राष्ट्रीय योग अवार्ड 2025: भारतीय योग संस्थान को मिला सर्वोच्च सम्मान — PM मोदी के हाथों सम्मानित होकर देशभर में प्रेरणा की लहर
नई दिल्ली: आज 19 दिसंबर 2025 को भारतीय योग के इतिहास में एक गौरवशाली और प्रेरणादायक अध्याय जुड़ गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित द्वितीय ग्लोबल समिट के समापन अवसर पर राष्ट्रीय योग अवार्ड 2025 से भारतीय योग संस्थान को सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार प्रत्यक्षतः भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भारत मंडपम, नई दिल्ली में प्रदान किया गया, जो योग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता का प्रतीक बन गया है।
योग आज सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानव जीवन की समग्र स्वास्थ्य-जीवनशैली, मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सामाजिक सौहार्द का माध्यम बन गया है। ऐसे में भारतीय योग संस्थान को यह सर्वोच्च सम्मान मिलना न केवल संस्थान की प्रतिष्ठा है, बल्कि समस्त योग साधकों, अध्येताओं और योग के सिद्धांतों के प्रति समर्पित लाखों लोगों के लिए गर्व का क्षण है।
समग्र स्वास्थ्य के लिए योग — भारत की विश्वमंच पर दृढ़ परंपरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि योग भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ विधा है जिसने न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में करोड़ों जीवनों में स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतुलन की नींव डाली है। योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन को स्वस्थ, शांत और संतुलित बनाने का समग्र विज्ञान है।
उन्होंने विशेष रूप से कहा—
“योग वह अमूल्य विरासत है, जिसने भारत को विश्व के स्वास्थ्य मानचित्र पर एक अलग पहचान दी है। आज जहां आधुनिक जीवन के कारण तनाव, अवसाद और जीवनशैली रोगों में वृद्धि हो रही है, वहाँ योग की प्राचीन विधियाँ मानवता के लिए एक बेहतरीन समाधान प्रस्तुत करती हैं। भारत योग की सदियों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर इंसान को स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन की संतुलना प्रदान कर रहा है।”
प्रधानमंत्री मोदी के इन शब्दों ने यह स्पष्ट कर दिया कि योग न केवल स्वास्थ्य को मजबूत करता है, बल्कि भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को भी ऊपर उठाता है।
भारतीय योग संस्थान — निष्काम भावना, अटूट समर्पण और वैश्विक मंच पर पहचान
भारतीय योग संस्थान की यह उपलब्धि उनके सभी कार्यकर्ताओं, अधिकारियों, प्रशिक्षकों और साधकों की निष्काम सेवा का प्रतिफल है। वर्षों से यह संस्थान योग के प्रचार-प्रसार, प्रशिक्षण, अनुसंधान और स्वस्थ जीवनशैली को जन-जन तक पहुँचाने का काम कर रहा है।
संस्थान के अखिल भारतीय प्रधान देशराज ने कहा—
“यह सम्मान समस्त योग साधकों की अदम्य इच्छा शक्ति और भारत माता के स्वस्थ भविष्य की कामना का परिणाम है। यह पुरस्कार केवल एक संस्था का नहीं, बल्कि योग साधना के मार्ग पर चलने वाले हर व्यक्ति का गौरव है।”
इस राष्ट्रीय सम्मान को देशभर में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले लाखों साधकों ने उत्साह और गर्व से देखा।
सरकार की गंभीर मंशा — योग को विश्व स्वास्थ्य का स्तंभ बनाना
आयुष मंत्रालय और WHO के संयुक्त प्रयास से आयोजित यह ग्लोबल समिट इस बात का प्रतीक है कि भारत न केवल योग के गौरव को संभाले हुए है, बल्कि इसे वैश्विक स्वास्थ्य एवं कल्याण की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में आगे बढ़ा रहा है।
सरकार ने स्पष्ट कहा कि
योग को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाना ही नहीं,
बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों में भी शामिल करना है।
