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पीलीभीत में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत 86 शिक्षकों को हेल्थ कार्ड वितरित। मिलेगा कैशलेस इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा।

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पीलीभीत को मिला कृषि विकास का नया विजन: हाईटेक नर्सरी, एक्सपोर्ट सेंटर और आधुनिक मंडियों से किसानों की बदलेगी तस्वीर…

पीलीभीत, पूरनपुर तराई क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी। 26 जुलाई से कासगंज–ऐशबाग एक्सप्रेस शुरू होगी, यात्रियों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी सुविधा।

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बुलंदशहर: जली वर्दी, बहे आंसू-अब कानून ने भीड़ से बदला लिया!

स्याना हिंसा कांड में बड़ा फैसला: 38 आरोपी दोषी करार, इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या के 6 हत्यारे चिन्हित, 1 अगस्त को सुनाई जाएगी सजा

6 साल बाद इंसाफ की दस्तक! इंस्पेक्टर सुबोध के खून के दाग में 38 दोषियों की पहचान – स्याना कांड का फैसला दहाड़ बनकर आया

एक पुलिस अफसर की वर्दी सुलग गई, चौकी जल गई और कानून की आंखों में धुआं भर गया था… अब सालों बाद इंसाफ की रोशनी उन धुंधलकों को चीरती नजर आई है। बुलंदशहर के बहुचर्चित स्याना हिंसा कांड में अदालत ने 38 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। 1 अगस्त को इनके गुनाहों की सजा तय की जाएगी।”

क्या था स्याना हिंसा कांड?

3 दिसंबर 2018 का वो दिन जब बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र में एक तीन दिवसीय धार्मिक इज्तेमा के अंतिम दिन गौवंश के अवशेष मिलने की सूचना फैली। देखते ही देखते माहौल उग्र हो गया। हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं और भीड़ ने चिंगरावठी पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया। चौकी को आग के हवाले कर दिया गया और भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की सर्विस रिवॉल्वर छीनकर गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

एडीजे 12 कोर्ट का फैसला: सभी 38 आरोपी दोषी

बुलंदशहर की एडीजे 12 कोर्ट ने आज 31 जुलाई को स्याना हिंसा कांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

कोर्ट ने 38 आरोपियों को दोषी करार दिया है।

इनमें से प्रशांत नट, डेविड, जोनी, राहुल, लोकेंद्र उर्फ मामा को इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या का दोषी माना गया है।

बाकी 33 आरोपियों को हत्या का प्रयास, बलवा, मारपीट, सार्वजनिक और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया गया।

मामले की पूरी अदालती कार्यवाही

कुल 44 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।

इनमें से एक नाबालिग था और 5 की मुकदमे के दौरान मौत हो गई।

अब शेष 38 दोषियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

1 अगस्त 2025 को सजा सुनाई जाएगी।

सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया

एडीजीसी यशपाल सिंह राघव ने मीडिया को बताया कि,

“कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी करार दिया है। यह निर्णय न्याय और कानून की जीत है।”

हिंसा के पीछे की वजह और माहौल

3 दिवसीय धार्मिक इज्तेमा में जुटी भीड़ के बीच गौवंश अवशेष मिलने की अफवाह तेजी से फैली।

हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता उग्र हो गए।

चिंगरावठी पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया गया।

भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध की गोली मारकर हत्या कर दी और कई पुलिसकर्मी जान बचाकर भागे।

जनता को क्या सीख मिलती है?

स्याना कांड न सिर्फ एक हिंसक घटना थी, बल्कि यह एक प्रशासनिक, धार्मिक और सामाजिक चेतावनी भी थी कि कैसे अफवाह और उन्माद कानून को कुचल सकता है। अब जबकि कोर्ट ने दोषियों को सजा देने की ओर कदम बढ़ाया है, यह न्याय व्यवस्था की एक बड़ी जीत कही जाएगी।

6 साल बाद भले ही न्याय की गाड़ी धीरे चली, लेकिन अब उसका पहिया अंतिम फैसले की ओर है। इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की शहादत व्यर्थ नहीं गई। 1 अगस्त को जब सजा सुनाई जाएगी, तो शायद उनके परिजनों और देश की न्याय व्यवस्था को कुछ सुकून जरूर मिलेगा।

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