Shocking: हैदराबाद के सैदाबाद स्थित एक निजी स्कूल पर दूसरी कक्षा के एक हिंदू छात्र से कथित तौर पर ‘कलमा’ और ‘सूरह फातिहा’ पढ़ने के लिए कहने का आरोप लगा है। इस मामले के सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। छात्र के माता-पिता ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल स्कूल प्रबंधन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और प्रशासन की ओर से भी किसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
15 जुलाई को सामने आया मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला 15 जुलाई को सामने आया। बताया जा रहा है कि हैदराबाद के ओल्ड सिटी इलाके के सैदाबाद स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले दूसरी कक्षा के हिंदू छात्र को कथित तौर पर ‘कलमा’ और ‘सूरह फातिहा’ याद करने और पढ़ने के लिए कहा गया।
परिवार का आरोप है कि यह निर्देश स्कूल की एक एक्टिविटी के तहत दिया गया था। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में इसे होमवर्क का हिस्सा भी बताया गया है।
माता-पिता ने स्कूल पहुंचकर जताई आपत्ति
बच्चे के माता-पिता का कहना है कि उन्हें जब इस बारे में जानकारी मिली तो वे सीधे स्कूल पहुंचे और स्कूल प्रबंधन से इस पर सवाल किए।
परिवार ने इस तरह की धार्मिक गतिविधि को गलत बताते हुए स्कूल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि किसी भी छात्र पर उसकी इच्छा या परिवार की सहमति के बिना किसी धार्मिक पाठ को पढ़ने का दबाव नहीं होना चाहिए।
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स्कूल प्रबंधन की ओर से अब तक नहीं आया कोई बयान
ताजा जानकारी के अनुसार, स्कूल प्रबंधन ने अभी तक इस पूरे मामले पर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक स्कूल की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक सफाई भी सामने नहीं आई है। वहीं स्थानीय प्रशासन या शिक्षा विभाग की ओर से भी किसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है।
मामले ने छेड़ी नई बहस
इस घटना के सामने आने के बाद शिक्षा संस्थानों में धार्मिक गतिविधियों की सीमा और छात्रों के अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कई लोग इस मामले में स्कूल प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि आधिकारिक जांच और सभी पक्षों की बात सामने आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।
आधिकारिक जांच और बयान का इंतजार
फिलहाल यह मामला माता-पिता की शिकायत और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर चर्चा में है। समाचार लिखे जाने तक न तो स्कूल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया है और न ही किसी सरकारी एजेंसी ने जांच के नतीजों की जानकारी दी है।
अब सभी की नजर स्कूल प्रबंधन और स्थानीय अधिकारियों के आधिकारिक बयान पर बनी हुई है।