लखनऊ अग्निकांड: लखनऊ के कोचिंग अग्निकांड के बाद जो तस्वीरें और कहानियां सामने आ रही हैं, वे किसी का भी दिल भारी कर सकती हैं। एक तरफ धुएं और आग के बीच फंसे बच्चे जान बचाने की कोशिश कर रहे थे, दूसरी तरफ बाहर खड़े मां-बाप अपने बच्चों की एक झलक पाने के लिए दर-दर पूछ रहे थे। किसी पिता के फोन पर बेटे की आखिरी आवाज थी, तो कोई मां अपने बच्चे को ढूंढते-ढूंढते बेहोश हो गई।
“पापा… मुझे बचा लीजिए, अब मैं नहीं बच पाऊंगा”
प्रभुज्योति सिंह बताते हैं कि दोपहर करीब ढाई बजे उनके फोन की घंटी बजी। दूसरी तरफ उनका बेटा सुखमणि सिंह था। लेकिन उसकी आवाज में डर साफ महसूस हो रहा था।
रोते हुए उसने कहा, “पापा मुझे बचा लीजिए… आग पूरी बिल्डिंग में फैल चुकी है। हमने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया है। यहां भी धुआं भर रहा है। बहुत घुटन हो रही है… अब शायद मैं नहीं बच पाऊंगा।”
कुछ सेकंड बाद फोन कट गया।
प्रभुज्योति कहते हैं, “फोन कटते ही मैं घर से भागा। रास्ते में एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को कॉल करता रहा। बस यही सोच रहा था कि किसी तरह मेरा बेटा मिल जाए।”
हाथ में बेटे की तस्वीर लेकर हर किसी से पूछते रहे पिता
मौके पर पहुंचने के बाद प्रभुज्योति सिंह हाथ में मोबाइल लेकर लोगों के बीच दौड़ते रहे। हर आने-जाने वाले से बस एक ही सवाल पूछ रहे थे — “क्या आपने मेरे बेटे को देखा है?”
कभी एम्बुलेंस के पास जाते, कभी अस्पताल की तरफ भागते। आंखों में डर और उम्मीद दोनों थे। लेकिन हर बीतते मिनट के साथ चेहरे पर बेचैनी बढ़ती जा रही थी।
“कोई तो मेरे बच्चे को ढूंढ दो…” कहते-कहते बेहोश हो गई मां
इस हादसे में आदित्य श्रीवास्तव नाम का छात्र भी लापता हो गया था। बताया गया कि उसने अपने एक दोस्त को फोन कर कहा था, “मैं अंदर फंस गया हूं… मुझे यहां से निकाल लो।”
जब यह बात उसकी मां कल्पना श्रीवास्तव तक पहुंची, तो वह रोते हुए मौके पर पहुंचीं।
वह हर किसी से हाथ जोड़कर पूछ रही थीं — “कोई मेरे बच्चे को ढूंढ दो… मेरा बेटा कहां है?”
रोते-रोते वह बार-बार यही दोहरा रही थीं। कुछ देर बाद वह वहीं बेहोश हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला।
बाद में उन्होंने भारी आवाज में कहा, “जब मैं पहुंची, तब बचाव कार्य चल रहा था… मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।”
जान बचाने के लिए बच्चों ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया
आग तेजी से फैल रही थी और कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग धुएं से भर गई थी। अंदर मौजूद बच्चों को समझ नहीं आ रहा था कि बाहर कैसे निकलें।
कुछ छात्रों ने अपनी जान बचाने के लिए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। उन्हें लगा था कि शायद वहां धुआं कम पहुंचेगा और मदद आने तक वे बच जाएंगे।
लेकिन अंदर का डर लगातार बढ़ता जा रहा था।
“सांस लेना मुश्किल हो गया था…” बचकर निकले छात्रों ने सुनाई आपबीती
हादसे से बाहर निकलने वाले कुछ छात्रों ने बताया कि आग लगने के कुछ मिनट बाद ही हालात बिगड़ने लगे थे।
एक छात्र ने बताया, “अचानक क्लासरूम में धुआं भर गया। सांस लेना मुश्किल हो गया था। हर तरफ चीख-पुकार थी। कोई सीढ़ियों की तरफ भाग रहा था, कोई खिड़कियों की तरफ।”
एक अन्य छात्र ने कहा, “उस वक्त कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। बस जान बचाने की कोशिश कर रहे थे।”
अपने पेट्स के लिए भी रोती रही एक महिला
इस बिल्डिंग में एक पेट शॉप भी थी। आग की जानकारी मिलते ही एक महिला मौके पर पहुंची। उसके दो पालतू जानवर अंदर फंसे हुए थे।
वह रोते हुए अधिकारियों से कहती रही, “कृपया मेरे पेट्स को भी बचा लीजिए।”
हादसे ने कई परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे दिया
लखनऊ का यह अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं रहा, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी बदल गया। किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने भाई, किसी ने दोस्त।
मौके पर एक ही चीज सबसे ज्यादा दिखाई दे रही थी — इंतजार… और आंखों में दर्द।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).