From Fort to Freedom: झांसी किले पर लहराया तिरंगा, शौर्य-बलिदान और देशभक्ति का अद्भुत संगम
झांसी – स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर झांसी का ऐतिहासिक किला एक बार फिर देशभक्ति के रंग में रंग गया। जहां कभी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ तलवार खींचकर महारानी लक्ष्मीबाई ने अपनी वीरता का परिचय दिया था, वहीं आज उसी किले की प्राचीरों पर तिरंगा फहराकर स्वतंत्र भारत की गौरवगाथा का उद्घोष किया गया। सुबह से ही किले का वातावरण जोश, गर्व और देशभक्ति से गूंज उठा।
From Fort to Freedom: जहां गूंजी थी ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी’ की गर्जना
झांसी का किला भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अमर गाथा है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महारानी लक्ष्मीबाई ने इसी किले से अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध का नेतृत्व किया था। उनकी तलवार की चमक और साहस की गर्जना—“मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी”—आज भी यहां की हवाओं में महसूस की जा सकती है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब तिरंगा झंडा इन प्राचीरों पर लहराया, तो मानो इतिहास के वो स्वर्णिम पन्ने फिर से जीवंत हो उठे।
From Fort to Freedom: जिलाधिकारी ने किया ध्वजारोहण
ध्वजारोहण समारोह में जिलाधिकारी मृदुल चौधरी ने तिरंगा फहराया। उनके साथ जिले के गणमान्य नागरिक, प्रशासनिक अधिकारी और सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे। जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें उन वीर सपूतों के बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि हम सभी को मिलकर देश के विकास में योगदान देना चाहिए।
झांसी किला: शौर्य और संघर्ष का प्रतीक
झांसी किला न केवल एक स्थापत्य चमत्कार है, बल्कि यह साहस, बलिदान और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक भी है। 17वीं शताब्दी में ओरछा के राजा वीर सिंह जूदेव द्वारा निर्मित यह किला 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ सबसे बड़े युद्ध का साक्षी बना। जब-जब तिरंगा यहां लहराता है, तब-तब यह उन सभी शहीदों को नमन करता है जिन्होंने यहां से आजादी की मशाल जलाई।
From Fort to Freedom: शहर में देशभक्ति का जश्न
झांसी किले के अलावा जिले के अन्य स्थानों पर भी स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। रेलवे कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय, पुलिस लाइन, भारत सरकार और प्रदेश सरकार के दफ्तरों में तिरंगा फहराया गया। विद्यालयों में भी बच्चों ने देशभक्ति गीत, नाटक और कविताओं के माध्यम से इस दिन की महिमा को जीवंत किया। हर जगह तिरंगे के साथ गूंजते देशभक्ति के नारों ने माहौल को और भी गरिमामयी बना दिया।
आज का संदेश: बलिदानों को न भूलें
स्वतंत्रता दिवस केवल जश्न का दिन नहीं, बल्कि यह हमें उन महान बलिदानों की याद दिलाता है जिनकी बदौलत आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं। महारानी लक्ष्मीबाई से लेकर अनगिनत ज्ञात-अज्ञात सेनानियों ने जिस साहस और अदम्य इच्छाशक्ति से आजादी की लड़ाई लड़ी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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