🚨 बिखरी लाशें, बहा खून! कब थमेगी सड़क पर मौत— एक झकझोर देने वाली सुबह
पीलीभीत ज़िले में शुक्रवार सुबह बीसलपुर हाईवे पर सिमरा अकबरगंज टोल प्लाज़ा के पास एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ। एसएसबी जवान वीरपाल और उनके बेटे सुमित को तेज़ रफ्तार ट्रक ने पीछे से ज़ोरदार टक्कर मारी। हादसा इतना भयानक था कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों के शव कई मीटर तक सड़क पर बिखर गए।
वीरपाल, जो पीलीभीत में एसएसबी में तैनात थे, अपने 15 वर्षीय बेटे सुमित के साथ ड्यूटी पर जाने के लिए निकले थे। सुमित उन्हें शेरगंज हॉल्ट तक छोड़ने आया था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।
🛑 बर्बादी की तेज़ रफ्तार: ट्रक चालक फरार, पुलिस जांच में जुटी
हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंच कर शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि उस वहशी ट्रक ड्राइवर की पहचान हो सके जिसने दो जिंदगियां खत्म कर दीं।
इस घटना के बाद गांव परसिया में मातम का सन्नाटा है, जहां वीरपाल अपने परिवार के साथ रहते थे। पूरे गांव में यह शोक की लहर बनकर दौड़ गई है।
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👨👦 एक पिता, जो देश के लिए खड़ा था… और एक बेटा, जिसकी आंखों में सपने थे
वीरपाल केवल एक जवान नहीं थे — वो एक पिता, एक बेटा और एक परिवार का सहारा थे। उनका बेटा सुमित महज़ 15 साल का था, स्कूल जाता था और अपने पिता को हमेशा सलाम करता था। पिता को ड्यूटी के लिए रवाना करना उसका रोज़ का काम था। लेकिन आज उस बेटे ने अपने ही पिता की लाश देखी — और खुद की ज़िंदगी भी गंवा दी।
🕯️ यह सिर्फ एक हादसा नहीं… एक सपना टूटने की कहानी है
बिखरी लाशें, बहा खून! कब थमेगी सड़क पर मौत: यह हादसा उस बेटे के सपनों का अंत था जो हर रोज़ अपने पिता को गर्व से ड्यूटी पर छोड़ने जाता था। यह उस पिता का अंत था जिसने देश की सेवा में खुद को समर्पित कर रखा था। वीरपाल और सुमित की कहानी सिर्फ खून से नहीं, भावनाओं से लिखी गई है — जिसमें हर बूंद में एक अधूरी जिम्मेदारी, एक अधूरी हँसी, और एक अधूरा भविष्य दफन है। ये सड़क पर बिखरा खून, दरअसल उस भरोसे की मौत है जिसे हम सिस्टम से रखते हैं। यह सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, बल्कि दो जिंदगियों की नृशंस हत्या है — जिसे तेज़ रफ्तार ने कुचल दिया और व्यवस्था ने अनदेखा कर दिया।
🧨 सिस्टम पर सवाल, सड़क पर मौत — कब थमेगा ये सिलसिला?
क्या ये सिर्फ एक दुर्घटना थी? या फिर सिस्टम की नाकामी? हर सप्ताह हाईवे पर तेज़ रफ्तार ट्रक जान ले रहे हैं। इस बार एक फौजी और उसका मासूम बेटा चला गया। कब लगेगा ट्रकों पर लगाम? कब जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी?
📢 रॉकेट पोस्ट का सवाल — “क्या एक जवान की जान इतनी सस्ती है?”
रॉकेट पोस्ट पूछता है — क्या एक वर्दीधारी की जान यूं ही सड़क पर बहा दी जाएगी? क्या एक बेटे की चिता के साथ उसके सारे सपने भी जला दिए जाएंगे? देश की सुरक्षा के लिए तैनात जवानों की सुरक्षा आखिर सड़क पर क्यों नहीं होती?