Bareilly Tension High:बरेली का चादर जुलूस विवाद, आस्था की आड़ में नई परंपरा थोपने की साज़िश या पुराने-नए प्रधान की रंजिश ?
बरेली के थाना इज्जतनगर क्षेत्र में स्थित खजुरिया और रहपुरा गांवों में आला हजरत उर्स के दौरान चादर का जुलूस निकाले जाने पर भारी बवाल मच गया। यह घटना न केवल गांव की शांति व्यवस्था को तोड़ गई, बल्कि प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गहरे सवाल खड़े कर गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यह नई परंपरा जबरन थोपी जा रही है। मामला इतना बढ़ा कि ग्रामीणों ने सड़कों पर नारेबाजी शुरू कर दी और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
Bareilly Tension High: वायरल वीडियो ने खोली सच्चाई
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने इस घटना को और भी सनसनीखेज बना दिया। वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि ग्रामीण पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए “वर्दी उतारो” जैसी धमकी भरी बातें कर रहे हैं। कई वीडियो में पुलिसकर्मी भीड़ के गुस्से से बचने के लिए भागते नजर आ रहे हैं। लोग इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने खुलकर पुलिस प्रशासन को भ्रष्ट और बिकाऊ करार देते हुए “पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद” के नारे लगाए। इस वायरल वीडियो ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीणों और पुलिस के बीच भरोसे की खाई बेहद गहरी हो चुकी है।
Bareilly Tension High: पुलिस की खामोशी और बेबसी
घटना के दौरान पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने स्थिति को संभालने की बजाय चुपचाप ग्रामीणों के आरोप और अपमान सहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस पैसे लेकर और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से इस जुलूस को निकालने की अनुमति दे रही है। यही नहीं, आरोप है कि पुलिस ने विरोध करने वाले एक समुदाय के कुछ लोगों पर लाठियां भी चलाईं, जिससे आक्रोश और भड़क गया। सवाल यह उठता है कि पुलिस आखिर चुप क्यों रही?
Bareilly Tension High: वर्तमान प्रधान बनाम पूर्व प्रधान के बीच राजनीतिक रंजिश
एसपी सिटी मानुष पारीक ने साफ किया कि इस पूरे विवाद के पीछे वर्तमान प्रधान और पूर्व प्रधान की आपसी कटुता भी बड़ी वजह है। दरअसल, दोनों अलग-अलग समुदायों से आते हैं और गांव की राजनीति में वर्चस्व की लड़ाई लंबे समय से जारी है। यही कारण है कि जुलूस के दौरान विवाद को बढ़ाने की कोशिश की गई। इस आपसी टकराव ने धार्मिक भावना को हवा दी और गांव में तनाव फैल गया।
नई परंपरा की शुरुआत पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह का चादर जुलूस गांव से निकालने की परंपरा पहले कभी नहीं रही। अचानक इस नई परंपरा को जन्म क्यों दिया गया? क्या यह सिर्फ धार्मिक आस्था के नाम पर वोट बैंक मजबूत करने की राजनीति थी? या फिर सचमुच किसी गहरी साजिश के तहत गांव का माहौल बिगाड़ने की कोशिश? कई ग्रामीणों का मानना है कि यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया गया ताकि समुदायों के बीच टकराव बढ़े और प्रशासन पर दबाव बने।
आक्रोश क्यों भड़का इतना?
लोग इतने गुस्से में क्यों आ गए कि उन्होंने पुलिस को ही निशाने पर ले लिया? वजहें यह बताई जा रहीं हैं —
पुलिस पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप
ग्राम प्रधान की कथित मिलीभगत
नई परंपरा थोपने की कोशिश
विरोध करने पर एक समुदाय के लोगों की पिटाई
इन सबने मिलकर आग में घी का काम किया। ग्रामीणों का गुस्सा इस हद तक पहुंच गया कि वे पुलिस की वर्दी उतारने तक की बात कहने लगे।
Bareilly Tension High: क्या ये सुनियोजित साजिश थी?
घटना के कई पहलुओं को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि मामला केवल धार्मिक जुलूस का नहीं था। इसमें सियासत, प्रधानों की लड़ाई और सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने की चाल साफ दिखाई देती है। नई परंपरा का जन्म किसी गहरी रणनीति का हिस्सा लगता है, जिसमें प्रशासन की चुप्पी और पुलिस की लाचारी ने आग को और भड़काने का काम किया।
प्रशासन की सफाई बनाम जनता का आक्रोश
एसपी सिटी ने बयान दिया कि जुलूस पहले से लिखित समझौते के आधार पर निकाला जा रहा था और विवाद चादर खोलने की जगह को लेकर हुआ। लेकिन सवाल उठता है कि अगर सब कुछ लिखित सहमति से था, तो ग्रामीण इतने आक्रोशित क्यों हुए? क्या वाकई यह केवल गलतफहमी थी या फिर जनता का विश्वास प्रशासन से पूरी तरह नहीं था ?
Bareilly Tension High: शांति की जमीन पर राजनीति का खेल
बरेली की यह घटना केवल एक जुलूस या धार्मिक विवाद नहीं है। यह उस गहरी सच्चाई को उजागर करती है कि किस तरह सत्ता, राजनीति और प्रशासन की कमजोरियों के चलते गांव की शांति बार-बार दांव पर लग जाती है। वर्तमान और पूर्व प्रधान की आपसी दुश्मनी, नई परंपरा थोपने की कोशिश ने इस घटना को और भी खतरनाक बना दिया।