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पीलीभीत: योगी सरकार की लघु सिंचाई योजना से खेतों तक पहुँचा पानी, किसानों की बदली तकदीर

CM लघु सिंचाई योजना से पीलीभीत के किसानों की सिंचाई क्षमता में बड़ा इजाफा। उथले, मध्यम व गहरे नलकूप पर भारी अनुदान, जानिए पूरा विवरण।

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना से बदली पीलीभीत के खेतों की तस्वीर
सरकारी मंशा, प्रशासनिक प्रयास और अनुदान ने किसानों को बनाया आत्मनिर्भर

पीलीभीत उत्तर प्रदेश में खेती अब केवल मौसम और बारिश के भरोसे नहीं रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने किसानों की सबसे बड़ी समस्या — सिंचाई — को जड़ से मजबूत करने का संकल्प लिया है। उसी संकल्प का प्रत्यक्ष प्रमाण है मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना, जिसने पीलीभीत जिले सहित पूरे प्रदेश के किसानों की सिंचन क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है।

आज पीलीभीत के गांवों में खेतों तक पहुंचता पानी, हरे-भरे खेत और समय पर सिंचाई — यह सब किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि सरकार की स्पष्ट मंशा, प्रशासन की सक्रियता और योजनाओं के धरातल पर उतरने का नतीजा है।

 सरकार की सोच: किसान आत्मनिर्भर हो, खेती मजबूत बने

प्रदेश सरकार की नीति स्पष्ट है —
“किसान को साधन दीजिए, वह खुद उत्पादन बढ़ा देगा।”

इसी सोच के तहत नहर, तालाब, राजकीय नलकूप, बांध-बंधियों के साथ-साथ निजी नलकूपों पर भारी अनुदान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के माध्यम से किसानों को उथले, मध्यम और गहरे नलकूपों के निर्माण के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे किसान सिंचाई के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें।

इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि छोटे और सीमांत किसान भी बराबरी से लाभान्वित हो रहे हैं।

आवेदन प्रक्रिया, पारदर्शिता और तकनीक का मेल

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत लाभ लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है।
इस प्रक्रिया ने बिचौलियों पर लगाम लगाई और योजनाओं को सीधे किसानों तक पहुंचाया।

आवश्यक दस्तावेज:

खसरा-खतौनी की नकल

61ख की नकल (भूमि संबंधी दस्तावेज)

इंजन क्रय का कोटेशन व बिल

पासपोर्ट साइज फोटो

निवास / जाति प्रमाण पत्र

ग्राम सभा प्रस्ताव की नकल

आधार कार्ड

बैंक पासबुक की छायाप्रति

बोरिंग कार्य शासन द्वारा चयनित एजेंसियों से कराया जाता है, जिसमें गुणवत्ता नियंत्रण के तहत आईएसआई मार्क पाइप का प्रयोग अनिवार्य है। यह व्यवस्था भ्रष्टाचार पर अंकुश और टिकाऊ सिंचाई ढांचे की गारंटी देती है।

उथले नलकूप, छोटे किसानों के लिए बड़ा सहारा

इस योजना का मूल उद्देश्य लघु और सीमांत किसानों को सिंचाई में आत्मनिर्भर बनाना है।

30 मीटर तक गहराई

110 एमएम (4 इंच) पीवीसी पाइप

बोरिंग + पम्पसेट + जल वितरण प्रणाली शामिल

अनुदान विवरण:

सामान्य श्रेणी लघु किसान: ₹33,800

सामान्य श्रेणी सीमांत किसान: ₹45,400

अनुसूचित जाति / जनजाति लघु व सीमांत किसान: ₹57,000

प्रदेश में वर्ष 2024-25 से सितम्बर 2025 तक
3,83,116 से अधिक उथले नलकूप स्थापित किए गए
, जिससे लाखों किसानों को सीधा लाभ मिला।

 मध्यम गहरे नलकूप, बड़े क्षेत्र में सिंचाई का समाधान

31 से 60 मीटर गहराई वाले जलग्राही क्षेत्रों में मध्यम गहरे नलकूप किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।

प्रमुख विशेषताएं:

सभी जाति/श्रेणी के किसान पात्र

लागत का 50% अनुदान

अधिकतम अनुदान: ₹1,75,000

जल वितरण प्रणाली हेतु अतिरिक्त ₹14,000

ऊर्जीकरण हेतु ₹68,000 तक अलग से अनुदान

 कुल मिलाकर ₹2,57,000 तक का सरकारी सहयोग

प्रति नलकूप 10 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता का सृजन।

2024-25 से सितम्बर 2025 तक
8,740 से अधिक मध्यम गहरे नलकूप
स्थापित किए गए।

 गहरे नलकूप, जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए संजीवनी

जहां जल स्तर गहरा है, वहां 61 से 90 मीटर तक गहरे नलकूप लगाए जा रहे हैं।

अनुदान का पूरा पैकेज:

नलकूप निर्माण: अधिकतम ₹2,65,000

जल वितरण प्रणाली: ₹14,000

ऊर्जीकरण: ₹68,000

 कुल सरकारी सहायता: ₹3,47,000 प्रति नलकूप

प्रति नलकूप 12 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता

सितम्बर 2025 तक
3,935 से अधिक गहरे नलकूपों की बोरिंग
कर किसानों को लाभान्वित किया गया।

 पीलीभीत प्रशासन की भूमिका, योजना से परिणाम तक

पीलीभीत प्रशासन ने योजना के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाई है।

समयबद्ध स्वीकृति

ऑनलाइन निगरानी

गुणवत्ता नियंत्रण

पात्र किसानों तक सीधा लाभ

इन प्रयासों से यह सुनिश्चित किया गया कि सरकार की मंशा कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों में पानी बनकर बहे।

 किसान तक सही जानकारी, सही समय पर

इस खबर के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट है कि:

सरकार किसानों के साथ खड़ी है

सिंचाई के लिए धन की कमी अब बाधा नहीं

योजनाओं की जानकारी लेकर किसान स्वयं आगे बढ़ें

पीलीभीत जैसे कृषि प्रधान जिले में उत्पादन और आय दोनों बढ़ाई जा सकती है

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना केवल एक योजना नहीं, बल्कि
पीलीभीत के किसानों के भविष्य की मजबूत नींव है।

अगर किसान जागरूक होंगे, योजनाओं से जुड़ेंगे और प्रशासन सहयोग करेगा,
तो आने वाले समय में पीलीभीत की पहचान
“पानी से सींचे समृद्ध खेतों” के रूप में होगी।