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हादसा या हकीकत?ग्रेटर नोएडा में पानी-पानी प्रशासन की लाचारी!

हादसा या हकीकत?, ग्रेटर नोएडा में मानसून से पहले ही बर्बादी का मंज़र, जलभराव से मरीज वाली एंबुलेंस हुई खराब – धक्के से अस्पताल पहुंची जि़ंदगी

तिलपता-दादरी नोएडा रोड पर जलभराव से मची अफरा-तफरी, मरीज की जान बाल-बाल बची

ग्रेटर नोएडा की स्मार्ट सिटी की असलियत एक बार फिर पानी में बहती नज़र आई जब तिलपता-दादरी मुख्य मार्ग पर मानसून की शुरुआती बारिश में ही सड़क तालाब बन गई। इस जलजमाव का खामियाजा एक मासूम मरीज को भुगतना पड़ा, जो एंबुलेंस में अस्पताल ले जाया जा रहा था। एंबुलेंस रास्ते में पानी भरने के कारण बंद हो गई और मरीज की जान खतरे में पड़ गई। स्थानीय लोगों ने धक्का मारकर किसी तरह एंबुलेंस को सड़क किनारे किया और फिर उसे अस्पताल पहुंचाया गया।

हादसा या हकीकत?,  नगर निगम और प्राधिकरण की खुली पोल – पानी निकासी का कोई इंतजाम नहीं!

इस घटना ने नगर निगम और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ज़िम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब अभी केवल मानसून की दस्तक हुई है और शहर की मुख्य सड़कों पर ही पानी भरने लगा है, तो ज़रा सोचिए कि जब मूसलाधार बारिश होगी तब क्या हालात होंगे? सड़कों पर न तो जलनिकासी की उचित व्यवस्था है और न ही कोई इमरजेंसी प्लान। यह पूरी तरह प्रशासनिक असफलता है।

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 कैब नहीं आती, काम पर जाना मुश्किल – खासकर लड़कियों के लिए बन रहा खतरा

नोएडा देश की उन प्रमुख जगहों में से एक है जहां 24 घंटे कॉरपोरेट कामकाज चलता है। लाखों लोग, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां शामिल हैं, रोज़ाना ऑफिस आने-जाने के लिए कैब और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर रहती हैं। जलभराव के कारण सड़कों पर कैब नहीं पहुंचती, जिससे महिलाएं घंटों फंसी रहती हैं। इससे ना सिर्फ उनके काम पर असर पड़ता है, बल्कि उनकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है। क्या प्रशासन को इसका एहसास नहीं?

हादसा या हकीकत?, वायरल हुआ वीडियो, लेकिन क्या जागेगा प्रशासन?

यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या अब भी नगर निगम और प्राधिकरण की आंख खुलेगी? क्या इस वीडियो को देखकर ज़िम्मेदार अधिकारी अपनी नींद से जागेंगे? जनता को अब जवाब चाहिए।

 क्या यह संवेदनहीनता नहीं है?

जब एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं ही सड़कों पर नहीं चल पा रही हैं, तो इसका मतलब है कि जनता भगवान भरोसे है। क्या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं कि शहर की मुख्य सड़कों पर जलनिकासी का पुख्ता इंतज़ाम करे? क्या किसी वीआईपी की एंबुलेंस होती, तो भी यही हाल होता?

हादसा या हकीकत?, रॉकेट पोस्ट लाइव पूछता है?

  • मानसून से पहले जलनिकासी की क्या व्यवस्था थी?

  • क्या नगर निगम ने कोई तैयारी की थी या सब कुछ भगवान भरोसे है?

  • जलभराव में फंसी एंबुलेंस में सवार मरीज की जान चली जाती तो कौन ज़िम्मेदार होता?

  • क्या प्रशासन को तब होश आएगा जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाएगी?

जनता से अपील

 अब चुप मत रहिए। अपने क्षेत्र की ऐसी लापरवाही को उजागर करिए। वीडियो बनाइए, प्रशासन को टैग करिए और अपनी आवाज़ बुलंद करिए।
 इस खबर को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए ताकि जिम्मेदार अफसरों की कुर्सी हिल सके।

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