Agriculture News: पीलीभीत की तराई की कृषि भूमि पर बासमती और जैविक खेती को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। टांडा बिजैसी में ‘वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र सह प्रदर्शन फार्म’ का शिलान्यास केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितिन प्रसाद और उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किया। करीब 7 एकड़ में विकसित होने वाला यह केंद्र किसानों को बीज से लेकर उत्पादन, गुणवत्ता, प्रसंस्करण, बाजार और निर्यात तक की जानकारी देने के लिए तैयार किया जाएगा।
7 एकड़ में विकसित होगा आधुनिक कृषि केंद्र
टांडा बिजैसी में लगभग 7 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित यह केंद्र बासमती और जैविक खेती के प्रशिक्षण, प्रदर्शन, क्षमता निर्माण, बीज संवर्धन और तकनीकी सहयोग का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
केंद्र का संचालन मेरठ के मोदीपुरम स्थित BEDF फार्म की तर्ज पर किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों से जोड़ना है।
प्रशिक्षण सभागार से लेकर प्रयोगशाला तक होंगी सुविधाएं
प्रस्तावित केंद्र में प्रशिक्षण सभागार, कॉन्फ्रेंस सुविधा, बासमती और जैविक कृषि के प्रदर्शन क्षेत्र, प्रयोगशाला, जैविक इनपुट भंडारण समेत अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
बीज से निर्यात तक किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण
केंद्र में अधिसूचित बासमती किस्मों और आधुनिक उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों को कीट एवं रोग प्रबंधन, जैविक खेती, जैविक इनपुट, एकीकृत कीट प्रबंधन यानी IPM और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन यानी INM जैसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए बीज संवर्धन से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। ब्रीडर सीड, फाउंडेशन सीड और प्रमाणित बीज के उत्पादन एवं संवर्धन की दिशा में काम होगा।
युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर
केंद्र में युवाओं और किसानों को बीज उत्पादन की तकनीक का प्रशिक्षण देने की भी योजना है। इसके जरिए कृषि क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
इससे खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश होगी।
बासमती की 45 किस्मों की जानकारी पर जोर
केंद्र में बासमती की विभिन्न अधिसूचित किस्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों को क्षेत्र के अनुकूल किस्मों, उत्पादन तकनीक और गुणवत्ता मानकों की जानकारी देने की योजना है।
प्रस्तावित प्रयोगशाला में बासमती की गुणवत्ता से जुड़े परीक्षणों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे निर्यात योग्य उत्पादन में गुणवत्ता और निर्धारित मानकों को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
AI और सैटेलाइट तकनीक से होगा बासमती क्षेत्र का आकलन
बासमती कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए देश में AI आधारित बासमती धान सर्वे की पहल भी शुरू की गई है।
इसका उद्देश्य बासमती की खेती के क्षेत्र, विभिन्न किस्मों और उत्पादन से जुड़े अधिक सटीक आंकड़े तैयार करना है। इसके लिए सैटेलाइट तकनीक, जियो-टैगिंग और खेत स्तर से प्राप्त आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
तैयार होने वाला डेटा बासमती उत्पादन की बेहतर योजना, किसानों को तकनीकी सलाह और निर्यात की रणनीति बनाने में उपयोगी हो सकता है।
पीलीभीत में बासमती अनुसंधान को भी मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित केंद्र को बासमती अनुसंधान से जोड़ने की योजना भी है। यहां नई बासमती किस्मों के परीक्षण और पीलीभीत की मिट्टी एवं जलवायु के अनुकूल किस्मों के मूल्यांकन की दिशा में काम किया जा सकेगा।
इससे जिले में बासमती उत्पादन को वैज्ञानिक आधार देने और किसानों को क्षेत्र के अनुसार बेहतर तकनीक उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जैविक और प्राकृतिक खेती का बनेगा प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म
केंद्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना होगा। किसानों को जैविक इनपुट, जैव-इनपुट उत्पादन और जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए किसानों को रासायनिक अवशेष मुक्त और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
FPO और स्टार्टअप्स को भी मिलेगा प्रशिक्षण
यह केंद्र सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। किसान उत्पादक संगठन यानी FPOs, उद्यमियों, स्टार्टअप्स, प्रसंस्करणकर्ताओं और निर्यातकों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इन कार्यक्रमों में कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, मार्केटिंग, निर्यात प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय बाजार के मानकों की जानकारी दी जाएगी।
