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देखिए तीन दशक बाद मिला मेहनत का हक, DM की पहल से सुदामा प्रसाद को मिला जीपीएफ भुगतान प्राप्त

कानपुर: लगभग तीन दशक की लगातार कोशिशों और धैर्य के बाद सेवानिवृत्त संग्रह सेवक सुदामा प्रसाद को अंततः अपनी मेहनत की कमाई मिल गई। वर्ष 1996 से लंबित सामान्य भविष्य निधि (GPF) भुगतान को लेकर वे लगातार विभिन्न विभागों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन समाधान नहीं हो सका।

हालांकि जब इस मामले की जानकारी जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह को हुई, तो उन्होंने तुरंत गंभीरता से संज्ञान लेते हुए फाइलों की जांच और रिकॉर्ड तलब किए। इसके बाद लगातार की गई निगरानी और निर्देशों के परिणामस्वरूप 18 अगस्त को ब्याज सहित 3,07,000 रुपये की राशि सुदामा प्रसाद के खाते में भेज दी गई।

जनता दर्शन में रखी अपनी व्यथा

फरवरी की एक सुबह जनता दर्शन में 89 वर्षीय सुदामा प्रसाद ने जिलाधिकारी के सामने अपनी पूरी बात रखी। साधारण पैंट-शर्ट में, हाथों में पुरानी फाइल थामे उन्होंने बताया कि वे वर्ष 1996 से अपनी GPF प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

अभिलेखों में छूटा एक तथ्य बना देरी का कारण

जांच के दौरान पाया गया कि परिवार न्यायालय, बांदा के एक आदेश का उल्लेख अभिलेखों में दर्ज नहीं था। आदेश के अनुसार, सुदामा को अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता देना था, किंतु 1995 में उनकी पत्नी का निधन हो चुका था। यह तथ्य रिकॉर्ड में न जुड़ पाने से भुगतान वर्षों तक स्थगित रहा।

डीएम की सक्रिय पहल लाई समाधान

जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित रिकॉर्ड मंगाए गए और कोषाधिकारी ने यह रिपोर्ट दी कि ब्याज सहित पूरा भुगतान अनुमन्य है। सामान्य भविष्य निधि नियमावली 1985 के तहत आदेश जारी किए गए और डीएम स्वयं प्रगति की निगरानी करते रहे। परिणामस्वरूप, लगभग तीस वर्षों बाद सुदामा प्रसाद को उनकी मेहनत की राशि मिल सकी।

आँखे हो गईं थी नम 

राशि खाते में आने की सूचना मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं और उन्होंने कहा, *“देर है पर अंधेर नहीं”।* उनके अनुसार, यह रकम केवल पैसा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और विश्वास की वापसी है।