इटावा के स्कूल में प्रधानाध्यापक की बर्बरता से सहमी छात्रा, BSA ने तत्काल किया सस्पेंड – पूरे जिले में मचा हड़कंप!
Etawah: शिक्षा का मंदिर बना अत्याचार की जगह!
इटावा जनपद में एक प्रधानाध्यापक ने तालिबानी तरीके से छात्र को दी क्रूर सजा, छात्रा के मुंह में जबरन ठूंसा गया गुटखा और बीड़ी – शिक्षकों की गरिमा को किया शर्मसार
इटावा जिले के उसराहा क्षेत्र के नगला गंगे गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में जो कुछ हुआ, उसने पूरे जनपद को झकझोर कर रख दिया। बच्चों को पढ़ाने वाले एक प्रधानाध्यापक ने जिस हैवानियत का प्रदर्शन किया, उसने “गुरु” शब्द को शर्मिंदा कर दिया। स्कूल के ही एक छात्र और कई छात्राओं ने प्रधानाध्यापक सुनील कुमार के खिलाफ अत्याचार, दुर्व्यवहार और अश्लीलता जैसे संगीन आरोप लगाए हैं।

Etawah: पानी मांगने पर टूट पड़ा राक्षसी गुस्सा
कक्षा 9 के छात्र शिवा ने किया खुलासा – “सिर्फ पानी मांगने पर मुझे बेरहमी से पीटा, नाखून से चेहरा नोंचा और फिर जबरन मुंह में ठूंसा गुटखा और बीड़ी”
छात्र शिवा ने बताया कि बुधवार को उसने प्रधानाध्यापक से केवल पानी पीने की अनुमति मांगी थी, जो उसे भारी पड़ गई। सुनील कुमार गुस्से से आगबबूला हो उठे और उसकी पिटाई शुरू कर दी। शिवा के चेहरे पर नाखून से हमला किया गया, आंखों में मारा गया और जब वह बेहोश हो गया तो उसके मुंह में बीड़ी और गुटखा जबरन डाल दिया गया। जैसे-तैसे शिवा ने स्कूल की बाउंड्री फांदकर जान बचाई और गांववालों को घटना की जानकारी दी।
Etawah: छात्राओं के साथ भी बुरा व्यवहार – कराया नृत्य!
स्कूल की छात्राओं का आरोप – “कमरे में ले जाकर कराते थे डांस, बर्ताव में थी अश्लीलता”
स्कूल में पढ़ने वाली कुछ छात्राओं ने खुलकर बताया कि सुनील कुमार न सिर्फ लड़कों के साथ बर्बरता करते हैं बल्कि लड़कियों के साथ भी अनुचित व्यवहार करते हैं। वे छात्राओं को कमरे में ले जाकर नाचने के लिए मजबूर करते थे। यह आरोप सुनते ही पूरा गांव सन्न रह गया।
बेल्ट लेकर पहुंचा था प्रधानाध्यापक – ग्रामीणों को दी धमकी
जब पीड़ित छात्र शिवा गांव पहुंचा और लोगों को आपबीती सुनाई, तो गांव के लोग स्कूल पहुंचे। वहां देखा कि प्रधानाध्यापक बेल्ट लेकर खड़ा था और ग्रामीणों को धमकी दे रहा था कि “जिसने भी कुछ कहा, उसे पीट दूंगा।” प्रधानाध्यापक की दबंगई इस कदर थी कि उसे किसी कानून या प्रशासन का कोई भय नहीं था।
बीएसए ने तुरंत की कार्रवाई, पुलिस हिरासत में प्रधानाध्यापक
जैसे ही मामला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश कुमार तक पहुंचा, उन्होंने संज्ञान लेते हुए तत्काल सुनील कुमार को निलंबित कर दिया। डॉ. कुमार ने मीडिया से कहा कि –
“ग्रामीणों की शिकायतें गंभीर हैं, आरोपी को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। जांच टीम गठित कर दी गई है और दोष सिद्ध होने पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”
इस बीच पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और आरोपी प्रधानाध्यापक को हिरासत में ले लिया गया है।
क्या शिक्षा विभाग में छुपे हैं और भी ऐसे हैवान?
इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है –
क्या ऐसे लोग स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लायक हैं?
क्या जिला प्रशासन स्कूलों में मनोवैज्ञानिक और नैतिक जांच करेगा?
क्या छात्राओं की सुरक्षा अब शिक्षकों से भी खतरे में है?
इस खबर से जुड़े जरूरी सवाल:
क्या सिर्फ निलंबन ही काफी है या ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जरूरत है?
क्या स्कूलों में महिला कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति होनी चाहिए?
क्या बच्चों को स्कूलों में सुरक्षा देने का भरोसा शिक्षा विभाग दे सकता है?
यह सिर्फ एक मामला नहीं, शिक्षा तंत्र में छुपी उस दरार की झलक है, जो कब फटकर तबाही मचा दे — कहा नहीं जा सकता। जब शिक्षक हैवान बन जाए, तो बच्चों की मासूमियत की रक्षा कौन करेगा?
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