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Sitapur: पुलिस ने चोर समझकर बेरहमी से पीटा ”युवक की मौत” शव रखकर सड़क जाम, कई थानों की फोर्स मौके पर

सीतापुर में पुलिस पर बेरहमी से पीटने का आरोप — व्यक्ति की मौत से भड़का गुस्सा

Sitapur: रात की गश्त ने ली निर्दोष की जान

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के थाना सिधौली क्षेत्र में पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने एक निर्दोष युवक को इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। 26 वर्षीय सत्यपाल यादव, जो जाफरीपुरवा चौराहे पर अपनी दुकान की रखवाली कर रहा था, पुलिस की मार का शिकार बन गया। परिवार और ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के समय दरोगा मणिकांत त्रिपाठी नशे की हालत में थे और बिना किसी ठोस कारण के सत्यपाल पर लाठियां बरसाईं।

रात का घटनाक्रम: पूछताछ से पिटाई तक

घटना की रात, हल्का इंचार्ज मणिकांत त्रिपाठी और एक आरक्षी गश्त के दौरान जाफरीपुरवा चौराहे से गुजर रहे थे। उन्होंने देखा कि सत्यपाल अपनी दुकान के बाहर बने काउंटर पर लेटा हुआ है। पूछताछ में जब सत्यपाल ने बताया कि वह दुकान की रखवाली कर रहा है, तब भी आरोप है कि दरोगा और सिपाही ने उसे चोर समझकर पीटना शुरू कर दिया। इस पिटाई में सत्यपाल गंभीर रूप से घायल हो गया और वहीं पड़ा तड़पता रहा।

Sitapur: इलाज में देरी और मौत

सुबह जब परिवार वालों को घटना की जानकारी मिली, तो वे तुरंत सत्यपाल को सीएचसी ले गए। हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। यह देरी और प्राथमिक उपचार की कमी ने उसकी जान ले ली।

परिवार और ग्रामीणों का गुस्सा: सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन

सत्यपाल की मौत की खबर फैलते ही गुस्साए परिजन और ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि यह सीधा-सीधा पुलिस की बर्बरता का मामला है और दोषियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मौके पर कई थानों की पुलिस पहुंच गई और परिजनों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया गया।

Sitapur: पुलिस का पक्ष और जांच का आश्वासन

एएसपी सीतापुर ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर गंभीरता से जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी ऐसे मामलों में जांच लंबी खिंच जाती है और दोषियों को बचा लिया जाता है।

समाज पर असर: पुलिसिया बर्बरता के खतरे

इस तरह की घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था में जनता का विश्वास तोड़ती हैं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करती हैं। जब सुरक्षा देने वाली पुलिस ही हिंसा का कारण बन जाए, तो आम नागरिकों के लिए न्याय और सुरक्षा दोनों ही सवालों के घेरे में आ जाते हैं। इससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर होता है और व्यवस्था के प्रति आक्रोश बढ़ता है।

सत्यपाल यादव की मौत केवल एक परिवार का नुकसान नहीं है, यह पुलिस पर जनता के भरोसे को गहरी चोट है। यह मामला एक चेतावनी है कि कानून का पालन करवाने वालों पर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना, ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा। अब देखना यह है कि सीतापुर पुलिस अपने ही विभाग के दोषियों पर कब और कैसी कार्रवाई करती है।

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