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PILIBHIT SCAM: फर्जी प्रमाण पत्र से मेडिकल कॉलेज में दाखिला! बरखेड़ा चेयरमैन गिरफ्तार, जानिए कैसे खुली BJP नेता की पोल?

PILIBHIT SCAM: फर्जी प्रमाण पत्र से मेडिकल कॉलेज में दाखिला! बरखेड़ा चेयरमैन गिरफ्तार, जानिए कैसे खुली BJP नेता की पोल?

PILIBHIT SCAM: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरानी की बात ये है कि इस मामले में पुलिस ने BJP से बरखेड़ा नगर पंचायत चेयरमैन श्याम बिहारी भोजवाल समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए बाजपुर का पता दिखाकर फर्जी जाति और स्थायी निवास प्रमाण पत्र तैयार कराए गए। मामला तब खुला जब इन प्रमाण पत्रों का प्रशासन ने सत्यापन कराया और कागजों में दर्ज पते की हकीकत मौके पर अलग मिली।

लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मेडिकल कॉलेज के दाखिले के लिए ये प्रमाण पत्र तैयार कैसे हुए और इस पूरे मामले में बरखेड़ा के चेयरमैन का नाम कैसे आया? कहानी यहीं से शुरू होती है।

मेडिकल कॉलेज के सत्यापन से खुला मामला

मामला उत्तराखंड के बाजपुर का है। मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए जमा किए गए प्रमाण पत्रों को सत्यापन के लिए प्रशासन के पास भेजा गया था। दस्तावेजों में दर्ज पतों को लेकर संदेह हुआ तो बाजपुर प्रशासन ने राजस्व टीम को मौके पर भेजकर जांच कराई।

टीम ने प्रमाण पत्रों में दर्ज पतों का स्थलीय सत्यापन किया। जांच में सामने आया कि कागजों पर जिन पतों को संबंधित अभ्यर्थियों का निवास बताया गया था, मौके पर स्थिति उससे अलग थी। कुछ मामलों में बताए गए पते पर संबंधित लोगों के निवास के पर्याप्त प्रमाण भी नहीं मिले।

यहीं से प्रशासन का शक और गहरा गया। इसके बाद सिर्फ मौके पर जाकर पता देखने के बजाय सरकारी रिकॉर्ड से भी दस्तावेजों का मिलान कराया गया।

कागजों और सरकारी रिकॉर्ड में भी सामने आई गड़बड़ी

प्रशासन ने संबंधित विभागों के रिकॉर्ड खंगाले। प्रमाण पत्रों के साथ लगाए गए दस्तावेजों और सरकारी अभिलेखों की जानकारी का मिलान कराया गया।

जांच में कथित तौर पर ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए। प्रशासन को गलत तथ्यों और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण पत्र तैयार कराने से जुड़े तथ्य मिलने की बात सामने आई।

इसके बाद मामले में शामिल अभ्यर्थियों के परिजनों को तहसील परिसर में बुलाया गया।

तहसील में हुई पूछताछ, दर्ज किए गए बयान

मामला गंभीर होने के बाद अपर जिलाधिकारी, एसडीएम बाजपुर, तहसीलदार और राजस्व टीम की मौजूदगी में संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए। उनसे प्रमाण पत्र बनवाने और उसमें दर्ज पते से जुड़ी जानकारी के बारे में पूछताछ की गई।

जांच आगे बढ़ी तो प्रशासन ने संबंधित प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया।

लेकिन इस कार्रवाई के साथ ही जांच में एक और नाम सामने आया—पीलीभीत की बरखेड़ा नगर पंचायत के चेयरमैन श्याम बिहारी भोजवाल का।

चेयरमैन तक कैसे पहुंची जांच?

जांच में सामने आए दस्तावेजों और पूछताछ के बाद श्याम बिहारी भोजवाल की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए उनके बेटे के नाम से बाजपुर का पता दिखाकर जाति और स्थायी निवास प्रमाण पत्र तैयार कराया गया।

यहीं से मामला सिर्फ कुछ संदिग्ध प्रमाण पत्रों का नहीं रह गया। क्योंकि जिस व्यक्ति का नाम सामने आया, वह पीलीभीत की बरखेड़ा नगर पंचायत का चेयरमैन है।

पुलिस ने मामले में श्याम बिहारी भोजवाल समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका, दस्तावेजों और प्रमाण पत्र तैयार कराने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।

हालांकि, गिरफ्तारी या एफआईआर में नाम होना अदालत से दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में आरोपों की सच्चाई और संबंधित लोगों की अंतिम जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

अब पुराने प्रमाण पत्र भी जांच के घेरे में

मामले में प्रशासन की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। अब तहसील स्तर से पहले जारी किए गए संदिग्ध प्रमाण पत्रों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।

प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि पहले जारी किए गए प्रमाण पत्रों में कहीं इसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई। यानी जांच अब सिर्फ मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए इस्तेमाल किए गए प्रमाण पत्रों तक सीमित नहीं है।

अगर पुराने रिकॉर्ड की जांच में भी गलत पते या कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल सामने आता है तो इस मामले का दायरा और बढ़ सकता है।

अब जांच में क्या सामने आना बाकी?

फिलहाल पुलिस और प्रशासन के सामने कई सवाल हैं। कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने की प्रक्रिया क्या थी? बाजपुर का पता किस तरह इस्तेमाल किया गया? प्रमाण पत्रों के लिए दस्तावेज कहां से तैयार हुए और इसमें किन लोगों की भूमिका रही?

सबसे अहम सवाल यह भी है कि क्या मामला सिर्फ इन प्रमाण पत्रों तक सीमित है या पहले भी इसी तरह के दस्तावेज तैयार कराए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जा रही है।

फिलहाल मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए प्रमाण पत्रों के सत्यापन से शुरू हुई जांच बरखेड़ा नगर पंचायत के चेयरमैन की गिरफ्तारी तक पहुंच चुकी है। अब पुराने रिकॉर्ड और आगे की पुलिस जांच से इस मामले की बाकी परतें खुलनी बाकी हैं।