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पीलीभीत: डेढ़ साल में ध्वस्त हुई ‘चाइना मॉडल’ सड़क!, आखिर किसने डकारे 11.53 करोड़?

पीलीभीत में PMGSY की 11.20 किमी सड़क 18 माह में उखड़ी। 11.53 करोड़ की परियोजना पर सवाल, ग्रामीणों ने ठेकेदार व विभाग पर लगाए गंभीर आरोप।

053.27 लाख की लागत, 11.20 किलोमीटर लंबाई और हालत ऐसी कि राहगीर जान जोखिम में डालकर गुजरने को मजबूर

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट? ग्रामीणों ने ठेकेदार से लेकर विभाग तक पर लगाए गंभीर आरोप

पीलीभीत। चीन के सामान को लेकर एक पुरानी कहावत मशहूर है—“चली तो सौ दिन, नहीं तो एक दिन भी नहीं।” पीलीभीत में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई एक सड़क पर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती दिखाई दे रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़क महज डेढ़ साल के भीतर ही बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है कि जगह-जगह उखड़ी सड़क अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। सवाल यह है कि जब निर्माण के समय गुणवत्ता के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, तब आखिर ऐसा क्या हुआ कि पांच साल तक चलने की गारंटी वाली सड़क 18 महीने भी नहीं टिक सकी?

11 किलोमीटर सड़क पर खर्च हुए 10.53 करोड़ रुपये, लेकिन सड़क की उम्र निकली डेढ़ साल

पीलीभीत जिले में रिछोला से गजरौला वाया माला कॉलोनी मार्ग का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत कराया गया था। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार इस सड़क की कुल लंबाई 11.20 किलोमीटर है और इसके निर्माण पर 1053.27 लाख रुपये (करीब 10.53 करोड़ रुपये) खर्च किए गए। निर्माण कार्य का जिम्मा मै० इंकाह इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजीज प्रा० लि०, महिपालपुर, नई दिल्ली को दिया गया था, जबकि कार्यदायी विभाग ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) रहा।

बोर्ड पर दर्ज विवरण के मुताबिक सड़क का निर्माण कार्य 29 सितंबर 2022 को शुरू हुआ और 28 सितंबर 2023 को पूर्ण घोषित कर दिया गया। इसके बाद पांच वर्ष के अनुरक्षण की जिम्मेदारी भी ठेकेदार को सौंपी गई, जो सितंबर 2028 तक प्रभावी है। हाल ही में लगाए गए अनुरक्षण बोर्ड में अनुरक्षण अवधि 01 अक्टूबर 2024 से 30 सितंबर 2029 तक दर्शाई गई है।

निर्माण के कुछ महीने बाद ही उखड गयी सड़क, लोगों के लिए बनी मुसीबत 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों बाद डामर और सतह उखड़ने लगी थी। देखते ही देखते सड़क की हालत इतनी खराब हो गई कि करीब एक वर्ष के भीतर ही यह मार्ग बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गया। सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है और राहगीरों, ग्रामीणों तथा वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब हालत की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों और विभाग से की गई, लेकिन मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। आरोप है कि गड्ढों में मिट्टी और पत्थर डलवाकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की गई, जबकि सड़क की वास्तविक मरम्मत आज तक नहीं हुई।

ग्रामीणों का आरोप—ठेकेदार और आरईएस की मिलीभगत ने डुबोए करोड़ों रुपये

कुछ स्थानीय लोगों और राहगीरों का सीधा आरोप है कि सड़क निर्माण में भारी अनियमितताएं हुईं और ठेकेदार तथा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) की कथित मिलीभगत के कारण करोड़ों रुपये की परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि निर्माण मानकों के अनुसार हुआ था तो पांच वर्ष तक अनुरक्षण की जिम्मेदारी वाली सड़क डेढ़ साल के भीतर क्यों टूट गई? आखिर निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किसने की? और यदि सड़क खराब हो गई तो अनुरक्षण अवधि के बावजूद इसे तत्काल दुरुस्त क्यों नहीं कराया गया?

