश्वविद्यालय के मंच पर आती हैं, तो केवल उपाधियाँ नहीं बांटी जातीं, बल्कि संदेश दिया जाता है – शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, राष्ट्रीय चेतना का बीज है। ऐसा ही दृश्य था सोमवार को, जब बरेली के इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु-चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के ग्यारहवें दीक्षांत समारोह में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पहुंचीं और मंच से देश के भविष्य यानी छात्र-छात्राओं को न केवल प्रोत्साहित किया बल्कि भारत के वैज्ञानिक विकास और ग्रामीण जीवन के बीच सेतु की परिकल्पना को भी साझा किया।

🚁 त्रिशूल एयरपोर्ट पर हुआ ऐतिहासिक स्वागत

राष्ट्रपति के आगमन पर बरेली का त्रिशूल एयरपोर्ट सजीव हो उठा। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं बुके भेंट कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। इसके बाद महामहिम सीधे स्वामी विवेकानंद सभागार पहुंचीं, जहां देशभर के छात्र-छात्राएँ उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे।

🏆 576 छात्रों को डिग्री, 24 को पदक – भविष्य के वैज्ञानिकों को मिला प्रोत्साहन

दीक्षांत समारोह में 576 छात्र-छात्राओं को स्नातक की उपाधियाँ और 24 मेधावियों को राष्ट्रपति के हाथों स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक दिए गए। यह पल केवल छात्रों के लिए नहीं, बल्कि उनके परिवार और पूरे पशु चिकित्सा समुदाय के लिए गौरवशाली था।

🧬 महामहिम राष्ट्रपति का संबोधन – “टीकाकरण से जुड़ी है जीवन की डोर”

महामहिम ने कहा,

“मैं जिस परिवेश से आती हूं, वह प्रकृति के निकट है। पशु और मानव के बीच का रिश्ता जन्मजात है। IVRI द्वारा विकसित टीकाकरण प्रणाली सिर्फ विज्ञान नहीं, जनकल्याण की भावना है।”

उन्होंने गिद्धों के संरक्षण की दिशा में वैज्ञानिकों के प्रयासों की भी सराहना की और कहा कि रसायनों के कारण घटती प्रजातियों की रक्षा आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

ये भी वीडियो देखिये:-

🧪 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिखाई बरेली की वैदिक और वैज्ञानिक पहचान

मुख्यमंत्री योगी ने कहा:

“बरेली सिर्फ एक ज़िला नहीं, बल्कि पौराणिक ‘पांचाल देश’ है। यहां के सात प्राचीन महादेव मंदिर हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें हम ‘नाथ कॉरिडोर’ के रूप में विकसित कर रहे हैं।”

उन्होंने IVRI द्वारा लंपी वायरस की वैक्सीन विकसित करने की उपलब्धि का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस संस्थान ने केवल पशु ही नहीं, बल्कि अन्नदाताओं के जीवन में नई उम्मीदें भरी हैं।

🧑‍🔬 छात्र-छात्राओं ने पूछे सवाल, मिले राष्ट्रपति और वैज्ञानिकों से स्पष्ट उत्तर

छात्रों ने राष्ट्रपति से सवाल किए:

प्रश्न: “गांवों में टीकाकरण को कैसे और प्रभावशाली बनाया जा सकता है?”
उत्तर: “आप जैसे युवा ही इस परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं। तकनीक को जन-जन तक ले जाने का जिम्मा अब आपकी पीढ़ी पर है।”

प्रश्न: “गांवों में गिद्धों की संख्या क्यों घटी?”
उत्तर: “हमारे द्वारा प्रयोग किए जाने वाले कुछ रसायन घातक साबित हुए, लेकिन IVRI के शोध से उम्मीद की किरण जगी है।”

🌱 सरकार की जनहितकारी योजनाएं भी समारोह में बनी चर्चा का विषय

सरकार ने इस अवसर पर ‘राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य मिशन’, ‘राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम’ और ‘पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड’ जैसी योजनाओं की जानकारी छात्रों को दी, ताकि वे गांवों में जाकर लोगों को जागरूक कर सकें। प्रधानमंत्री का सपना है – “हर खेत तक विज्ञान पहुंचे, हर घर तक जागरूकता”

🔐 सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व, हर मोर्चे पर तैनात था प्रशासन

पूरे आयोजन के लिए 1000+ पुलिसकर्मी, बम निरोधक दस्ते, सीसीटीवी निगरानी और ट्रैफिक के विशेष इंतज़ाम किए गए। पूरे परिसर को ‘नो-ड्रोन’ और ‘नो मोबाइल जोन’ घोषित किया गया था।

📣 राष्ट्रपति के जाने के बाद भी शहर में गूंजता रहा दीक्षांत समारोह का नाम

बरेली के लोगों ने इस आयोजन को अपने जीवन का गौरवपूर्ण पल बताया। दुकानों, चौराहों, चाय की दुकानों और गांव की चौपालों तक इस भव्य आयोजन की चर्चा बनी रही। छात्रों ने कहा,

“यह केवल दीक्षांत नहीं, बल्कि हमें देशसेवा की नई जिम्मेदारी सौंपे जाने का दिन है।”

✍️  दीक्षांत समारोह से निकला राष्ट्र निर्माण का संदेश

IVRI का यह आयोजन केवल एक शिक्षण संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और नैतिक शक्ति का प्रतीक बनकर उभरा। जब राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और राज्यपाल जैसे शीर्ष नेता एक साथ मंच पर छात्रों से संवाद करें, तो साफ होता है – सरकार का लक्ष्य सिर्फ डिग्री बांटना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण का वाहक बनाना है।

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