India-Iran News: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक अहम बयान सामने आया है। भारत में ईरान के राजदूत Mohammad Fattahali ने कहा है कि ईरान भारत को Strait of Hormuz से सुरक्षित रास्ता देने के लिए तैयार है। यह वही समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस का व्यापार होता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस फैसले से भारत की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं में कुछ राहत मिल सकती है?
भारत के लिए ईरान का साफ संदेश
नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान मोहम्मद फतहाली से पूछा गया कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो क्या ईरान भारत को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता देगा। इस पर उन्होंने साफ कहा कि भारत हमारा दोस्त है और उसे सुरक्षित रास्ता मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से भरोसे और सहयोग का रिश्ता रहा है। इसी कारण दोनों देशों के बीच समुद्री व्यापार और ऊर्जा सप्लाई को लेकर सहयोग जारी रहेगा।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अनुमान है कि दुनिया के लगभग 20% तेल का ट्रांसपोर्ट इसी स्ट्रेट के जरिए होता है।
भारत, चीन, जापान और कई एशियाई देशों के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है, क्योंकि पश्चिम एशिया से आने वाला तेल और गैस इसी रास्ते से पहुंचता है।
क्या भारत के तेल-गैस संकट में राहत मिलेगी?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल और गैस आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर सीधे भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
ईरान द्वारा भारत को सुरक्षित रास्ता देने का संकेत मिलने से यह उम्मीद बढ़ी है कि कम से कम इस अहम समुद्री मार्ग से आने वाली भारतीय ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सुरक्षित रास्ते की घोषणा से पूरी समस्या हल नहीं होगी। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें, युद्ध की स्थिति और समुद्री सुरक्षा जैसे कई अन्य कारक भी ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित करते हैं।
जर्मनी ने क्या कहा
इसी मुद्दे पर जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने भी बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जर्मनी ईरान से जुड़े किसी संभावित युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहता।
नॉर्वे दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई कारण नहीं है कि जर्मनी होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को सैन्य सुरक्षा देने के बारे में सोचे, भले ही इस क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा हो।
भारत के लिए आगे की रणनीति क्या हो सकती है
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को सिर्फ एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाना होगा।
सरकार पहले से ही रूस, अमेरिका और अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाने की कोशिश कर रही है। साथ ही एलएनजी, नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू उत्पादन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
फिलहाल ईरान का यह भरोसा भारत के लिए सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन लंबे समय में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति जरूरी होगी।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).