मृत्युदंड: वाराणसी के चोलापुर क्षेत्र में करीब 13 साल पहले हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड में आखिरकार कोर्ट ने बड़ा फैसला सुना दिया है। एक मामूली शिकायत का बदला लेने के लिए एक ही परिवार के 4 लोगों की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी रविन्द्र उर्फ राजू को फांसी की सजा सुनाई गई है। इस फैसले के बाद पूरे गांव में उस खौफनाक घटना की यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना 29 अक्टूबर 2013 की रात की है, जब चोलापुर थाना क्षेत्र के चंदापुर गांव में एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या कर दी गई थी।
मृतकों में शामिल थे:
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मोहनलाल जायसवाल
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उनकी पत्नी झूना देवी
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बेटी पूजा
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पुत्र प्रदीप
जबकि एक अन्य सदस्य संदीप गंभीर रूप से घायल हो गया था।
मामूली शिकायत बनी हत्या की वजह
दरअसल, मोहनलाल के घर के पीछे बाग में अक्सर जुआ और शराब जैसी गतिविधियां होती थीं।
आरोपी राजू भी इसमें शामिल रहता था।
मोहनलाल ने उसकी शिकायत उसके घरवालों से कर दी।
इसी बात को आरोपी ने अपनी बेइज्जती मान लिया
और पूरे परिवार को खत्म करने की ठान ली
लोहे की रॉड से किया हमला
29 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे आरोपी राजू:
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निर्माणाधीन मकान से छत के रास्ते घर में घुसा
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सबसे पहले मोहनलाल पर हमला किया
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फिर एक-एक कर पूरे परिवार पर वार किया
प्रदीप ने बचाव की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उसे भी नहीं छोड़ा।
वारदात के बाद सबूत मिटाने की कोशिश
हत्या के बाद आरोपी ने खुद को बचाने की पूरी कोशिश की:
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छत से कूदते समय उसके पैर में चोट आई
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फिर भी वह भीड़ में शामिल हो गया
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बाद में साइकिल से घर पहुंच गया
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खून से सने कपड़े जला दिए
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2 दिन तक अस्पताल में पैर का इलाज कराया
लेकिन पुलिस जांच में उसकी साजिश पकड़ में आ गई।
कोर्ट ने कहा- यह दुर्लभतम मामला
करीब 13 साल तक चले इस केस में कोर्ट ने साफ कहा कि:
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यह कोई सामान्य अपराध नहीं था
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आरोपी ने पूरी योजना बनाकर हत्या की
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इसलिए इसे “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” (दुर्लभतम) श्रेणी में रखा गया
इसी आधार पर आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई
साथ ही जुर्माना भी लगाया गया, जो पीड़ित परिवार को दिया जाएगा।
गांव में फिर ताजा हुई दर्दनाक यादें
फैसले के बाद चंदापुर गांव में लोग एक बार फिर उस घटना को याद कर भावुक हो गए।
एक छोटी सी शिकायत ने जिस तरह पूरे परिवार को खत्म कर दिया, उसने समाज को गहरा संदेश दिया है।
न्याय में देरी, लेकिन मिला कड़ा संदेश
भले ही इस केस में फैसला आने में 13 साल लग गए, लेकिन कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए कानून सख्त है।
यह फैसला समाज में यह संदेश देता है कि योजना बनाकर की गई क्रूर हत्या का अंजाम हमेशा सख्त सजा ही होगा।