इस दिशा में भारतीय योग संस्थान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, जिसके कारण आज यह वैश्विक मंच पर एक प्रतिष्ठित नाम बन चुका है।
योग सिर्फ अभ्यास नहीं, जीवनशैली और सकारात्मक बदलाव
योग न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है, बल्कि
तनाव को कम करता है
मानसिक शक्ति को बढ़ाता है
जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है
भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है
और समाज में स्वस्थ, सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है
भारत जैसे विविध संस्कृति वाले देश में योग ने लोगों को जोड़कर एक अनोखी शक्ति प्रदान की है। यही कारण है कि आज योग दिवस, योग कार्यशालाएँ, और योग कार्यक्रम सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि विदेशों में भी बड़े उत्साह से मनाए जा रहे हैं।
“योग सेवा हमारा संकल्प, यह सम्मान पूरे परिवार का उत्सव” — संजय अग्रवाल
भारतीय योग संस्थान के उप प्रधान – पूर्वी उत्तर प्रदेश, संजय अग्रवाल ने राष्ट्रीय योग अवार्ड 2025 को लेकर बेहद सकारात्मक और प्रेरक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा—
“यह सम्मान केवल भारतीय योग संस्थान का नहीं, बल्कि उन लाखों साधकों और सेवादारों का है जो निष्काम भाव से योग को घर-घर पहुंचाने में लगे हुए हैं। योग हमारे लिए एक दैनिक अभ्यास भर नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का संकल्प है। आज प्रधानमंत्री जी के हाथों मिला यह पुरस्कार हम सभी के भीतर नई ऊर्जा, नया उत्साह और समाज के लिए और अधिक कार्य करने की प्रेरणा पैदा करता है। हम यह मानते हैं कि योग का प्रचार ही नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारना ही सच्ची सफलता है, और यह सम्मान उसी दिशा में किए गए अथक प्रयासों की स्वीकृति है।”
संजय अग्रवाल ने आगे कहा कि यह उपलब्धि हर उस साधक की है जिसने योग को जीवन का हिस्सा बनाया और समाज को स्वस्थ, शांत और सकारात्मक दिशा देने में योगदान दिया।
तीन दशक से योग साधना में समर्पित पीलीभीत के लोगों में खुशी—“यह पुरस्कार हमारी सामूहिक तपस्या का फल”
भारतीय योग संस्थान को राष्ट्रीय योग पुरस्कार मिलने पर पीलीभीत के वे सैकड़ों साधक भी बेहद उत्साहित हैं, जो पिछले लगभग 30 वर्षों से CA संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में निःशुल्क योग प्रशिक्षण का लाभ लेते आ रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से अनिल मैनी, सतीश शर्मा, निर्मला धमेजा, मोहित अग्रवाल, विनय आनंद, डॉ. डी. पी. त्रिपाठी, शोभित बाजपेयी, राजीव अग्रवाल सहित अनेक वरिष्ठ साधकों ने अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है।
इन सभी साधकों का कहना है कि यह पुरस्कार केवल संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की सामूहिक तपस्या, निरंतर साधना और निष्काम योग सेवा का फल है, जिन्होंने वर्षों से योग को अपने जीवन में अपनाया और समाज में स्वास्थ्य एवं संतुलन का संदेश पहुंचाया। उनका मानना है कि यह सम्मान योग की उस परंपरा को और मजबूत करेगा, जिसने पीलीभीत सहित पूरे देश में अनगिनत जीवन बदले हैं।
यह पुरस्कार सिर्फ सम्मान नहीं, प्रेरणा की मिसाल
भारतीय योग संस्थान को मिला राष्ट्रीय योग अवार्ड 2025 यह संदेश देता है कि—
योग का मार्ग केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं, बल्कि यह मानवता को जोड़ने, सकारात्मक ऊर्जा फैलाने और जीवन को सुंदर बनाने का एक सशक्त माध्यम है।
यह पुरस्कार योग के क्षेत्र में सेवा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है—
एक प्रेरणा जो हमें याद दिलाती है कि
“स्वास्थ्य, शांति और सकारात्मक जीवन की ओर योग ही सबसे सशक्त साधन है।”