FPOs और उद्यमियों को निर्यात के लिए क्षमता निर्माण और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की भी योजना है। किसानों को खेत से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ऑनलाइन और फोन के माध्यम से तकनीकी सहायता देने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
भारत का बासमती निर्यात 65 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा
भारत दुनिया के प्रमुख बासमती निर्यातक देशों में शामिल है। वर्ष 2025-26 में भारत से करीब 65 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात हुआ, जिसका मूल्य लगभग 5.67 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
मध्य-पूर्व, यूरोप और उत्तरी अमेरिका भारतीय बासमती के प्रमुख बाजारों में शामिल हैं। ऐसे में पीलीभीत जैसे बासमती उत्पादक क्षेत्र में उत्पादन, गुणवत्ता और निर्यात सुविधाओं को मजबूत करने से किसानों के लिए नए बाजार अवसर पैदा हो सकते हैं।
शिलान्यास कार्यक्रम में करीब 10 हजार लोगों की भागीदारी
शिलान्यास कार्यक्रम में किसानों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, निर्यातकों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की बड़ी भागीदारी रही। कार्यक्रम में करीब 10 हजार लोगों की सहभागिता बताई गई।
इस दौरान बासमती और जैविक कृषि से संबंधित 23 स्टॉल लगाए गए। इनमें कृषि, जैविक उत्पादों, निर्यात और संबंधित संस्थाओं की गतिविधियों एवं उत्पादों की जानकारी प्रदर्शित की गई।
जितिन प्रसाद ने उत्पादन के साथ बाजार पर दिया जोर
केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि पीलीभीत में बासमती उत्पादन की व्यापक संभावनाएं हैं। प्रस्तावित केंद्र किसानों को उत्पादन से लेकर निर्यात तक की प्रक्रिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि किसानों को सिर्फ उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय गुणवत्ता, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और निर्यात की पूरी श्रृंखला से जोड़ना जरूरी है, ताकि कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य किसानों तक पहुंच सके।
उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
सूर्य प्रताप शाही ने आधुनिक कृषि तकनीक पर दिया जोर
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने और कृषि उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया।
परियोजना के लिए टांडा बिजैसी में भूमि उपलब्ध कराए जाने के बाद अब केंद्र के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके जरिए पीलीभीत और आसपास के क्षेत्रों में बासमती एवं जैविक खेती से जुड़े किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग देने का लक्ष्य है।
पीलीभीत की कृषि अर्थव्यवस्था को मिल सकती है नई दिशा
यह परियोजना सिर्फ एक प्रशिक्षण केंद्र तक सीमित नहीं है। इसके जरिए खेती, बीज, अनुसंधान, जैविक उत्पादन, गुणवत्ता परीक्षण, प्रसंस्करण, बाजार और निर्यात को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
यदि प्रस्तावित सुविधाएं योजना के अनुसार विकसित होती हैं तो किसानों को स्थानीय स्तर पर आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ सलाह मिलने के साथ अपनी उपज को बेहतर बाजार से जोड़ने के नए अवसर मिल सकते हैं।
पीलीभीत पहले से ही कृषि और धान उत्पादन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में बासमती और जैविक कृषि पर केंद्रित यह परियोजना जिले को कृषि उत्पादन से आगे बढ़ाकर प्रसंस्करण, गुणवत्ता और निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
खेत से बाजार और बाजार से दुनिया तक पहुंचेगा बासमती
वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर विकसित होने वाला यह केंद्र पीलीभीत के किसानों के लिए आधुनिक कृषि का नया मंच तैयार करेगा। इसका लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, वैज्ञानिक खेती, बेहतर बाजार और वैश्विक निर्यात से किसानों को जोड़ना है।
अगर प्रशिक्षण, अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज और बाजार संपर्क का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचता है, तो पीलीभीत की बासमती कृषि जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
शिलान्यास कार्यक्रम में जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, APEDA अध्यक्ष अभिषेक देव, BEDF निदेशक डॉ. रितेश शर्मा, APEDA की महाप्रबंधक विनिता सुधांशु समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, किसान, निर्यातक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).