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Indian Politics: देश की विधानसभाओं में कम हुए मुस्लिम विधायक, 10 साल में 339 से घटकर रह गए 282 MLA..

Indian Politics: देश की विधानसभाओं में कम हुए मुस्लिम विधायक, 10 साल में 339 से घटकर रह गए 282 MLA..

Indian Politics: देश की राजनीति में पिछले एक दशक में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य विधानसभाओं में मुस्लिम विधायकों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2013 में देशभर की विधानसभाओं में 339 मुस्लिम विधायक थे, जो अब घटकर 282 रह गए हैं। राजनीतिक जानकार इसे BJP के बढ़ते प्रभाव, चुनावी रणनीतियों में बदलाव और विपक्षी दलों की टिकट वितरण नीति से जोड़कर देख रहे हैं। सबसे ज्यादा असर उन बड़े राज्यों में दिखा है जहां मुस्लिम आबादी अच्छी-खासी है।

यूपी में आधे से भी कम हुए मुस्लिम विधायक

सबसे बड़ा बदलाव उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। करीब 19% मुस्लिम आबादी वाले यूपी में पहले 403 सदस्यीय विधानसभा में 63 मुस्लिम विधायक थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ 31 रह गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यूपी में बदले जातीय समीकरण, BJP की मजबूत चुनावी पकड़ और विपक्ष की रणनीति ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है।

बंगाल, बिहार और राजस्थान में भी बड़ी गिरावट

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम विधायकों की संख्या 59 से घटकर 37 हो गई है। जबकि राज्य में मुसलमानों की आबादी लगभग 27% मानी जाती है। इसके बावजूद विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व अब सिर्फ 12.6% रह गया है।

बिहार में यह आंकड़ा 19 से घटकर 11 पहुंच गया है। वहीं राजस्थान में मुस्लिम विधायकों की संख्या 11 से घटकर सिर्फ 6 रह गई है।

सिर्फ BJP नहीं, लगभग सभी पार्टियों में दिखा बदलाव

यह गिरावट केवल Bharatiya Janata Party (BJP) तक सीमित नहीं है। लगभग सभी बड़े राजनीतिक दलों में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने का पैटर्न बदला है।

कई राज्यों में पार्टियों ने बेहद कम मुस्लिम उम्मीदवार उतारकर भी बड़ी चुनावी जीत हासिल की। इसके बाद अन्य दलों ने भी टिकट वितरण में जातीय और सामाजिक समीकरणों को नए तरीके से संतुलित करना शुरू किया।

बंगाल और असम में BJP ने नहीं उतारा कोई मुस्लिम उम्मीदवार

हालिया चुनावों में पश्चिम बंगाल और असम में Bharatiya Janata Party (BJP) ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा। जबकि 2021 के चुनाव में पार्टी ने बंगाल में 9 और असम में 8 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे।

असम में BJP ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा और 82 सीटों पर जीत हासिल की। इसके बाद पार्टी ने अपनी अल्पसंख्यक इकाई भी भंग कर दी।

राष्ट्रीय स्तर पर BJP के सिर्फ 2 मुस्लिम विधायक

राष्ट्रीय स्तर पर Bharatiya Janata Party (BJP) के पास इस समय केवल दो मुस्लिम विधायक हैं। इनमें मणिपुर से अचाब उद्दीन और त्रिपुरा से तफज्ज़ुल हुसैन शामिल हैं।

यह आंकड़ा देश की सबसे बड़ी पार्टी के लिहाज से काफी कम माना जा रहा है।

कई राज्यों में आबादी के मुकाबले बेहद कम प्रतिनिधित्व

आंकड़े बताते हैं कि कई राज्यों में मुस्लिम आबादी के मुकाबले विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व काफी कम है।

  • बिहार में मुस्लिम आबादी करीब 17% है, लेकिन विधानसभा में उनकी हिस्सेदारी लगभग 4.5% है।
  • असम में मुसलमान कुल आबादी का एक-तिहाई से ज्यादा हैं, लेकिन विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व करीब 17% ही है।
  • महाराष्ट्र और कर्नाटक में मुस्लिम आबादी 10% से ज्यादा होने के बावजूद विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व सिर्फ 3-4% के बीच है।

कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक

पार्टीवार आंकड़ों की बात करें तो Indian National Congress के पास सबसे ज्यादा 61 मुस्लिम विधायक हैं। इसके बाद Jammu and Kashmir National Conference के पास 39 विधायक हैं।

वहीं All India Trinamool Congress और Samajwadi Party के पास 34-34 मुस्लिम विधायक हैं।इन राज्यों में अब भी बेहतर है प्रतिनिधित्व

देश में कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां मुस्लिम प्रतिनिधित्व अब भी अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में बना हुआ है। इनमें केरल, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन राज्यों में स्थानीय राजनीतिक समीकरण, क्षेत्रीय दलों की भूमिका और सामाजिक संरचना अलग होने की वजह से मुस्लिम प्रतिनिधित्व ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ।

बदलती राजनीति का बड़ा संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि देश की बदलती चुनावी राजनीति का बड़ा संकेत भी है। अब राजनीतिक दल जातीय गठजोड़, बहुसंख्यक वोट बैंक और माइक्रो सोशल इंजीनियरिंग पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।

आने वाले चुनावों में यह देखना अहम होगा कि विपक्षी दल मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी रणनीति में कोई बड़ा बदलाव करते हैं या नहीं।