“दिल्ली के होटल में छिपा ठगी का बादशाह – STF और पीलीभीत पुलिस ने रिसेप्शन से दबोच लिया 50 हजार का इनामी मास्टरमाइंड, कबूतरबाज़ी रैकेट का काला सच बेनकाब!”
पीलीभीत पुलिस ने एक ऐसी कामयाबी हासिल की है, जिसने लोगों की नींद उड़ा दी। अमरिया थाना क्षेत्र के गांव पिंजरा बमनपुरा का कुख्यात ठग मनोज कुमार भारती, जो खुद को कभी मुकेश तो कभी अन्य नामों से पहचान बदलकर छिपा रहा था, आखिरकार दिल्ली के उत्तमनगर स्थित ‘त्वमेव पंखा’ होटल के रिसेप्शन से दबोच लिया गया।
यह वही शातिर ठग है, जो विदेश भेजने और नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी कर महीनों से फरार था। पीलीभीत और आसपास के जिलों के लोगों से मोटी रकम ऐंठने वाला यह अपराधी पुलिस की आंखों में धूल झोंककर कभी लखनऊ, कभी अन्य शहरों और अंत में दिल्ली में गुमनाम जिंदगी जी रहा था।
बरेली डीआईजी ने घोषित किया था 50 हजार का इनाम
मनोज पर पीलीभीत जिले के अलग-अलग थानों में 5 बड़े ठगी के मुकदमे दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए बरेली डीआईजी ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
मुखबिर से मिली पुख्ता जानकारी पर पीलीभीत की अमरिया पुलिस और बरेली एसटीएफ की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे दबोच लिया। दबिश इतनी तेज़ और सटीक थी कि आरोपी रिसेप्शन काउंटर से भागने का मौका भी नहीं पा सका।
पहले बना ‘मुकेश’, फिर टूटा ढोंग – सच उगलवाया गया
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उससे पूछताछ की, तो शुरुआत में उसने अपना नाम मुकेश बताया।
लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे यह ढोंग ज्यादा देर नहीं चल सका और आखिरकार उसने कबूल किया कि वह मनोज कुमार भारती है, वही इनामी अपराधी, जिसकी तलाश महीनों से जारी थी।
कबूतरबाज़ी के नाम पर उजड़े कई परिवार
मनोज ने विदेश भेजने और सरकारी-प्राइवेट नौकरी लगवाने का झांसा देकर कई परिवारों से लाखों रुपये ऐंठे।
कई पीड़ित परिवार आज भी अपनी जमा-पूंजी गंवाकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी ने पीड़ितों को राहत की सांस दी है।
पुलिस ने ठगी का खेल किया बेनकाब, आरोपी जेल भेजा गया
अमरिया पुलिस और बरेली एसटीएफ की संयुक्त टीम की इस बड़ी सफलता ने पीलीभीत जिले में कबूतरबाज़ी और फर्जी रोजगार रैकेट के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया है।
आरोपी मनोज कुमार का चालान न्यायालय भेजा गया है और पुलिस अब उसके नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की तैयारी में है।
विक्रम दहिया, एएसपी पीलीभीत ने बताया
यह गिरफ्तारी जिले में सक्रिय ठगी और कबूतरबाज़ी के रैकेट को तोड़ने में अहम कदम है। आरोपी के बाकी नेटवर्क की जांच जारी है।
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