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पीलीभीत न्यूज़: मासूम अब्बास को RBSK योजना के तहत जन्मजात कटे होंठ का मुफ्त ऑपरेशन। सरकारी पहल से लौटी मुस्कान, गरीब परिवार को मिली नई उम्मीद।

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पीलीभीत में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत 86 शिक्षकों को हेल्थ कार्ड वितरित। मिलेगा कैशलेस इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा।

शिक्षकों के स्वास्थ्य सुरक्षा कवच को मिली नई ताकत: पीलीभीत में ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ का शुभारंभ, 86 शिक्षकों…

पीलीभीत को कृषि निर्यात हब बनाने की बड़ी पहल। 27 परियोजनाओं का लोकार्पण, हाईटेक नर्सरी, आधुनिक मंडियां, खेती और किसानों को नई सौगात।

पीलीभीत को मिला कृषि विकास का नया विजन: हाईटेक नर्सरी, एक्सपोर्ट सेंटर और आधुनिक मंडियों से किसानों की बदलेगी तस्वीर…

पीलीभीत, पूरनपुर तराई क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी। 26 जुलाई से कासगंज–ऐशबाग एक्सप्रेस शुरू होगी, यात्रियों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी सुविधा।

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PILIBHIT: बच्चा मरा, मां तड़पी रही – अस्पताल ने कहा, पहले बिल भरो!

हे भगवान! डिलीवरी के बाद नवजात की मौत, फिर भी नहीं दी छुट्टी – पीलीभीत के राजेश्वरी अस्पताल पर परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप!

हमारे बच्चे की मौत हुई, फिर भी छुट्टी नहीं दी, ऊपर से पैसों का दबाव बना रहे हैं!” – फूट-फूटकर बोले मेवाराम

पीलीभीत | बीसलपुर
जिले के बीसलपुर कोतवाली क्षेत्र स्थित राजेश्वरी अस्पताल में एक नवजात की मौत के बाद हंगामा मच गया है। मृतक बच्चे के पिता मेवाराम ने अस्पताल प्रबंधन पर घोर लापरवाही और पैसों के लिए दबाव डालने का सीधा आरोप लगाया है।

परिजनों का कहना है कि डिलीवरी के बाद उनके बच्चे की मौत हो गई, लेकिन अस्पताल वाले न तो उन्हें डिस्चार्ज कर रहे हैं, और न ही बिल में कोई रियायत दी जा रही है। उल्टा पैसे दो, नहीं तो छुट्टी नहीं मिलेगी, ऐसा कहकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

अस्पतालों का खेल या मौत का व्यापार?

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर जिले में फर्जी और अवैध अस्पतालों की पोल खोल दी है।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पीलीभीत जिले में स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से कई फर्जी अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं।

इनमें अनट्रेंड और अनुभवहीन युवतियों से डिलीवरी करवाई जाती है, जिससे मरीजों और नवजातों की जान से खुलेआम खिलवाड़ किया जाता है।

आशा कार्यकर्ताओं की दलाली भी आई सामने

सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि
सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) में तैनात आशा कार्यकर्ता, गरीब और अनपढ़ प्रसूताओं को कमीशन के लिए प्राइवेट अस्पतालों में भेज देती हैं।

यह पूरा नेटवर्क प्राइवेट अस्पतालों से मोटी दलाली लेकर काम करता है।

सरकारी अस्पताल में मुफ्त सेवा मिलने के बावजूद गरीब महिलाएं झांसे में आकर फर्जी अस्पतालों में पहुंच जाती हैं, जहां उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है।

हमने थाने में तहरीर दी है, हमारा बच्चा मर गया और ये छुट्टी नहीं दे रहे 

पीड़ित परिजन मेवाराम ने  बताया –

हमारे बच्चे की मौत अस्पताल में डिलीवरी के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से हुई। अब ये न तो हमें छुट्टी दे रहे हैं, न बच्चा दे रहे हैं, और ऊपर से बिल का दबाव बना रहे हैं। हमने बीसलपुर कोतवाली में लिखित शिकायत दे दी है। हमें न्याय चाहिए।

अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पर है बारी

पुलिस से मांग की जा रही है कि राजेश्वरी अस्पताल की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी चाहिए कि इन फर्जी अस्पतालों पर सख्ती से रोक लगाए और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

 कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?

क्या गरीबों की जान इतनी सस्ती है?
क्या सरकारी अस्पतालों से प्राइवेट दलालों की गठजोड़ को तोड़ा जाएगा?
क्यों स्वास्थ्य महकमा आंखें बंद करके मौत के सौदागरों को खुला छोड़ रहा है?

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