स्थानीय निवासी अबीर वाइन ने कहा –“हमें बताया गया था कि यह चाइना मॉडल सड़क है” 

स्थानीय निवासी अबीर वाइन ने बताया कि गोयल कॉलोनी से होकर गजरौला तक जाने वाली यह सड़क कई जगहों से उखड़कर ध्वस्त हो चुकी है।

“जब सड़क बन रही थी तब कुछ अधिकारी देखने आए थे, लेकिन उसके बाद आज तक कोई नहीं आया। उस समय हमें बताया गया था कि यह चाइना मॉडल सड़क बनाई जा रही है, जिसमें सूखी मिट्टी में सूखा सीमेंट मिलाकर डाला जा रहा था। अब हालत सबके सामने है। सड़क कई जगह से टूट गई है। हम चाहते हैं कि इस सड़क को दोबारा बनाया जाए।”

स्थानीय निवासी महिला कृष्ण डॉली ने बताया -“मोदी जी ऊपर से पैसा भेजते हैं, लेकिन ये लोग खा जाते हैं” 

स्थानीय महिला कृष्णा डॉली ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा,

“सड़क पूरी तरह टूट गई है। सड़क बनाने वालों और बनवाने वालों में सब घूसखोर है। सबने घूस खाई है। मोदी जी तो ऊपर से पैसा भेजते हैं, लेकिन ये लोग बीच में ही पैसा खा जाते हैं। पूरा पैसा सड़क पर लगाया ही नहीं गया, तभी सड़क इतनी जल्दी उखड़ गई। “

स्थानीय निवासी बाबूराम ने बताया “सब चोर हैं, डेढ़ साल में सड़क कैसे टूट गयी” 

ग्रामीण बाबूराम ने नाराजगी जताते हुए कहा,

“सब चोर हैं। रोड डेढ़ साल पहले बनाई गई थी और आज पूरी तरह टूट गई है। कोई अधिकारी कभी रोड देखने नहीं आया। हमारी मांग है कि इस काम में जो भी जिम्मेदार हैं, उन सबकी जांच हो और दोषियों को जेल भेजा जाए।”

 एक राहगीर ने कहा -“पांच साल की गारंटी है, फिर भी सड़क बर्बाद पड़ी है” 

सड़क से गुजरने वाले एक आइसक्रीम विक्रेता ने कहा,

“इस सड़क को बने अभी एक से डेढ़ साल ही हुआ है, लेकिन पूरी सड़क उखड़ गई है। जब सड़क बनती है तो पांच साल की गारंटी होती है। डीएम, एसडीएम और दूसरे अधिकारी भी इस सड़क से गुजरते हैं, सब इसकी हालत देखते हैं, लेकिन कोई ठीक नहीं कराता। शासन से तो पूरा पैसा आता है, लेकिन यहां काम में लगाया ही नहीं जाता। सड़क को दोबारा ठीक तरीके से बनाया जाना चाहिए, तभी यह टिक पाएगी।”

सबसे बड़ा सवाल: आखिर जिम्मेदार कौन?

जब 10.53 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क 18 महीने के भीतर उखड़ जाए, जब पांच वर्ष के अनुरक्षण की शर्तें कागजों तक सीमित रह जाएं, जब शिकायतों के बावजूद केवल मिट्टी-पत्थर डालकर खानापूर्ति की जाए, तब सवाल सिर्फ सड़क का नहीं रह जाता, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही पर खड़ा हो जाता है।

क्या निर्माण एजेंसी मै० इंकाह इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजीज प्रा० लि० से जवाब मांगा जाएगा?
क्या कार्यदायी विभाग ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) निर्माण गुणवत्ता और निगरानी में हुई कथित लापरवाही पर जवाब देगा?
क्या अनुरक्षण अवधि के भीतर सड़क को मानकों के अनुरूप दोबारा बनाया जाएगा?
या फिर करोड़ों रुपये की यह सड़क भी फाइलों में “पूर्ण” और जमीन पर “ध्वस्त” बनी रहेगी?