सोचिए, जब खेलने-कूदने और पढ़ाई की उम्र में किसी बच्चे का शरीर धीरे-धीरे पत्थर जैसा सख्त होने लगे। छत्तीसगढ़ की एक 14 साल की बच्ची के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। एक दुर्लभ त्वचा रोग ने न सिर्फ उसके शरीर को जकड़ लिया है, बल्कि उसका बचपन, पढ़ाई और सामान्य जीवन भी छीन लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने इस गंभीर बीमारी की ओर पूरे देश का ध्यान खींचा है।
छत्तीसगढ़ की राजेश्वरी की दर्दनाक कहानी
छत्तीसगढ़ की रहने वाली 14 वर्षीय राजेश्वरी एक बेहद दुर्लभ स्किन डिज़ीज़ से पीड़ित है। इस बीमारी के कारण उसकी त्वचा धीरे-धीरे पत्थर जैसी सख्त और मोटी होती जा रही है। हालत यह है कि हाथ-पैरों और शरीर पर मोटी, खुरदरी परतें जम चुकी हैं।
‘स्टोन स्किन डिज़ीज़’ क्या है?
डॉक्टरों के अनुसार, राजेश्वरी को रेयर स्किन डिज़ीज़ ‘इचथियोसिस हिस्ट्रिक्स’ है। इस बीमारी में त्वचा पर कांटेदार, मोटी और सख्त परतें बनने लगती हैं। देखने में ऐसा लगता है मानो शरीर पर पत्थर या पेड़ की छाल जम गई हो। यही वजह है कि इसे आमतौर पर ‘स्टोन स्किन डिज़ीज़’ कहा जाता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
राजेश्वरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसकी त्वचा साफ तौर पर पत्थर जैसी दिखाई दे रही है। खासतौर पर हाथ-पैरों में मोटी और सख्त परतें बन चुकी हैं, जिससे उसे चलने-फिरने में भी काफी परेशानी होती है।
छत्तीसगढ़ में अनोखा मामला : लड़की का शरीर बनता जा रहा है पत्थर!
पीड़िता का नाम राजेश्वरी बताया जा रहा है, वह नारायणपुर, विजयवाडा छत्तीसगढ की रहने वाली है, वह एक गंभीर बीमारी से ग्रसित है!
CM @vishnudsai कृपया संज्ञान लें! pic.twitter.com/HUmNHyYypy— Vishal JyotiDev Agarwal 🇮🇳 (@JyotiDevSpeaks) December 19, 2025
दुनिया में गिने-चुने मामले
जानकारी के मुताबिक, यह बीमारी दुनिया में बेहद दुर्लभ है। अब तक दुनियाभर में इसके सिर्फ 24 मामले ही सामने आए हैं। इसी वजह से इस बीमारी पर रिसर्च भी सीमित है और इलाज को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।
क्या इस बीमारी का इलाज है?
डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी संक्रामक नहीं है, यानी एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलती। हालांकि, दुखद सच्चाई यह है कि इसका कोई स्थायी इलाज फिलहाल मौजूद नहीं है। नियमित रूप से मॉइस्चराइज़र लगाने और विशेष देखभाल से इसके असर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
चार साल की उम्र से शुरू हुई बीमारी
परिजनों के अनुसार, राजेश्वरी को यह बीमारी चार साल की उम्र से होने लगी थी। समय के साथ बीमारी बढ़ती चली गई। अब हालात यह हैं कि बीमारी ने न सिर्फ उसके शरीर को जकड़ लिया है, बल्कि उसका बचपन, पढ़ाई और सामान्य जीवन भी प्रभावित कर दिया है।
परिजनों की पीड़ा
राजेश्वरी के परिवार का कहना है कि वे हर संभव इलाज की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन बीमारी की दुर्लभता के कारण उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाया। परिवार अब सरकार और समाज से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).