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महोबा में यूट्यूब वीडियो देखकर मशाल बनाने की कोशिश मासूम को भारी पड़ गई। आग की लपटों में झुलसा 9 वर्षीय बच्चा, अस्पताल में भर्ती।

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Pilibhit News: घुंघचाई के उदरहा मोड़ पर बस और ई-रिक्शा की टक्कर में 2 लोगों की मौत, 2 घायल। पुलिस ने बस कब्जे में लेकर जांच शुरू की।

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दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल-रेस्टोरेंट में भीषण आग से 20 लोगों की मौत और 40 से ज्यादा घायल। राहत-बचाव जारी, जांच शुरू।

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गाजियाबाद के सूर्या हत्याकांड में पीलीभीत कनेक्शन सामने आया। मुख्य आरोपी असद के करीबी फरहान और आतिफ गिरफ्तार, जांच में नए खुलासे।

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प्रयागराज में एक ही परिवार के 4 लोगों के शव बंद मकान से मिलने से सनसनी। पुलिस हत्या के कारणों, लापता सदस्य और अन्य पहलुओं की जांच में जुटी।

प्रयागराज में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या, बंद मकान से मिले शव, जांच में जुटीं पुलिस  साउथ…

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Shocking: 13 साल की उम्र में ‘पत्थर’ बनती जा रही बच्ची, आखिर क्या है बीमारी ? होश उड़ा देगा सच!

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सोचिए, जब खेलने-कूदने और पढ़ाई की उम्र में किसी बच्चे का शरीर धीरे-धीरे पत्थर जैसा सख्त होने लगे। छत्तीसगढ़ की एक 14 साल की बच्ची के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। एक दुर्लभ त्वचा रोग ने न सिर्फ उसके शरीर को जकड़ लिया है, बल्कि उसका बचपन, पढ़ाई और सामान्य जीवन भी छीन लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने इस गंभीर बीमारी की ओर पूरे देश का ध्यान खींचा है।

छत्तीसगढ़ की राजेश्वरी की दर्दनाक कहानी

छत्तीसगढ़ की रहने वाली 14 वर्षीय राजेश्वरी एक बेहद दुर्लभ स्किन डिज़ीज़ से पीड़ित है। इस बीमारी के कारण उसकी त्वचा धीरे-धीरे पत्थर जैसी सख्त और मोटी होती जा रही है। हालत यह है कि हाथ-पैरों और शरीर पर मोटी, खुरदरी परतें जम चुकी हैं।

‘स्टोन स्किन डिज़ीज़’ क्या है?

डॉक्टरों के अनुसार, राजेश्वरी को रेयर स्किन डिज़ीज़ ‘इचथियोसिस हिस्ट्रिक्स’ है। इस बीमारी में त्वचा पर कांटेदार, मोटी और सख्त परतें बनने लगती हैं। देखने में ऐसा लगता है मानो शरीर पर पत्थर या पेड़ की छाल जम गई हो। यही वजह है कि इसे आमतौर पर ‘स्टोन स्किन डिज़ीज़’ कहा जाता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

राजेश्वरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसकी त्वचा साफ तौर पर पत्थर जैसी दिखाई दे रही है। खासतौर पर हाथ-पैरों में मोटी और सख्त परतें बन चुकी हैं, जिससे उसे चलने-फिरने में भी काफी परेशानी होती है।

दुनिया में गिने-चुने मामले

जानकारी के मुताबिक, यह बीमारी दुनिया में बेहद दुर्लभ है। अब तक दुनियाभर में इसके सिर्फ 24 मामले ही सामने आए हैं। इसी वजह से इस बीमारी पर रिसर्च भी सीमित है और इलाज को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।

क्या इस बीमारी का इलाज है?

डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी संक्रामक नहीं है, यानी एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलती। हालांकि, दुखद सच्चाई यह है कि इसका कोई स्थायी इलाज फिलहाल मौजूद नहीं है। नियमित रूप से मॉइस्चराइज़र लगाने और विशेष देखभाल से इसके असर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

चार साल की उम्र से शुरू हुई बीमारी

परिजनों के अनुसार, राजेश्वरी को यह बीमारी चार साल की उम्र से होने लगी थी। समय के साथ बीमारी बढ़ती चली गई। अब हालात यह हैं कि बीमारी ने न सिर्फ उसके शरीर को जकड़ लिया है, बल्कि उसका बचपन, पढ़ाई और सामान्य जीवन भी प्रभावित कर दिया है।

परिजनों की पीड़ा

राजेश्वरी के परिवार का कहना है कि वे हर संभव इलाज की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन बीमारी की दुर्लभता के कारण उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाया। परिवार अब सरकार और समाज से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है।